इस मामले का असर आने वाले चुनाव पर होगा।
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सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह राजीव कुमार को सीबीआई के सामने पेशी का हुक्म दिया और उनपर जांच से भागने के आरोप लगे, दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल सरकार ने शारदा चिटफंड घोटाले के बारे में बार-बार जो सफाइयां पेश कीं, लेकिन राजीव कुमार के पक्ष में मजबूत दलीलें नहीं पेश कर पाई, उससे कहीं न कहीं ममता बनर्जी का आत्मविश्वास डगमगाया है। जाहिर है, इस स्थिति का फायदा भाजपा हर तरीके से उठाने वाली है और अपनी आगामी रैलियों में ममता और महागठबंधन के नेताओं के खिलाफ माहौल बनाने का कोई मौका नहीं छोड़ने वाली है।
लेकिन इस पूरे मामले में अगर सबसे ज्यादा किसी की विश्वसनीयता और राजनीतिक इस्तेमाल पर सवाल उठे हैं तो वह है सीबीआई और कोलकाता पुलिस, जिस तरह दोनों के बीच टकराव को लेकर सियासत हुई, उससे इतना साफ हो गया कि सीबीआई की इस कार्रवाई को हर हाल में चुनावी चश्मे से ही देखा जाएगा।
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