फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लोकसभा चुनाव 2019: वोट डालने के बाद इस अधिकार को कब समझेंगे भारतीय?

विज्ञापन
क्या जागरूक होने का अर्थ सिर्फ अपने मतदान के अधिकार का प्रयोग करना भर है? - फोटो : Social media
विज्ञापन

देश में एक बार फिर चुनाव होने जा रहे हैं और लगभग हर राजनैतिक दल मतदाताओं को "जागरूक" करने में लगा है। लेकिन इस चुनाव में बार ना तो कोई लहर है और ना ही कोई ठोस मुद्दे यानी ना सत्ताविरोधी लहर ना विपक्ष के पक्ष में हवा। खास बात यह है कि इस बार भ्रष्टाचार का मुद्दा ना के बराबर सामने आया है जो अब तक के लगभग हर चुनाव में विपक्षी दलों का एक महत्वपूर्ण हथियार होता था। 

विज्ञापन


क्यों जरूरी है जागरूकता? 
बहरहाल,  इस चुनावी माहौल में सत्ता हासिल करने के लिए राजनैतिक दलों द्वारा मतदाताओं को उनके छोटे छोटे स्वार्थों का लालच दिखाकर उन्हें भारी संख्या में मतदान करने के लिए यह कहकर प्रोत्साहित किया जाता है कि आपका जागरूक होना आवश्यक है। मतदान आपका अधिकार भी है और फ़र्ज़ भी। अपने अधिकार के प्रति जागरूक हों और "देशहित" में मतदान अवश्य करें, तो अब समय आ गया है कि देश का मतदाता अपने  "जागरूक" होने का अर्थ  समझे। क्या जागरूक होने का अर्थ सिर्फ अपने मतदान के अधिकार का प्रयोग करना भर है? क्या उसका फ़र्ज़ केवल अपने छोटे छोटे स्वार्थों की पूर्ति करना भर है? क्या उसकी नियति इन राजनैतिक दलों के हाथों की कठपुतली बनना भर है? 

क्या अर्थ है मतदान के अधिकार का? 
सच तो यह है कि देश के मतदाता की नियति उस दिन बदलेगी जिस दिन वो सच में जागरूक होगा। जिस दिन वो जाति धर्म से ऊपर उठकर सोचेगा, निजस्वार्थ से पहले देशहित की सोचेगा। वो जागरूक तब होगा जब वो मुफ्त में मिलने वाली हर उस चीज़ को ठुकराएगा जो उसे पंगु बनाए। वो जागरूक तब होगा जब वो अपनी भुजाएं हाथ फैलाने के लिए नहीं बल्कि मेहनत के लिए उठाएगा, तब वो जागरूक मतदाता किसी के हाथों की कठपुतली नहीं होगा। वो ना अली होगा ना बजरंगबली होगा केवल “जागरूक मतदाता”होगा। और फिर वो अपनी उंगली से केवल अपनी ही नहीं देश की तक़दीर बदलने का भी माद्दा रखेगा।
विज्ञापन


कहने का अर्थ यह है कि वोट करने का अर्थ केवल वोट डालकर घर आने तक ही सीमित नहीं है और ना ही राजनीतिक दलों की बुराई करने तक। दरअसल, वोटिंग के बाद भी नागरिक के तौर पर हर व्यक्ति की जिम्मेदारी होती है कि वह अपने समाज, राज्य और राष्ट्र के प्रति उन दायित्वों को समझे जो उसके नैतिक और मौलिक कर्तव्य हैं। अपने घर, परिवार से निकलर अपने मोहल्ले, कॉलोनी, क्षेत्र और शहर के भीतर की सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक बुराइयों को दूर करने के लिए वैसे ही एक्टिव रहे जैसे की कोई जनप्रतिनिधि रहता है।

दरअसल, हर नागरिक स्वयं को सेवक और जागरूक नागरिक ही समझकर चले तो ही उस मताधिकार का वास्तिवक अर्थ सामने निकलकर आता है। इस लोकसभा चुनाव में यदि मतदान के अधिकार के अलावा नागरिक अधिकारों के प्रति भी जागरूकता आए तो यह राष्ट्र के लिए अच्छे संकेत होंगे।  
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

विज्ञापन

भारत में जनता मत के अधिकार को लेकर अब भी गंभीर नहीं है। - फोटो : PTI
नागरिकों को समझना होगा अपने कर्तव्यों को 
सच तो यह है कि देश के मतदाता की नियति उस दिन बदलेगी जिस दिन वो सच में जागरूक होगा। जिस दिन वो जाति धर्म से ऊपर उठकर सोचेगा, निजस्वार्थ से पहले देशहित की सोचेगा। वो जागरूक तब होगा जब वो मुफ्त में मिलने वाली हर उस चीज़ को ठुकराएगा जो उसे पंगु बनाए। वो जागरूक तब होगा जब वो अपनी भुजाएं हाथ फैलाने के लिए नहीं बल्कि मेहनत के लिए उठाएगा, तब वो जागरूक मतदाता किसी के हाथों की कठपुतली नहीं होगा। वो ना अली होगा ना बजरंगबली होगा केवल “जागरूक मतदाता”होगा। और फिर वो अपनी उंगली से केवल अपनी ही नहीं देश की तक़दीर बदलने का भी माद्दा रखेगा।

मतदान करने का अर्थ केवल वोट डालकर घर आने तक ही सीमित नहीं है और ना ही राजनीतिक दलों की बुराई करने तक। दरअसल, वोटिंग के बाद भी नागरिक के तौर पर हर व्यक्ति की जिम्मेदारी होती है कि वह अपने समाज, राज्य और राष्ट्र के प्रति उन दायित्वों को समझे जो उसके नैतिक और मौलिक कर्तव्य हैं। अपने घर, परिवार से निकलर अपने मोहल्ले, कॉलोनी, क्षेत्र और शहर के भीतर की सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक बुराइयों को दूर करने के लिए वैसे ही एक्टिव रहे जैसे की कोई जनप्रतिनिधि रहता है।

दरअसल, हर नागरिक स्वयं को सेवक और जागरूक नागरिक ही समझकर चले तो ही उस मताधिकार का वास्तिवक अर्थ सामने निकलकर आता है। इस लोकसभा चुनाव में यदि मतदान के अधिकार के अलावा नागरिक अधिकारों के प्रति भी जागरूकता आए तो यह राष्ट्र के लिए अच्छे संकेत होंगे। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें