फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पश्चिम बंगाल लोकसभा चुनाव 2024: दार्जिलिंग में मौसम की तरह बदलते हैं राजनीति रंग

सार

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर भाजपा अपनी इस सीट को बचाने में कामयाब रहती है तो यह पहला मौका होगा जब कोई पार्टी लगातार चार बार यहां से जीतेगी। 

विज्ञापन
अगर भाजपा अपनी इस सीट को बचाने में कामयाब रहती है तो यह पहला मौका होगा जब कोई पार्टी लगातार चार बार यहां से जीतेगी। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पश्चिम बंगाल में पर्वतीय क्षेत्र की एकमात्र संसदीय सीट दार्जिलिंग में राजनीति का रंग भी इलाके के मौसम की तरह ही बदलता रहता है। यह सीट बीते तीन बार से भाजपा ही जीतती रही है। लेकिन अकेले अपने बूते नहीं बल्कि स्थानीय गोरखा पार्टियों के समर्थन से।

विज्ञापन


अबकि बार भी भाजपा ने पिछले विजेता राजू विस्टा को दोबारा मैदान में उतारा है। लेकिन भगवा पार्टी के ही कालिम्पोंग के विधायक विष्णु शर्मा ने निर्दलीय के तौर पर मैदान में उतर कर उनकी राह मुश्किल बना दी है। इस सीट के लिए दूसरे चरण में 26 अप्रैल को मतदान होना है।

अब चुनाव से तीन दिन पहले कांग्रेस के महासचिव और गोरखा नेता विनय तामंग ने अचानक भाजपा उम्मीदवार का समर्थन कर दिया है। मजबूरन पार्टी को उनको छह साल के लिए निकालना पड़ा है।
विज्ञापन


इस सीट पर भाजपा के राजू विस्टा का मुकाबला तृणमूल कांग्रेस के गोपाल लामा से है। दार्जिलिंग उन गिनी-चुनी सीटों में से है जहां तृणमूल कांग्रेस कभी जीत नहीं सकी है। इस बार सुभाष घीसिंग की ओर से स्थापित गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएप) भाजपा को समर्थन दे रही है तो विमल गुरुंग की गोरखा जनमुक्ति मोर्चा तृणमूल कांग्रेस के साथ है।

इस संसदीय सीट पर पहले कांग्रेस का कब्जा रहा था। उसके बाद लंबे समय तक यह सीपीएम के कब्जे में रही। लेकिन पिछले तीन संसदीय चुनाव से इस पर भाजपा का कब्जा रहा है। हालांकि यहां हर बार सांसद बदलते रहे हैं।

वर्ष 2009 में यहां कांग्रेस जीती थी। लेकिन 2009 के चुनाव में भाजपा के जसवंत सिंह यहां से जीते थे। वर्ष 2014 में पार्टी ने एक बार फिर उम्मीदवार बदलते हुए एस।एस।अहलूवालिया को यहां मैदान में उतारा था। यहां जीत कर वो केंद्र में मंत्री बने थे। लेकिन 2019 में भाजपा ने आहलुवालिया को बर्दवान-दुर्गापुर सीट पर भेज दिया और दार्जिलिंग में राजू विस्टा को अपना उम्मीदवार बनाया।

पार्टी ने इस बार लगातार दूसरी बार राजू को टिकट दिया है। हालांकि आखिरी समय तक यहां पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन सिंगला के नाम पर चर्चा की जा रही थी। राजू विस्टा उम्मीद जताते हैं कि इस बार भी उनकी जीत तय है। लेकिन कालिम्पोंग के भाजपा विधायक विष्णु प्रसाद शर्मा ही निर्दलीय के तौर पर उनकी राह का कांटा बन गए हैं। शर्मा इस सीट पर टिकट की मांग कर रहे थे। लेकिन जब टिकट नहीं मिला तो उन्होंने नाराज होकर निर्दलीय के तौर पर पर्चा भर दिया। उनकी दलील थी कि यहां पहाड़ के भूमि पुत्र को ही टिकट दिया जाना चाहिए।

वैसे, पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव के आंकड़े राजू के पक्ष में हैं। वर्ष 2014 के चुनाव में भाजपा यहां 1।97 लाख वोटों के अंतर से जीती थी। लेकिन वर्ष 2019 में यह अंतर बढ़ कर 4।13 लाख तक पहुंच गया था। उसे मिलने वाले वोट भी 42।73 फीसदी से बढ़कर 59।19 फीसदी पहुंच गए थे। दूसरी ओर, तब तृणमूल कांग्रेस को 26।56 फीसदी वोट से ही संतोष करना पड़ा था।

वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का वोट घट कर 43।68 फीसदी हो गया और तृणमूल का बढ़ कर 31।37 फीसदी। भाजपा इलाके के छह विधानसभा सीटों पर आगे रही थी। तब तृणमूल कांग्रेस सिर्फ चोपड़ा सीट ही जीत सकी थी। इन आंकड़ों से साफ है कि पहाड़ियों के मौसम की तरह इलाके का राजनीतिक संतुलन भी लगातार बदलता रहा है।

दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस के गोपाल लामा दावा करते हैं कि भाजपा सांसद ने इलाके की समस्याओं के समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की है। इसलिए पहाड़ के लोगों ने अबकी बदलाव का मन बना लिया है। पार्टी की ओर से ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी इलाके में चुनावी रैलियां कर चुके हैं।

जहां तक मुद्दों का सवाल है अलग गोरखालैंड की दशकों पुरानी मांग के अलावा इलाके में बढ़ता प्रदूषण और चाय बागान उद्योग की समस्याएं ही सबसे बड़े मुद्दे के तौर पर सामने आए हैं। इसके अलावा इलाके का विकास और पीने के पानी के संकट के साथ अंधाधुंध शहरीकरण पर अंकुश लगाने जैसे मुद्दे भी उठाए जा रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर भाजपा अपनी इस सीट को बचाने में कामयाब रहती है तो यह पहला मौका होगा जब कोई पार्टी लगातार चार बार यहां से जीतेगी। उसके साथ ही राजू विस्टा इस सीट से लगातार दो बार जीतने वाले भाजपा के पहले नेता बन जाएंगे।
 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
विज्ञापन

 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें