बिहार में पहले चरण में 4 सीटों पर मतदान हुआ था और 50 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था।
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क्या है बिहार की कहानी?
बिहार की कहानी भी उत्तर प्रदेश की कहानी से अलग नहीं है। यहां भी मतदाताओं में 2014 वाला उत्साह नहीं है। इस बार पहले चरण में यहां 4 सीटों पर मतदान हुआ था और 50 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। हालांकि 18 अप्रैल को जब यहां दूसरे चरण के दौरान 5 सीटों पर हुए मतदान में वोटों का प्रतिशत 62.5 फीसदी दर्ज किया गया। 2014 से तुलना करें तो हम पाते हैं कि इस बार भी मत का प्रतिशत कमोबेश 56.28 प्रतिशत के आसपास रहने की संभावना है।
पश्चिम बंगाल की राजनीतिक तस्वीर इस बार भी कमोबेश वैसी ही है जैसी पिछली बार थी। पिछली बार यानी 2014 में यहां के मतदाताओं ने जबरदस्त उत्साह दिखाया था और 82.16 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। इस साल पहले चरण में यहां 2 सीटों पर 81 फीसदी मतदान हुआ जबकि 18 अप्रैल के दूसरे चरण में 3 सीटों पर हुए मतदान में वोट प्रतिशत 76 फीसदी रहा।
वैसे कुल मिलाकर देखें तो इस बार मतदान के प्रतिशत से बहुत अधिक उतार-चढ़ाव वाले संकेत नहीं मिलते हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि मतदाताओं में कंफ्यूजन की स्थिति है। वे भाजपा के पांच सालों का न तो हिसाब मांग रहे हैं और न ही कांग्रेस के द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों को नकार रहे हैं।
बहरहाल, अभी तो दूसरा चरण ही संपन्न हुआ है। चरण-दर-चरण मतदान में यदि कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं आता है तब 23 मई को जो परिणाम आएंगे, उसका फैसला जनता ही करेगी।
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