पौड़ी गढ़वाल में सर्वाधिक सेवा मतदाता
उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान जैसे राज्यों में बड़ी संख्या में सेवा मतदाता हैं। उत्तराखंड में भी 90,845 सेवा मतदाता दर्ज हैं। इनमें पौड़ी गढ़वाल संसदीय निर्वाचन क्षेत्र में सबसे अधिक 34,433 सेवा मतदाता हैं।
पौड़ी के बाद अल्मोड़ा में 28,718, टिहरी क्षेत्र में 12,329, हरिद्वार में 5,203 और नैनीताल में 10,162 सेवा मतदाता हैं। पौड़ जिले के लैंसडौन में गढ़वाल रायफल्स का रेजिमेण्टल सेंटर होने के कारण इस जिले में सर्वाधिक सेवारत् और सेवानिवृत्त सैनिक और सैन्य विधवाएं हैं। इसीलिये इस जिले में सैनिक कल्याण बोर्ड के दो-दो कार्यालय स्थापित हैं।
उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य है जिसकी दो बेहतरीन लड़ाकू रेजिमेंटें, गढ़वाल राइफल्स और कुमाऊं रेजिमेंट भारत की थल सेना में योगदान दे रही हैं। विशुद्ध गढ़वालियों की ‘‘गढ़वाल राइफल्स’’ की 22 रेगुलर बटालियनों के अलावा 2 इको टास्क फोर्स, 1 गढ़वाल स्काउट, और तीन राष्ट्रीय राइफल्स की बटालियनें हैं। इसी तरह 1947 में कबायली हमले को नाकाम कर जम्मू-कश्मीर को बचाने वाली कुमाऊं रेजिमेंट की भी 21 रेगुलर बटालियनें, 2 टेरिटोरियल आर्मी, 1 कुमाऊं स्काउट और 3 अन्य विशेष बटालियनें हैं। नगा रेजिमेंट का मुख्यालय भी रानीखेत में ही है जिसमें बड़ी संख्या में गढ़वाली, कुमाऊनी और भारतीय गोरखा सैनिक शामिल हैं।
सेना के तीनों अंगों में उत्तराखण्ड के सैनिक हैं और देश की असम राइफल्स समेत सेना की ऐसी कोई पैरा मिलिट्री फोर्स नहीं जिसमें उत्तराखण्ड के सैनिक और अधिकारी बहुतायत में न हों। अब तक उत्तराखण्ड देश को 2 थल सेनाध्यक्ष और एक नोसेनाध्यक्ष दे चुका है। तीनों सेनाओं में दूसरी और तीसरी पंक्ति के सैन्य नेतृत्व में भी हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और पंजाब के साथ ही उत्तराखण्ड के जाबाजों की बहुतायत है।
कांटे के मुकाबलों में निर्णायक सेवा मतदाता
कांटे के मुकाबलों में सेवा मतदाता बहुत महत्वपूर्ण और निर्णायक भूमिका अदा करते हैं। सेवा मतदाताओं में, भारतीय संघ के सशस्त्र बलों के सदस्य, राज्यों के सशस्त्र पुलिस बलों के वे सदस्य जो उस राज्ये से बाहर सेवारत हैं और भारत सरकार के अधीन कार्यरत वे व्यक्ति जो भारत से बाहर तैनात हैं, शामिल हैं।
मौजूदा व्यवस्थाओं के अनुसार भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना, सीमा सड़क संगठन, बीएसएफ, आईटीबीपी, असम राइफल्स, एनएसजी, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ और एसएसबी के सदस्य सेवा मतदाताओं के रूप में पंजीकृत होने के पात्र हैं। सेवा मतदाता प्रॉक्सी द्वारा भी अपना मत डाल सकते हैं। वे निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर उपलब्धत फॉर्म 13 एफ में निर्वाचन अधिकारी को आवेदन करके किसी भी व्यक्ति को अपना प्रॉक्सी् नियुक्त करके मतदान केन्द्र पर अपनी ओर से मतदान करा सकते हैं। लेकिन ऐसा प्रॉक्सी मतदाता उस निर्वाचन क्षेत्र का पंजीकृत मतदाता होना चाहिए।
2007 के उपचुनाव में सेवा मतदताओं ने पलटी बाजी
भुवन चन्द्र खण्डूड़ी के उत्तराखण्ड का मुख्यमंत्री बनने पर उनके द्वारा खाली की गई गढ़वाल संसदीय सीट पर जब 2008 में उपचुनाव हुए तो उन्होंने अपने लिए धूमाकोट विधानसभा सीट खाली कर भाजपा में शामिल होने वाले ले0 जनरल (सेनि) टीपीएस रावत को इस सीट पर अपने चिर परिचित प्रतिद्वन्दी सतपाल महाराज (कांग्रेस) के खिलाफ मैदान में उतारा।
उस समय भाजपा प्रत्याशी जनरल टीपीएस रावत कांग्रेस के अपने प्रतिद्वन्दी सतपाल महाराज से साधारण मतपत्रों की गिनती में 251 मतों से हार गये थे, लेकिन अचानक मतगणना के दौरान 16 हजार डाकमत पत्र आने के बाद वह लगभग 8 हजार मतों से विजयी घोषित हो गए। इनमें कांग्रेस ने लगभग 5 हजार डाक मतपत्र रद्द भी कराए थे। उस दौरान राज्य सरकार द्वारा डाक मतपत्रों को समय से काउंटिंग टेबल तक पहुंचाने में असाधारण तत्परता दिखाई थी जिसका लाभ भाजपा प्रत्याशी को मिला। अन्यथा डाक मतपत्र अक्सर मतगणना समाप्त हो जाने के बाद भी आते रहते हैं जिनकी गिनती नहीं हो पाती।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।