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जीवन धारा: समय अपने आप में रहस्य है; मनुष्य कैसे समझ सकता है इसकी गहराई

Sat, 09 May 2026 08:31 AM IST
Pavan जे सी मैक्सवेल

सार

मनुष्य समय की गहराई को तभी समझ सकता है, जब शाश्वत सत्य उसके भीतर प्रकाश फैलाए। यही समझ मनुष्य को शांत व जागरूक बनाकर अर्थपूर्ण जीवन की ओर ले जाती है।
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समय अपने आप में रहस्य है - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जो व्यक्ति वास्तव में जीवन का आनंद लेना चाहता है और स्वतंत्र होकर कार्य करना चाहता है, उसे अपने वर्तमान दिन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। यदि मनुष्य केवल बीते हुए कल के बारे में सोचता रहेगा, तो वह पछतावे और निराशा में डूब सकता है। दूसरी ओर, यदि वह आने वाले कल के सपनों में खोया रहेगा, तो कल्पनाओं में जीने वाला व्यक्ति बन जाएगा और वास्तविक कर्म से दूर हो जाएगा।
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 मनुष्य को केवल उन छोटे कार्यों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, जो दिन समाप्त होने के साथ खत्म हो जाते हैं, क्योंकि ऐसा करने से जीवन केवल सांसारिक व्यस्तताओं तक ही सिमट कर रह जाएगा। हालांकि, केवल अनंत और शाश्वत विषयों में खो जाना भी उचित नहीं है, क्योंकि तब मनुष्य अपने दैनिक जीवन तथा व्यावहारिक कर्मों को दिशा नहीं दे पाएगा।

सच्चा संतुलन इसी में है कि मनुष्य अपने आज के कार्यों में अपने पूरे जीवन की यात्रा का एक महत्वपूर्ण भाग देख सके और उनमें अनंत सत्य की झलक पहचान सके। वास्तव में सुखी वही व्यक्ति है, जो अपने प्रत्येक छोटे कार्य को किसी बड़े और शाश्वत उद्देश्य से जुड़ा हुआ महसूस करता है। ऐसा व्यक्ति अपने वर्तमान को महत्व देता है, क्योंकि यही वह समय है, जो वास्तव में उसके हाथ में है। वह पूरे मन, परिश्रम और ईमानदारी से अपने दैनिक कार्यों को पूरा करता है, क्योंकि उसे यह विश्वास होता है कि उसका हर कर्म जीवन के किसी गहरे अर्थ से जुड़ा हुआ है।
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 मनुष्य को प्रकृति की दिव्य प्रक्रिया का एक जीवंत रूप बनना चाहिए। उसमें सीमित और असीम, दोनों का सुंदर मेल दिखाई देना चाहिए। उसे अपने सांसारिक जीवन को तुच्छ नहीं समझना चाहिए, क्योंकि कर्म करने का अवसर केवल इसी जीवन में मिलता है। उसे यह भी नहीं भूलना चाहिए कि जीवन का अंतिम सत्य केवल भौतिक दुनिया तक सीमित नहीं है। समय अपने आप में एक रहस्य है, और मनुष्य उसकी गहराई को तभी समझ सकता है, जब शाश्वत सत्य उसके भीतर प्रकाश फैलाए। यही समझ मनुष्य को शांत, जागरूक और अर्थपूर्ण जीवन की ओर ले जाती है।
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