एक गुलाब को गुलाब होने के लिए किसी पहचान की जरूरत नहीं होती। वह कमल बनने की भी कोशिश नहीं करता। प्रकृति ने हरेक को उसकी अपनी पहचान और संभावना दी है। लेकिन, मनुष्य ने इस सरल सत्य को भुला दिया है। हम दूसरे मनुष्यों को देखकर अपना जीवन निर्धारित करने लगते हैं। इसलिए, अपने जीवन को दूसरे के जैसा बनाने में मत खपाओ। तुम्हारे भीतर जो संभावना है, उसे पहचानो। तभी तुम्हारे भीतर एक नया जीवन जन्म लेगा। तब तुम फूल की तरह खिलना शुरू करोगे। फूल कभी भी यह नहीं कहता कि जब मौसम मेरे अनुकूल होगा, तब ही खिलूंगा। वह तो बस खिलता रहता है। खिलना उसका स्वभाव है। अगर मनुष्य भी हमेशा अच्छे वक्त के इंतजार में बैठा रहे, तो उसका जीवन प्रतीक्षा में ही समाप्त हो जाएगा। जीवन हमेशा कुछ अधूरापन लिए हुए और मुश्किलों व अनिश्चितताओं से भरा होता है। इसीलिए, अपने जीवन को अभी जीना शुरू करो। लेकिन, अपने कर्म की सुगंध का हिसाब मत रखो। यह सबसे कठिन शिक्षा है। फूल की सुंदरता इस बात में है कि वह अपने खिलने को प्रदर्शन नहीं बनाता। वह बस अपना स्वभाव पूरा करता है। मनुष्य भी तब सुंदर होता है, जब उसका कर्म उसके अहंकार की घोषणा नहीं, उसके स्वभाव की अभिव्यक्ति बन जाता है। फूल की महक का कोई लेखा-जोखा नहीं होता। कोई उसे महसूस करता है, कोई नहीं। पर, फूल इस अंतर से दुखी नहीं होता। उसे पता है कि उसे तो बस महकना है। हमें भी अपने भीतर इसी तरह स्वतंत्र होना चाहिए।
इसलिए, हमेशा फूल की तरह खिलो और संभावनाओं को पहचानो। जब जीवन तुम्हारे सामने यह सवाल रखे कि तुमने क्या पाया, तो तुम कह सको कि मैंने अपने भीतर जो था, उसे पूरी तरह खिलने दिया। कोई पूछे कि तुम्हारी महक कितने लोगों तक पहुंची, तो मुस्कुराकर कहना कि मुझे नहीं मालूम। मैंने उसका हिसाब ही नहीं रखा। क्योंकि, फूल का धर्म सुगंध का हिसाब रखना नहीं, खिलना है।