जीवन धारा: मैं से बाहर निकलें, कुदरत की सुंदरता दिखेगी
बर्ट्रेंड रसेल
Published by: Devesh Tripathi
Updated Mon, 27 Apr 2026 07:26 AM IST
सार
जब व्यक्ति अपने ‘मैं’ से बाहर निकलकर दुनिया की ओर देखता है, तो उसके अनुभवों का दायरा बढ़ता चला जाता है। यह बदलाव होता तो बहुत सूक्ष्म है, लेकिन इसका प्रभाव बहुत गहरा होता है।
यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम अपने जीवन को कैसे देखते हैं और उसे कैसे जीते हैं। यदि हम अपने छोटे-से अहंकार से ऊपर उठ कर जीवन के व्यापक आयामों में रुचि लेना सीख जाएं, तो खुशी अपने आप हमारे जीवन का हिस्सा बन जाती है।