जीवन को महत्व दें और ईश्वर को धन्यवाद
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अपने आप से प्यार करें और खुद को स्वीकार करें
ये तो हम सब जानते ही हैं कि जिस भी चीज को हम प्यार करते हैं चाहे वो इंसान हो, जानवर हो कोई वस्तु हमें वो चीज हमेशा खुशी ही देती है और ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारी सोच में उसके प्रति सिर्फ सकारात्मकता ही निहित रहती है।
बस ठीक वैसे ही यदि हम खुद से प्यार करेंगे तो हमें अपनी खुशियों के लिए कभी भी किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, क्योंकि तब हम खुद ही खुद को खुश रख पाएंगे और अपने आप में खुशी ढूंढने से पहले आप जैसे है वैसे ही स्वयं को स्वीकार करें। दूसरों को देखकर खुद से उम्मीद करने से कही बेहतर है, खुद से उम्मीद कम और प्यार ज्यादा करें।
जीवन को महत्व दें और ईश्वर को धन्यवाद
इंसान के रूप में हमको मिला ये जीवन पहले ईश्वर की और फिर मां की कृपा के रूप में आपको प्राप्त हुआ है अर्थात् जितना हम जीवन को खुद का समझ कर उलझनों में उलझ जाते हैं इसके बजाय ईश्वर का समझ कर, उनके प्रति अपनी कृतज्ञता जताकर भी अपने मन को पुनः ऊर्जावान किया जा सकता है।
जैसे वर्तमान में जीना सर्वश्रेष्ठ माना गया है, ठीक वैसे ही ये भी मान लीजिए की ये जीवन इस बार इंसान के रूप में मिला है तो इसको क्यों परेशान होकर व्यर्थ करें, क्योंकि न तो हमें पिछला जीवन क्या था वो पता है ना अगला क्या होगा वो पता है, तो भला इसको ही मुस्कुराते हुए समझदारी से क्यों ना जी लिया जाए। ध्यान रहे, आपकी सिर्फ एक मुस्कान ही अच्छे विचारों को आकर्षित और बुरे विचारों को विकर्षित करने की क्षमता रखती है।
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