मनुष्य के भीतर अपार मानसिक और आध्यात्मिक शक्तियां छिपी होती हैं, लेकिन अधिकांश लोग इन शक्तियों के बारे में बहुत कम जानते हैं। आम व्यक्ति अपने विचारों की गलत दिशा के कारण समस्याएं तो झेलता है, पर उसे इन शक्तियों का जानबूझकर गलत उपयोग करने का खतरा कम होता है। लेकिन जो व्यक्ति इन आंतरिक शक्तियों का उपयोग करना सीख लेता है, उसे बहुत सावधान रहना चाहिए। यदि इन शक्तियों का गलत उपयोग किया जाए तो यह परिणामों में विस्फोटक पदार्थ से भी अधिक विनाशकारी हो सकती हैं।
इसका अर्थ यह नहीं कि मनुष्य स्वयं को तुरंत नष्ट कर लेगा, बल्कि यह कि वह अपने जीवन को कठिन बना सकता है और अपनी आत्मिक प्रगति को लंबे समय तक पीछे धकेल सकता है। मन की शक्ति का उपयोग यदि दूसरों को नियंत्रित करने या अपने स्वार्थ के लिए उन्हें प्रभावित करने में किया जाए, तो यह अंततः उपयोग करने वाले व्यक्ति के लिए ही हानिकारक साबित होता है। यह भी सही नहीं है कि हम इन शक्तियों का उपयोग दूसरों की भलाई के नाम पर ही क्यों न करें। हर आत्मा को अपने जीवन के अनुभवों से सीखने का अधिकार है। जीवन का उद्देश्य ही यह है कि मनुष्य अपने निर्णयों, गलतियों और अनुभवों से बुद्धिमत्ता प्राप्त करे। यदि हम किसी को मानसिक रूप से प्रभावित करके उसकी स्वतंत्रता छीन लेते हैं, तो हम उसके विकास के प्राकृतिक मार्ग में बाधा डालते हैं।
कई लोग यह मानते हैं कि मन की शक्ति से वे दूसरों को ठीक कर सकते हैं, लेकिन यदि यह परिवर्तन केवल बाहरी सुझावों के माध्यम से हो, तो वह स्थायी नहीं होता। जब तक सुझाव मिलता रहता है, तब तक प्रभाव दिखाई देता है, लेकिन जैसे ही वह समाप्त होता है, व्यक्ति फिर से अपनी पुरानी स्थिति में लौटने लगता है। इसलिए सबसे अच्छा मार्ग यह है कि व्यक्ति स्वयं अपने विचारों को सकारात्मक बनाए और आत्म-सुझाव के माध्यम से अपनी शक्ति को जागृत करे। मनुष्य के लिए सबसे सुरक्षित और शक्तिशाली तरीका यह है कि वह अपने भीतर के मौन को खोजे। जब हम शांत होकर अपने भीतर झांकते हैं, तो हमें उस दिव्य शक्ति का अनुभव होता है जो हमारे अंदर हमेशा मौजूद रहती है।
यह आंतरिक शांति हमें सही दिशा में सोचने और जीवन को बेहतर बनाने की प्रेरणा देती है। लेकिन यदि कोई व्यक्ति इस आंतरिक शक्ति का उपयोग केवल धन, सुख या भौतिक इच्छाओं को जबर्दस्ती पाने के लिए करता है, तो वह जीवन के संतुलन को बिगाड़ देता है। प्रकृति का अपना नियम और लय होती है। जब हम अपनी इच्छा से उसे नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं, तो अंततः हमें निराशा और कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। सही मार्ग यह है कि हम अपने विचारों को शुद्ध, सकारात्मक और निःस्वार्थ बनाएं। जब हमारे विचार बदलते हैं, तो हमारा दृष्टिकोण बदलता है। जब दृष्टिकोण बदलता है, तो हमारा व्यवहार बदलता है।
-विद इन यू इज द पावर के अनूदित अंश