मेरी नजर में जीवन का कोई भी पड़ाव हमेशा के लिए नहीं रहता। हर उम्र अपने साथ एक अलग तरह की रोशनी लेकर आती है। जवानी में जो बातें मुझे बड़ी लगती थीं, आज उनमें से कई छोटी दिखाई देती हैं। और, जिन छोटी-छोटी चीजों पर कभी ध्यान नहीं जाता था, वे अब मेरे लिए अनमोल हो गई हैं। जीवन से मैंने यह भी सीखा है कि यदि मैं हर दिन यही सोचता रहूं कि पहले मेरे भीतर कितनी ताकत थी, कितने लोग मेरे अपने थे और मैं कितना व्यस्त था, तो आज मेरे पास जो कुछ है, उसे देखने का वक्त ही कहां बचेगा? बेशक मैं अपने बीते कल का सम्मान करना चाहता हूं, पर उसमें कैद होकर नहीं रहना चाहता। मेरे लिए जरूरी है कि मैं आज को भी उतनी ही उत्सुकता से देखूं, जितनी उत्सुकता से कभी भविष्य की ओर देखा करता था।
मैं वृद्धावस्था को एक ऐसी ऊंचाई की तरह देखता हूं, जहां से मुझे अपने बीते रास्ते अधिक साफ दिखाई देते हैं और आगे की यात्रा को समझने के लिए एक नया नजरिया मिलता है। इसीलिए, मेरा मानना है कि नई शुरुआत करने के लिए हमेशा युवा होना जरूरी नहीं है। मन में कुछ जानने की इच्छा हो, तो किताब आज भी आपकी मित्र बन सकती है। कुछ सीखने का उत्साह हो, तो उम्र कभी आपका रास्ता नहीं रोक सकती। आपको बस यह भरोसा बनाए रखना है कि जीवन में अब भी कुछ ऐसा है, जो आपको सीखना है और कुछ ऐसा भी है, जो आप दूसरों को दे सकते हैं।