इस स्वीडिश युवक को भले ही हिंदी नहीं आती लेकिन भारतीय मसालों के नाम और इनसे बनने वाली कई रेसीपी के बारे में सटीक जानकारी है।
- फोटो : अमर उजाला
देसी मसालों की ख़ुशबू उन्हें दस साल पहले एक भारतीय फ्लैटमेट से ज़रूर मिली थी। लियो बताते हैं कि गौतनबर्ग शहर में आज से दस साल पहले बेंगलुरू का एक युवक उनका फ्लैटमेट बना था। हालांकि उस काफ़ी बड़े घर में रहने वाले कई लोग थे। लेकिन जब भी वह युवक भारतीय मसालों का इस्तेमाल कर कोई खाना बनाता तो उसकी ख़ुशबू लियो को बेहद पसंद आती। लियो को मसालों के नाम और स्वाद की जानकारी नहीं थी। उन्होंने भारतीय फ्लैटमेट से थोड़ी बहुत जानकारी लेकर यूट्यूब पर खाना पकाने की विधि सीखना शुरू किया।
यूट्यूब से भारतीय खाना बनाना सीखा
साल दर साल लियो का रिश्ता भारतीय मसालों से पक्का होता चला गया। और आज इस स्वीडिश युवक को भले ही हिंदी नहीं आती लेकिन भारतीय मसालों के नाम और इनसे बनने वाली कई रेसीपी के बारे में सटीक जानकारी है। वे अपने व्यंजनों को भारतीय दोस्तों को चखाते और सोशल साइट्स पर इन व्यंजनों के फ़ोटो डालकर लोगों से उनकी प्रतिक्रिया लेते रहते हैं।
लियो बताते हैं कि भारतीय समुदाय के बीच उनके खाने को पसंद करने वाले हज़ारों में हैं जबकि स्वीडिश लोग भी उनके भारतीय व्यंजनों की तारीफ़ करते और उन्हें प्रोत्साहित करते रहते हैं। घर में भी उनकी माँ भारतीय खानों को धीरे धीरे पसंद करने लगी हैं।वे अब भारतीय संस्कृति से ख़ुद का जुड़ाव भी महसूस करने लगे हैं। लियो बताते हैं कि वे भारत के अलग-अलग राज्यों के स्वाद से रूबरू होना चाहते हैं ताकि उनकी पाक कला में निखार आ सके। लेकिन उनके पास फ़िलहाल इतनी रक़म नहीं हैं कि वे अपनी यह ख़्वाहिश पूरी कर सके।
स्वाद के कारण लियो कई भारतीयों के दिलों में अपनी जगह बना चुके हैं।
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लियो उम्मीद करते हैं कि उनके प्रयास को पसंद करने वाले सोशल नेटवर्क से जुड़े हज़ारों दोस्त एक दिन रक़म इकट्ठा कर उन्हें भारत जाने और तमाम तरह के पकवानों को सीखने का मौक़ा देंगे। उन्होंने कहा कि उचित समय आने पर वे इसके लिए प्रयास शुरू करेंगे। फ़िलहाल स्वाद के कारण वे कई भारतीयों के दिलों में अपनी जगह बना चुके हैं। वे बोलते हैं कि बेशक मैं भारत कभी नहीं गया लेकिन वहां के व्यंजनों की वजह से कई भारतीय मेरे पक्के दोस्त बन चुके हैं। मज़ेदार यह है कि मैं कभी उनसे मिला नहीं।
लेकिन उन्होंने न केवल मेरे पाक कला को निखारने का काम किया है बल्कि कई उपहारों से मुझे अभिभूत भी किया है। आपको जानकर हैरानी होगी लियो लखनऊ, मुंबई, असम और सूरत की चार महिलाओं से लगातार संपर्क में हैं।उन्होंने बताया कि एक सोशल ग्रुप के ज़रिए मेरी उनसे बातचीत शुरू हुई और आज उनकी बदौलत मैं कई व्यंजनों के हिंदी अनुवाद को समझ पाता हूँ।
वे मुझे मसालों के बारे में जानकारी देती हैं और यूट्यूब पर हिंदी में व्यंजनों के तैयार करने की दी गई विधि का अंग्रेज़ी अनुवाद कर मुझे बताती हैं। जिससे मैं अपने खाने को आसानी से बना पाता हूं। एक महिला ने लियो को पारंपरिक भारतीय परिधान कुर्ता -पाजामा और उनकी मां को साड़ी उपहार स्वरूप भारत से भेजा था। जिसे वे काफ़ी पसंद से पहनते हैं। लियो को भारतीय पर्व त्योहारों के बारे में भी जानकारी है। वे ख़ुद दीपावली के त्योहार को धूमधाम से मनाने की तैयारी में जुटे हुए हैं।
बड़ापाव से लेकर जलेबी तक सबकुछ बनाना जानते हैं लियो
दीया जलाने के साथ दोस्तों को खिलाने के लिये मोतीचूर के लड्डू , जलेबी समेत पांच छह मिठाई बनाने की तैयारी चल रही है। वे कहते हैं कि जब भी किसी भारतीय से मुलाक़ात होती है तो वहां के खानपान और संस्कृति के बारे में ज़्यादा जान पाता हूं। लियो पावभाजी, बड़ापाव, छोले कुल्छे, बिरयानी, मेथी मलाई , पालक पनीर, गाजर का हलवा, जलेबी, लड्डू, गुलाब जामुन, नीर डोसा समेत दर्जनों रेसीपी बनाना जानते हैं। उन्हें बड़ापाव खाना काफ़ी पसंद है, जबकि पंजाबी खाना उन्हें बेहद लज़ीज़ लगता है।वे बताते है है कि समय समय पर वे दूसरे देशों के व्यंजन बनाने का प्रयास भी करते रहते हैं लेकिन उन्हें हिंदुस्तानी खाना बनाने और खाने से अच्छा कुछ भी नहीं लगता है। एक दिलचस्प कहानी यह भी है कि एक बार जापानी बैडमिंटन टीम के स्वीडन दौरे के दौरान उन्होंने टीम के लिए पनीर बटर मसाला, चना मसाला जैसे व्यंजनों को तैयार कर परोसा था। जिसकी जमकर तारीफ़ हुई थी।
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