सबसे पहला तरीका है याददाश्त को मजबूत बनाना। अमेरिकी प्रोफेसर जॉन बेसिंगर ने नौ साल की मेहनत से अंग्रेजी की प्रसिद्ध कविता पैराडाइज लॉस्ट की 10,565 पंक्तियां कंठस्थ कर ली थीं। वह व्यायाम करते समय नई पंक्तियां याद करते और पुरानी दोहराते थे। यह दिमाग को सक्रिय रखने का बेहतरीन अभ्यास है। इसलिए, रोज थोड़ा-सा याद करने और दोहराने की आदत हमारी स्मरण शक्ति को लंबे समय तक मजबूत रख सकती है।
दूसरा तरीका है दिमाग को चुनौती देने वाले खेल खेलना। ऐसे गेम, जिनमें चीजों को सही क्रम में लगाना या पैटर्न पहचानना होता है, न केवल मनोरंजन करते हैं, बल्कि सोचने-समझने की क्षमता भी बढ़ाते हैं। हर दिन कुछ मिनट ऐसे खेलों के लिए निकालना मानसिक व्यायाम जैसा ही है।
तीसरी सलाह है नया संगीत सुनना। अलग-अलग शैली और कलाकारों का संगीत सुनने से पसंद का दायरा बढ़ता है और मन भी तरोताजा रहता है। जिज्ञासा के साथ नए गीत खोजने की आदत जीवन में नई ऊर्जा भर सकती है।
चौथा है वर्तमान पल का आनंद लेना। जब पूरा समाज किसी खुशी में शामिल होता है, तो साधारण पल भी यादगार बन जाते हैं। इसलिए, अपने आसपास की छोटी-छोटी खुशियों को महसूस करना सीखिए।
पांचवां तरीका है अपने शौक के लिए समय निकालना। कोई भी रचनात्मक शौक रोजमर्रा की भागदौड़ से राहत देता है और मन को सुकून पहुंचाता है। हम अक्सर सोचते हैं कि अगर सब गलत हो गया तो? लेकिन, क्यों न खुद से यह पूछें कि अगर सब ठीक हो गया तो? यह एक छोटा-सा सवाल नकारात्मक सोच की दिशा बदल सकता है।
इसी तरह एक महिला की छोटी-सी आदत भी प्रेरणादायक है। वह हर दिन अपने जन्मदिन के समय, यानी घड़ी में अपने जन्मदिन का समय दिखने पर, सिर्फ एक मिनट खुद जश्न मनाती है। यह छोटा-सा ‘बर्थडे मिनट’ उसे रोज मुस्कुराने की वजह देता है।
खुश रहने का कोई बड़ा रहस्य नहीं है। बस कुछ आदतें ही आपकी जिंदगी को हल्का, संतुलित और अधिक खुशहाल बना सकती हैं।