फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

साजिश या आंदोलन का दुरुपयोग: शांत होती चिंगारी को किसने भड़काया..? सोनम वांगचुक और ‘अरब स्प्रिंग’ कनेक्शन

सार

लद्दाख में बुधवार को भड़की हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई। करीब 60 लोग घायल हो गए। घायलों में पुलिसकर्मी और सुरक्षा बल भी शामिल हैं। लद्दाख में हिंसा भड़कने से ठीक पहले, सोनम वांगचुक ने अनशन स्थल से एक वीडियो संदेश जारी किया था। 
विज्ञापन
लेह में हिंसा - फोटो : पीटीआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

लद्दाख में जो चिंगारी शांत हो रही थी, यकायक उसे किसने भड़काया..? लद्दाख में हिंसा से पहले का घटनाक्रम देखेंगे तो सुबूत चीख-चीख कर गवाही दे रहे हैं कि यहां स्थिति अपने आप नहीं बिगड़ी, बल्कि इसे सुनियोजित साजिश के तहत भड़काया गया। शांतिपूर्ण आंदोलन को गलत दिशा में ले जाने वालों पर अब केंद्र सरकार शिकंजा कसने जा रही है। 
विज्ञापन


हाई पावर कमेटी के साथ बातचीत तय, फिर हिंसा क्यों?
केंद्र सरकार ने लद्दाख के मुद्दों पर चर्चा के लिए हाई पावर कमेटी (HPC) के साथ 6 अक्तूबर को औपचारिक बातचीत का समय तय किया था। इसके अलावा, पहले से अनौपचारिक चर्चा के लिए 25-26 सितंबर की तारीखों पर भी विचार चल रहा था। लेकिन सवाल उठता है कि जब बातचीत का रास्ता खुला था, तो हिंसा भड़काने की जरूरत क्यों पड़ी? शक की सूई सोनम वांगचुक और कुछ अन्य लोगों की ओर घूम रही है। गृह मंत्रालय ने बयान जारी करके कहा है कि हिंसा वांगचुक के उकसावे की वजह से हिंसक हुई। 

लद्दाख हिंसा से ठीक पहले की ये घोषणा..! 
लद्दाख में हिंसा भड़कने से ठीक पहले, सोनम वांगचुक ने अनशन स्थल से एक वीडियो संदेश जारी किया था, जिसमें उन्होंने घोषणा की थी कि 26 सितंबर को एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में केंद्र सरकार के साथ बातचीत के लिए रवाना होने वाला है। इस वीडियो में उन्होंने शांतिपूर्ण आंदोलन पर जोर देते हुए कहा कि उनकी मांगों पर चर्चा के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। हालांकि, इसके बावजूद हिंसा भड़क उठी, जिसने इस शांतिपूर्ण प्रयास को गंभीर रूप से प्रभावित किया। इस घोषणा से सवाल उठता है कि क्या हिंसा का उद्देश्य इन प्रस्तावित वार्ताओं को पटरी से उतारना है। 
विज्ञापन


सोनम वांगचुक का ‘अरब स्प्रिंग’ कनेक्शन?
सोनम वांगचुक लद्दाख में जलवायु कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते हैं। गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया गया है कि वांगचुक अनशन के दौरान अरब स्प्रिंग शैली के विरोध प्रदर्शनों और नेपाल में Gen Z के विरोध प्रदर्शनों का भड़काऊ उल्लेख करके लोगों को गुमराह किया।  

क्या युवाओं को बनाया गया मोहरा?
सरकारी सूत्रों का कहना है कि लद्दाख के युवाओं को इस हिंसा में ‘ढाल और तोप का गोला’ बनाकर इस्तेमाल किया गया। लद्दाख में बेरोजगारी और अन्य मुद्दों से नाराज युवाओं को भड़काकर हिंसक प्रदर्शनों के लिए उकसाया गया। सोनम वांगचुक ने स्वयं हिंसा की निंदा की और शांति की अपील की, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि यह हिंसा उनकी शांतिपूर्ण कोशिशों को नुकसान पहुंचा रही है।

कांग्रेस का रोल: उकसावे के आरोप
बीजेपी ने कांग्रेस पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है। बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने दावा किया कि कांग्रेस पार्षद फुंत्सोग स्टैनज़िन त्सेपाग ने भीड़ को उकसाया और बीजेपी कार्यालय पर हमला करने में शामिल थे। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने इसे ‘जेन-जेड लीडर’ की करतूत करार दिया। हालांकि, सोनम वांगचुक ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि लद्दाख में कांग्रेस के पास इतना प्रभाव नहीं कि वह पांच हज़ार युवाओं को सड़कों पर ला सके।

क्या है लद्दाख का असल मुद्दा?
लद्दाख के लोग लंबे समय से छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा और पूर्ण राज्य का दर्जा मांग रहे हैं। उनका कहना है कि इससे उनकी जमीन, नौकरियां और नाजुक पारिस्थितिकी सुरक्षित रहेगी। यह मांग 2019 में जम्मू-कश्मीर से अलग होकर केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से और तेज हो गई है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें