लोगों की जनसमस्याएं सुनतीं शैफाली कुंवर सिंह। (लाल घेरे में)
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बता दें कि, शैफाली ने नगर पंचायत के छोटे से बजट से नगर में दो गौशालाओं की व्यवस्था की, जहां पर अन्ना घूमने वाले मवेशियों को रखा गया। यहां शैफाली खुद भी कभी-कभी गायों की सेवा करने के लिए आती हैं। इन गौशालाओं में जब भी कभी बजट की कमी आड़े आती है तो शैफाली कुंवर अपनी तरफ से धन मुहैय्या करा देती हैं।
समाज सेवा में आगे हैं शेफाली?
किसानों की फसलों को अन्ना जानवरों से बचाने के कारण यहां के लोग शैफाली कुंवर सिंह को काफी धन्यवाद देते हैं। लोगों का कहना है कि शैफाली कुंवर सिंह जैसे जनसेवकों के कारण ही आज भी गरीबों की सुनी जाती है।
अपने जीवनकाल में लगभग 40 से अधिक वर्ष विभिन्न देशों में गुजारने वाली शैफाली कुंवर का जनसेवा के प्रति समर्पण का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि समूचे हमीरपुर जनपद में सरीला नगर पंचायत सबसे अधिक स्वच्छ है। यहां आपको जगह-जगह कूड़े के ढेर नहीं दिखाई देंगे।
स्थानीय निवासी भी स्वच्छता को लेकर जागरूक नागरिक का फर्ज निभाते हुए कूड़े को नियत स्थान पर ही डालते हैं, जिससे नगर स्वच्छ बना रहता है। लेकिन ये सब संभव भी नगर पंचायत चेयरमैन की बदौलत ही हो सका है। उन्होंने स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करने के तरह-तरह के प्रयास किए तब जाकर ऐसा संभव हो सका है।
शैफाली कुंवर सिंह (नीली साड़ी में)
सरीला नगर पंचायत चेयरमैन शैफाली कुंवर राजनीति में आने से पहले बेहद ही शान और शौकत से भरी हुई जिंदगी जीती थीं। शैफाली कुंवर के पति महाराजा नरेंद्र सिंह जूदेव 1948 से 1985 तक विदेश में रहे। इस दौरान उन्होंने स्पेन, फ्रांस, लीबिया, माल्टा, वेटिकन व स्विट्जरलैंड जैसे देशों में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
स्पेन की महारानी से लेकर ब्रिटेन के राजघराने तक व एचआरएच करीम आगा खां से लेकर ईरान के राजघराने तक ताल्लुक रखने वाली शैफाली कुंवर राजनीति में आने से पहले बेहद चमक-दमक वाला जीवन जीती थीं, लेकिन महाराजा नरेंद्र सिंह के देहांत के बाद उन्होंने अपने परिवार के इतिहास को बचाने के लिए सरीला में ही बसने का प्रण किया और जनसेवा का रास्ता चुना।
आज शैफाली यहां लोगों की सेवा के लिए पूरी तरह समर्पित हो चुकी हैं। शैफाली बताती हैं कि 2011 में जब मेरे पति नरेंद्र सिंह जूदेव का देहांत हो गया तब वह सरीला (हमीरपुर) छह महीने के लिए आईं थीं और महाराज के प्रति बुंदेलखंड की जनता का प्यार देखकर जनता की सेवा करने के लिए सरीला में ही रुकने का फैसला किया।
स्कूली बच्चों के साथ सरीला नगर पंचायत की चेयरमैन शैफाली कुंवर सिंह।
इतना ही नहीं गांव के बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सके, इसके लिए शैफाली ने अपनी जमीन दान देकर उस पर स्कूल बनवाया। शैफाली के बनवाए स्कूल में आज भी हजारों बच्चों शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। जहां गरीब बच्चों को शिक्षा शुल्क में भी काफी रियायत दी जाती है।
बिजली की समस्या को दूर करने के लिए भी शैफाली ने राजघराने की जमीन देकर पावर स्टेशन बनवाया। शैफाली कहती हैं कि जनसेवा के लिए राजनीति में आना जरूरी लगा तो भाजपा के टिकट से चेयरमैन का चुनाव लड़ी और जनता ने भरपूर प्यार दिया। उनका कहना है कि मैं आगे हमेशा निस्वार्थ भाव से लोगों की सेवा करती रहूंगी।
बड़े राजघराने की हैं महारानी शैफाली
सरीला स्टेट के महाराजा नरेन्द्र सिंह के करीबी रहे जलीस खान के मुताबिक, शैफाली शेरखूपुरा (अब पाकिस्तान) की रहने वाली हैं। स्पेन में राजदूत रहने के दौरान नरेन्द्र सिंह की शैफाली से शादी हुई थी। शादी में कई देशों के राजदूत, बड़े घराने शामिल हुए थे। नरेंद्र सिंह स्पेन, फ्रांस, ब्राजील, माल्टा, स्विटजरलैंड और लीबिया में राजदूत रहे। उनकी मौत 7 जुलाई 2011 को ब्रिटिश में हुई थी।
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