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कश्मीर 370ः व्यापारिक संबंध समाप्त कर पाकिस्तान ने मार ली पैर पर कुल्हाड़ी?

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पाकिस्तान को समझ नहीं आ रहा है कि कश्मीर पर क्या रुख करे। - फोटो : अमर उजाला
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पाकिस्तान इस समय आगबबूला है, क्योंकि जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा छिन गया है। यह दिगर बात है कि पाकिस्तान ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और गिलगित बलूचिस्तान को विशेष राज्य का दर्जा देने के बजाए वहां के स्थानीय लोगों का शोषण किया, वहां पंजाबियों को ले जाकर बसाया। जम्मू-कश्मीर राज्य को धारा 370 के तहत मिले स्पेशल स्टेटस को हटाए जाने के बाद से पाकिस्तान भड़का हुआ है। पाकिस्तान ने भारत के साथ अपने राजनयिक संबंध डाउनग्रेड करने का फैसला लिया है।

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भारतीय उच्चायुक्त को इस्लामाबाद से भारत भेजने और पाकिस्तानी उच्चायुक्त को दिल्ली से वापस बुलाने का फैसला पाकिस्तान सरकार ने लिया है, साथ ही समझौता एक्सप्रेस ट्रेन सेवा को भी बंद करने का फैसला लिया है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण भारत के साथ होने वाले दिपक्षीय व्यापारिक को पूरी तरह बंद करने का पाकिस्तानी फैसला है।

हालांकि पहले भी दोनों मुल्कों के बीच जब-जब तनाव बढ़ा है। व्यापार और राजनयिक संबंधों में उतार चढ़ाव आते रहे हैं, क्योंकि 70 सालों से दोनों मुल्कों के बीच कई बार तनाव चरम पर पहुंचा है। इसका परिणाम यह हुआ है कि अच्छे संबंधों के बीच दोनों मुल्क विकास की जो गति पा सकते है, उसमें पीछे रह गए। पाकिस्तान ने भारत से संबंधों को ठीक कर होने वाले लाभ की तरफ देखा ही नहीं।
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गौरतलब है कि भारत ने पाकिस्तान को 1996 में मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा दिया था। ताकि दोनों मुल्कों के बीच व्यापार की गति तेज पकड़े। लेकिन पाकिस्तान ने भारत को मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा आजतक नहीं दिया।   

पाकिस्तान ने भारत से द्विपक्षीय व्यापार को बंद कर अपना नुकसान ही किया है। - फोटो : अमर उजाला

अति राष्ट्रवादी नजरिए में एकपक्षीय नुकसान की बात
अतिराष्ट्रवादी नजरिए से आप कह सकते हैं कि पाकिस्तान ने भारत से द्विपक्षीय व्यापार को बंद कर अपना नुकसान ही किया है। भारतीय नजरिया यही है कि पाकिस्तान के इस फैसले से नुकसान तो पाकिस्तान को ही होगा। वैसे यह अतिराष्ट्रवादी नजरिया है, क्योंकि द्विपक्षीय व्यापार खत्म होने की स्थिति में नुकसान किसी एक पक्ष का नहीं दोनों पक्ष का होता है। द्विपक्षीय व्यापार का मुख्य उद्देश्य दोनों पक्षों को लाभ पहुंचाना होता है। अगर दो मुल्कों के बीच व्यापार है तो लाभ का हिस्सा जनता, व्यापारी और सरकार सभी को जाता है।

हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि दुनिया के तमाम देश इस समय व्यापार संतुलन को अपने पक्ष में लड़ने की लड़ाई लड़ रहे है, क्योंकि वर्तमान युग में किसी भी मुल्क की अर्थव्यवस्था की मजबूती उसके उत्पादन क्षमता और निर्यात से देखी जाती है।

आज चीन आर्थिक ताकत इसलिए बना कि उसने मैनुफैक्चिरंग में पूरी दुनिया को मात दी और अपने निर्यात से दुनिया भर के बाजारों पर कब्जा किया है। चीन की इसी नीति से अमेरिका बौखलाया हुआ है। अमेरिका चीन से आय़ातित वस्तुओं पर हाई टैरिफ इसलिए लगा रहा है कि चीन के पक्ष में बने व्यापार संतुलन को धीरे-धीरे समाप्त किया जाए, क्योंकि किसी भी मुल्क की इकनॉमी की मजबूती उसके निर्यात पर निर्भर करती है।

अमेरिका के तमाम टैरिफ लगाने की कोशिश के बावजूद अमेरिका चीन के बीच व्यापार संतुलन चीन के पक्ष में 323 अरब डॉलर है। 2018 में अमेरिका का दुनिया के तमाम मुल्कों के साथ होने वाला व्यापार घाटा 621 अरब डॉलर पहुंच गया है। अमेरिका चीन की मजबूत होते निर्यात से परेशान है, नाराज है, क्योंकि भविष्य में चीन इसी अर्थव्यवस्था के बल पर अमेरिका को चुनौती देगा।

पाकिस्तान के साथ दिपक्षीय व्यापार, व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में
हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि पाकिस्तान और भारत के बीच होने वाले व्यापार में ट्रेड बैलेंस पाकिस्तान के बजाए भारत के पक्ष में है। भारत और पाकिस्तान के बीच इस समय सलाना द्विपक्षीय व्यापार 2.5 अरब डॉलर के करीब है। भारत-पाकिस्तान के कुल द्विपक्षीय व्यापार में भारतीय निर्यात् की भागीदारी 75 प्रतिशत है, जबकि पाकिस्तानी आयात की भागीदारी 25 प्रतिशत के करीब है।

2018-19 में भारत ने पाकिस्तान को 2.07 अरब डॉलर का निर्यात किया, जबकि पाकिस्तान से भारत को 0.49 बिलियन डॉलर का आयात आया। भारत पाकिस्तान को कपास, ऑऱगेनिक केमिकल, ब्यालर्स, मशीनरी आदि मुख्य रूप से निर्यात करता है। जबकि पाकिस्तान भारत को सीमेंट, पहाड़ी नमक, ड्राई फ्रूट आदि का निर्यात करता है।

भारत को होने वाला पाकिस्तानी निर्यात पहले ही प्रभावित हो चुका है। पुलवामा हमले के बाद भारत ने पाकिस्तानी आयात पर 200 प्रतिशत आयात शुल्क लगा दिया था। इससे भारत को आने वाला पाकिस्तानी सीमेंट की कीमतें बढ़ गई। 50 किलो के बैग वाला सीमेंट की कीमत 500 रुपये तक पहुंच गई।    

व्यापार रोकने से भारत-पाकिस्तान दोनों को नुकसान होगा। - फोटो : अमर उजाला

भारतीय निर्यात को भी नुकसान होगा
भारत से आने वाले कच्चे माल के आयात को रोकने के लिए पाकिस्तानी उद्योग जगत् को नुकसान जरूर होगा, लेकिन इससे भारतीय उद्योग जगत् औऱ कपास उत्पादकों को भी नुकसान होगा। भारत पाकिस्तान को मुख्य रूप से कपास, ऑगरेनिक केमिकल, प्लास्टिक ही निर्यात करता है। लेकिन बड़ा निर्यात कपास, ऑरगेनिक केमिकल का है। भारत ने 2018-19 में पाकिस्तान को 550 मिलियन डॉलर का कपास और 457 मिलियन डॉलर का ऑरगेनिक केमिकल निर्यात किया था।

गौरतलब है कि भारत लगातार कपास और ऑरगेनिक केमिकल के निर्यात में पाकिस्तान से लाभ कमाता रहा है। 2011 में भारत ने 87 मिलियन डालर का कपास पाकिस्तान को निर्यात किया था। अब कपास का निर्यात बढ़कर 550 मिलियन डॉलर का हो गया है। 2011-12 में भारत ने 290 मिलियन डॉलर का ऑरगेनिक केमिकल का निर्यात पाकिस्तान को किया था।

आज यह निर्यात बढकर 457 मिलियन डलर हो गया है। 2011-12 तक भारत पाकिस्तान को न्यूक्लियर  रिएक्टर, बॉयलर्स, मशीनरी और मैकेनिकल एपलायंस न के बराबर निर्यात करता था। लेकिन बाद में भारत ने इसका निर्यात भी शुरू किया। 2018-19 में इस क्षेत्र में भारत ने पाकिस्तान को 95 मिलियन डॉलर का निर्यात किया है। पाकिस्तान के साथ व्यापार बंद होने के बाद कपास और ऑरगेनिक कैमिकल का निर्यात रुक जाएगा। कपास और ऑगरेनिक केमिकल की पाकिस्तान को होने वाले निर्यात में लगभग 50 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

हालांकि इसके निर्यात रुकने का नुकसान पाकिस्तान के टेक्सटाइल्स और फरार्मा इंडस्ट्री को होगा, क्योंकि भारत के नजदीक होने के कारण पाकिस्तान के पंजाब के फार्मा और टेक्सटाइल उद्योग को कपास और ऑरगेनिक कैमिकल का आय़ात सस्ता पड़ता है। हालांकि व्यापार बंद होने से भारत के कपास उत्पादकों को भी नुकसान होगा, क्योंकि पाकिस्तान कपास का बड़ा खरीदार है।

पाकिस्तान को निर्यात बंद होने के बाद पंजाब, राजस्थान और गुजरात के किसानों को नुकसान की संभावना है, क्योंकि इससे कपास का उचित मूल्य बाजार में उन्हें नहीं मिल सकता है। ऑरगेनिक कैमिकल के निर्यातकों को भी व्यापार बंद होने से इसका नुकसान होगा, क्योंकि दुनिया भर में इस समय निर्यात बाजार ढूंढने में उद्योगों को भारी मशक्कत करनी पड़ रही है, उन्हें भारी प्रतियोगिता का सामना करना पड़ रहा है।

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नजदीकी मुल्क से आयात का लाभ यह होता है कि परिवहन खर्च कम होता है। - फोटो : फाइल फोटो

व्यापार क्षमता 40 अरब डॉलर, पर वास्तविक व्यापार 2.5 अरब डॉलर
नजदीकी मुल्क से आयात का लाभ यह होता है कि परिवहन खर्च कम होता है। यही कारण है कि इस समय पूरे विश्व में क्षेत्रीय सहयोग की बात हो रही है। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि भारत और पाकिस्तान अपने खराब संबंधों के कारण द्विपक्षीय व्यापार का लाभ नहीं उठा सके है। इसका सीधा नुकसान दोनों मुल्कों के नागरिक, उद्योग जगत् और सरकारों को हुआ है। दोनों मुल्कों के बीच इस समय सलाना कुल व्यापार क्षमता 40 अरब डॉलर के करीब है। लेकिन दोनों मुल्कों के बीच सालाना व्यापार 2.5 अरब डॉलर के करीब ही है।

आजादी के बाद से ही दोनों मुल्कों के बीच खराब संबंध रहे। दो बड़े युद्ध हुए हैं, एक छोटी लड़ाई हुई। इस कारण समय-समय पर लंबे समय तक व्यापार भी प्रभावित रहा। दिलचस्प बात है कि पाकिस्तान से टूटकर अलग देश बना बांग्लादेश से भारत के अच्छे संबंध 1971 के बाद रहे। इसका परिणाम यह रहा कि दोनों मुल्कों के बीच व्यापार संबंधों ने भी तेज गति पकड़ी।

आज भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार 10 अरब डालर सलाना पहुंचने के करीब है। गौरतलब है कि यहां भी व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में है। दिसंबर 2018 तक भारत-बांग्लादेश व्यापार संतुलन 7.66 अरब डालर भारत के पक्ष में था।

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया तत्कालिक
भारत से राजनयिक संबंध को डाउनग्रेड करने औऱ व्यापार बंद करने का फैसला पाकिस्तान की दीर्घकालिक रणनीति नहीं होगी। दोनों मुल्कों के बीच पहले भी संबंधों में इसी तरह से उतार-चढ़ाव होते है। इससे पाकिस्तान को लंबे समय में कोई लाभ नहीं मिलेगा। लेकिन इमरान खान की राजनीतिक मजबूरी है। फिलहाल पाकिस्तान में विपक्षी दलों के निशाने पर इमरान खान है। धारा 370 को लेकर नेशनल असेंबली के बुलाए गए सेशन में इमरान खान निशाने पर रहे। विपक्षी दलों का कहना था कि इमरान खान लगातार कह रहे थे कि नरेंद्र मोदी अगर दुबारा सत्ता में आए तो कश्मीर की समस्या का हल निकल जाएगा।

समस्या का हल नरेद्र मोदी ने निकाल दिया है। कश्मीर को मिलने वाला स्पेशल स्टेटस को समाप्त कर दिया। वहीं कट्टरपंथियों की जमात भी इमरान खान को निशाने पर लेने की तैयारी में हैं। पाकिस्तान के अंदर अतिराष्ट्रवादी औऱ चरमपंथी जमात को खुश करने के लिए पाकिस्तान  फिलहाल भारत के खिलाफ प्रतिक्रिया दी है। इसमें राजनयिक संबंध को के स्तर को कम किया है। वहीं व्यापार बंद किया है। जबकि पाकिस्तान को पता है कि क्षेत्रीय सहयोग के बिना पाकिस्तान का भला नहीं है। लेकिन अफगानिस्तान वार्ता फाइनल दौर में है।

पाकिस्तान कश्मीर का बहाने तनाव उत्पन्न कर अमेरिका से अफगानिस्तान में विशेष स्थिति हासिल करने के खेल में भी लगा हुआ है, क्योंकि पाकिस्तान को यह पता है कि कश्मीर में लाइन ऑफ कंट्रोल की जो यथास्थिति फिलहाल है, उसे बदलने की स्थिति में वो नहीं है। पहले भी जब बदलने की कोशिश पाकिस्तान ने की, उसे नुकसान हुआ है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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