कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान संपन्न हो गया है, एग्जिट पोल भी आ गए हैं, लेकिन इस बार भी एग्जिट पोल कुछ-कुछ वर्ष 2018 जैसी कहानी कह रहे हैं, जिसमें कांग्रेस को बढ़त बताई जा रही थी और भाजपा दूसरे नंबर पर खिसकती दिख रही है। हालांकि, इस बार जनता दल (सेक्युलर) की स्थिति पहले से खराब रहने का अनुमान लगाया गया है, यानी एग्जिट पोल मान रहे हैं कि किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत संभवतः नहीं मिलेगा। खंडित जनादेश आएगा।
अक्सर लोग ओपिनियन पोल और एग्जिट पोल में भ्रमित हो जाते हैं। ओपिनियन पोल में वोटिंग से पहले समय-समय पर जनता की राय जानकर अनुमान लगाया जाता है, जबकि एग्जिट पोल में जो मतदाता वोट डालकर बूथ से बाहर निकला है, उसकी राय ली जाती है। एग्जिट पोल में पूरे चुनाव क्षेत्र से 35,000 से 1,00,000 तक वोटरों की राय को जानकर अनुमान लगाया जाता है।
एग्जिट पोल की शुरुआत 15 फरवरी 1967 को नीदरलैंड के समाजशास्त्री और पूर्व राजनेता मार्सेल वॉन डैम ने की थी। तब नीदरलैंड में हुए चुनाव में डैम का आकलन बिल्कुल सटीक रहा था। हालांकि, भारत में एग्जिट पोल अस्सी के दशक में टीवी चैनलों की शुरुआत में आए। अपने देश में जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 126ए के तहत वोटिंग के दौरान ऐसी कोई चीज नहीं होनी चाहिए, जो वोटरों पर असर डाले या उनके वोट देने के फैसले को प्रभावित करे। इसलिए वोटिंग खत्म होने के डेढ़ घंटे तक एग्जिट पोल का प्रसारण नहीं किया जा सकता है।
ये तभी हो सकता है, जब चुनावों की अंतिम दौर की वोटिंग भी खत्म हो चुकी हो।
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