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Olympic Games 2024: जैसे शूटर मनु भाकर का जीवन बदला, वैसे सभी को राह दिखा सकती है श्रीमद्भगवद् गीता

सार

टोक्यो ओलंपिक- 2020 में मेडल की रेस से बाहर होने के बाद मनु भाकर निराशा में डूब गई थी। श्रीमद्भगवद गीता ने मनु को निराशा से बाहर लाने का काम किया। मनु भाकर ने कहा कि जब वो पेरिस ओलंपिक में मेडल के लिए निशाना लगा रही थी तो उसके दिमाग में श्रीमद्भगवद गीता ही चल रही थी।
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मनु भाकर ने जीता मेडल। - फोटो : PTI
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विस्तार
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कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।

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मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥


श्रीमद्भगवद गीता के इस श्लोक का अर्थ है, 'तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करना ही है। कर्मों के फल पर तुम्हारा अधिकार नहीं है। अतः तुम निरन्तर कर्म के फल पर मनन मत करो और अकर्मण्य भी मत बनो।'

पेरिस ओलंपिक में भारत के लिए पहला मेडल जीतने के बाद शूटर मनु भाकर ने श्रीमद्भगवद गीता के इस श्लोक का जिक्र किया। मनु भाकर ने कहा कि वो श्रीमद्भगवद गीता का नियमित पाठ करती है, जिसमें कहा गया है कि स्वयं कर्म पर भरोसा रखो। जो बीत गया, उसकी चिंता में डूबने के बजाय लक्ष्य पर फोकस करो।

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दरअसल, टोक्यो ओलंपिक- 2020 में मेडल की रेस से बाहर होने के बाद मनु भाकर निराशा में डूब गई थी। श्रीमद्भगवद गीता ने मनु को निराशा से बाहर लाने का काम किया। मनु भाकर ने कहा कि जब वो पेरिस ओलंपिक में मेडल के लिए निशाना लगा रही थी तो उसके दिमाग में श्रीमद्भगवद गीता ही चल रही थी।

दुनिया की 75 से अधिक भाषाओं में अनुवाद की जा चुकी श्रीमद्भगवद गीता का विश्व की महान विभूतियां नियमित रूप से पाठ करती रही हैं। अपने जीवन में श्रीमद्भगवद गीता की शिक्षा का अनुसरण करती रही हैं। स्वयं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रीमद्भगवद गीता से गहरा लगाव था और उनके जीवन पर श्रीमद्भगवद गीता ने गहरा प्रभाव छोड़ा था।

सस्ता साहित्य मंडल नई दिल्ली से महात्मा गांधी के लेखों पर प्रकाशित पुस्तक 'गीता की महिमा' में उनके धार्मिक विचारों की झलक मिलती है। एक लेख में महात्मा गांधी ने लिखा कि गीता शास्त्रों का दोहन है। गीता मेरे लिए माता हो गई है। जब कभी संदेह मुझे घेरते हैं और मेरे चेहरे पर निराशा छाने लगती है तो मैं गीता को एक उम्मीद की किरण के रूप में देखता हूं। गीता में मुझे एक छंद मिल जाता है, जो मुझे साथ सांत्वना देता है। मैं कष्टों के बीच मुस्कराने लगता हूं।

भारत के मिसाइल मैन और पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलम भी श्रीमद्भगवद गीता से बेहद प्रभावित थे और उसका नियमित पाठ करते थे। अपनी आत्मकथा 'विंग्स ऑफ फायर' में उन्होंने अपने गीता से जुड़ाव की जिक्र किया है। एक स्थान पर कलाम ने बताया कि कैसे एक बार तिरुअनंतपुर के तट पर उन्हें भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक और महान वैज्ञानिक विक्रम साराभाई श्रीमद्भगवद गीता पढ़ते हुए मिले थे। विक्रम साराभाई ने ही उन्हें श्रीमद्भगवद गीता पढ़ने के लिए प्रेरित किया था। अपनी आत्मकथा में कलाम ने लिखा कि गीता एक विज्ञान है और भारतीयों के लिए अपनी सांस्कृतिक विरासत का गर्व का बड़ा विषय है।

दुनिया में परमाणु बम के जनक अमेरिकी वैज्ञानिक जे. रॉबर्ट ओपेनहाइमर को भी श्रीमद्भगवद गीता से गहरा लगाव था। 1930 के दशक में ओपेनहाइमर हिंदू ग्रंथों से प्रभावित हुए और वर्ष 1933 में हर गुरुवार को वो श्रीमद्भगवद गीता पढ़ने जाते थे, जिसे बर्कली में रहने वाले आर्थर राइडर नाम के संस्कृत शिक्षक पढ़ाते थे।

ओपनहाइमर ने श्रीमद्भगवद गीता को अनुवाद किए बिना पढ़ने का निर्णय लिया था और इसके लिए उन्होंने संस्कृति सीखी थी। वर्ष 1785 में सर्वप्रथम ईस्ट इंडिया कंपनी के कर्मचारी चार्ल्स विलकिंस ने संस्कृत से अंग्रेजी में श्रीमद्भगवद गीता का अनुवाद किया। यह किसी भी यूरोपीय भाषा में संस्कृत से होने वाला पहला अनुवाद भी है।

श्रीमद्भगवद गीता मनुष्य को कर्तव्य का बोध कराती है। जीवन जीने की कला सिखाती है। सत्कर्म करते हुए जीवन जीने की शिक्षा देती है। यही कारण है कि दुनिया के अधिकांश देशों में श्रीमद्भगवद गीता का अध्ययन हो रहा है। अमेरिका की न्यूजर्सी यूनिवर्सिटी में श्रीमद्भगवद गीता को अनिवार्य रूप से पढ़ाया जाता है।

ऐसे विश्व में कई विश्वविद्यालय हैं, यहां श्रीमद्भगवद गीता को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। केवल शूटर मनु भाकर नहीं, दुनिया में करोड़ों-करोड़ लोगों को श्रीमद्भगवद गीता राह दिखा रही है। आज देश-दुनिया में सैकड़ों लोग अवसाद का शिकार हो रहे हैं। निराशा में डूब रहे हैं। यदि वो श्रीमद्भगवद गीता का पाठ करें तो जीवन और विश्व में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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