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जीवन धारा: मशीनों को अपनाने का वक्त आ गया है... इसमें औषधि और विष दोनों; इस्तेमाल मनुष्य के विवेक पर निर्भर

Sat, 07 Nov 2026 09:56 AM IST
ज्योति भास्कर बर्नार्ड स्टिग्लर (फ्रांसीसी दार्शनिक)।

सार

तकनीक मनुष्य की बनाई हुई व्यवस्था है और उसके भविष्य की दिशा तय करने की जिम्मेदारी भी इन्सान की ही है। हमें मशीनों से डरने या उन्हें आंख मूंदकर स्वीकारने के बजाय उनके स्वरूप, प्रभाव और उद्देश्य को समझना होगा।
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अब मशीनों को अपनाने का वक्त (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला एआई
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विस्तार
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तकनीक ने हमारे सोचने, सीखने और दुनिया को समझने की क्षमता को आकार दिया है। मनुष्य और तकनीक का संबंध उतना ही पुराना है, जितना स्वयं मानव सभ्यता का इतिहास। यह मनुष्य की अपनी क्षमताओं को पहचानने, उन्हें विस्तार देने और जीवन को नए रूप में गढ़ने की कहानी भी है। जब मनुष्य ने पत्थर को तराशकर औजार बनाया, तो उसने केवल अपनी शारीरिक शक्ति बढ़ाने का साधन तैयार नहीं किया, बल्कि प्रकृति के साथ अपने संबंध को भी बदल दिया। इस दृष्टि से तकनीक मनुष्य के जीवन से अलग कोई बाहरी शक्ति नहीं है।

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मनुष्य अपने औजारों को बनाते हुए स्वयं भी बदलता है। उसके काम करने का तरीका, सोचने की क्षमता और सामाजिक व्यवहार इन औजारों से प्रभावित होते हैं। मनुष्य अपनी स्मृतियों और ज्ञान को केवल मस्तिष्क तक सीमित नहीं रखता। वह उन्हें किताबों, लिखावट, चित्रों, दस्तावेजों और डिजिटल माध्यमों में सुरक्षित करता है।

इसका अर्थ है कि तकनीक केवल वर्तमान की जरूरतें पूरी नहीं करती, बल्कि अतीत के अनुभवों को भविष्य के लिए सुरक्षित रखने का माध्यम भी बनती है। किसी तकनीक में लाभ पहुंचाने और नुकसान करने, दोनों की क्षमता होती है। इसमें औषधि और विष, दोनों मौजूद हैं। यह मनुष्य के विवेक पर निर्भर करता है कि वह तकनीक का उपयोग विकास के लिए करता है या विनाश के लिए।
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तकनीक मनुष्य की बनाई हुई व्यवस्था है और उसके भविष्य की दिशा तय करने की जिम्मेदारी भी मनुष्य की ही है। हमें मशीनों से डरने या उन्हें आंख मूंदकर स्वीकारने के बजाय उनके स्वरूप, प्रभाव और उद्देश्य को समझना होगा। तकनीक की असली सफलता इस बात में नहीं है कि मशीनें कितनी शक्तिशाली हो गई हैं, बल्कि इसमें है कि उनके माध्यम से मनुष्य कितना अधिक स्वतंत्र, रचनात्मक, संवेदनशील और विवेकशील बन पाया है।

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