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जीवन धारा: मुस्कुराहट ऊपरी न हो, भीतर से आए, करुणा रखना अहम सूत्र

सार

ऊपर से तो हम शत्रु से भी मुस्कुराकर पूछते हैं, ‘हां भाई, कैसे हो?’ किंतु भीतर से बुरा-भला कहते हैं। जीवन में सफलता को हम तभी नाप सकते हैं, जब हमारी हंसी हरदम एक-सी बनी रहे। 
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हंसी - फोटो : Freepik
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विस्तार
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समुद्र के किनारे कुछ लोग शाम को ऐसे ही टहलने के लिए जाते हैं। वे सिर्फ टहलने भर से खुश होते हैं। ताजी हवा मिल जाती है। कुछ लोग अपने जूते वगैरह उतारकर ठंडे पानी में पैर रखते हैं और उसी से खुश हो जाते हैं। किंतु कुछ लोग इससे भी तृप्त नहीं होते और पानी में तैरने के लिए जाते हैं, नहाने के लिए जाते हैं। कुछ लोग समुद्र की गहराई में डुबकी लगाकर उसमें से कुछ रत्न, मूंगा, मोती निकालने जाते हैं, तो कुछ लोग मछलियां पकड़ने के लिए जाते हैं। और कुछ लोग उसके पानी से नमक बनाकर खुश होते हैं, तो कुछ समुद्र से तेल निकालते हैं। 

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समुद्र एक ही है, किंतु अलग-अलग व्यक्ति अपनी-अपनी जरूरत के हिसाब से जो कुछ उन्हें चाहिए, उसमें से निकाल लेते हैं। ऐसा ही है न? सागर किसी को मजबूर नहीं करता। वह किसी से यह नहीं कहता, ‘अरे भाई, तुम सिर्फ नमक क्यों निकाल रहे हो, मछली ले लो।’ और जो मछलियां पकड़ने के लिए जाते हैं, उनसे यह नहीं कहता, ‘भाई, यहां तेल पड़ा है, तेल ले जाओ।’ और जो तेल के लिए सागर के पास जाते हैं, उनसे नहीं कहता, ‘अरे, गहराई में डुबकी लगाओ, वहां मोती है, मूंगा है, वह सब निकालो।’

जिसे जो चाहिए, वह उसमें से स्वयं ले लेता है। ज्ञान का भी ऐसा ही सागर है, इसमें हम जितनी गहराई में उतरते हैं, उतने ही हम सुखी होते हैं। तो आप स्वयं से पूछो, आपको क्या चाहिए? आप प्रश्न पूछो और निकाल लो जवाब। मुझसे पूछा गया कि सफल जीवन किसे कहते हैं? हम खुश हो सकें, दिल खोलकर बात कर सकें, प्रेम से रह सकें, हममें खुशी की चमक हो। मुस्कराहट ऊपर की न हो, भीतर से आए। ऊपर से तो हम अक्सर मुस्कराते हैं, कोई शत्रु भी आ जाए, तो भी मुस्कराकर पूछते हैं, ‘हां भाई, कैसे हो?’ किंतु भीतर से बुरा-भला कहते हैं। यह तो ऊपर से नाटक करना हो गया। हममें एक आंतरिक मस्ती होनी चाहिए। हरदम मस्त रहना चाहिए।
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वही सफल जीवन है, जिसमें हमारी हंसी ऐसी मजबूत हो कि कोई भी हमसे उसे छीन न पाए। अक्सर छोटी-मोटी बातों से हमारी हंसी उड़ जाती है। ऐसा होता है न? मान लीजिए, आप बहुत खुश हैं और टेलीफोन पर किसी ने कुछ कठोर शब्द कह दिए। बस, झट से आपका माथा गर्म हो जाता है। यह आप सबका अनुभव है कि नहीं? जीवन में सफलता को तभी नाप सकते हैं, जब हमारी हंसी हर अवस्था में एक-सी बनी रहे। देखिए, आप जीवन-भर खुशी की तैयारी में लग जाते हैं।

मान लो, आप अस्सी साल के हैं, तो चालीस साल तो आपने सोकर निकाल दिए, बीस-पच्चीस साल काम करने में निकाल दिए, बाकी के पंद्रह-बीस साल नहाने-धोने में, खाने-पीने में, यात्रा में निकाल दिए। हां, बचपन के दो-तीन साल मस्ती से गुजारे। या साल में दो-चार दिन, जब कोई त्योहार आया, या कुछ और उत्सव हुआ, तो हंसी में समय बिताया। इसके सिवाय बाकी सब समय तो जीने की तैयारी में ही निकल गया। हमने कभी शांत बैठकर यह नहीं सोचा, मैं कौन हूं, कहां से आया हूं और किस लिए आया हूं? यह बहुत महत्वपूर्ण बात है, और यह अनुभव की बात है।

सूत्र- करुणा रखें
खुशी एक तितली की तरह है, जिसका पीछा करने पर वह हमेशा हमारी पकड़ से बाहर रहती है, लेकिन अगर आप चुपचाप बैठ जाएं, तो वह खुद आप तक आ सकती है। इसलिए यदि आप खुश रहना चाहते हैं, तो स्वयं और दूसरों के प्रति करुणा रखें। और यदि आपके विचार अच्छे हैं, तो वे आपके चेहरे पर सूर्य की किरणों की तरह चमकेंगे और आप हमेशा सुंदर दिखेंगे।

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