डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन (फाइल)
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मेरा मानना है कि हमारे जैसे लगभग सभी देश, जो पराधीनता से निकलकर स्वतंत्रता की ओर बढ़े हैं, आज अपने नागरिकों के जीवनस्तर को ऊंचा उठाने का प्रयास कर रहे हैं। वे गरीबी, भुखमरी, बीमारी, अशिक्षा और ऐसी ही अनेक समस्याओं से जूझ रहे हैं। इन चुनौतियों का सामना करने का सबसे प्रभावी माध्यम विज्ञान और प्रौद्योगिकी का विकास ही है। हम सबका एक साझा उद्देश्य है-अपने नागरिकों को ऐसा जीवन प्रदान करना, जो रचनात्मक हो और संतोषपूर्ण भी।
हमारे देश ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के मार्गदर्शन और प्रेरणा में अपने राष्ट्रीय जीवन में विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया है। वैज्ञानिक प्रयोगशालाएं, सिंचाई परियोजनाएं और बांध, विभिन्न अनुसंधान केंद्र तथा परमाणु रिएक्टर आज देश के अनेक हिस्सों में दिखाई देते हैं। ये सभी उस परिवर्तन के प्रतीक हैं, जो विज्ञान व प्रौद्योगिकी के प्रभाव से भारत में आकार ले रहा है।
जब हम सामाजिक अर्थव्यवस्था की बात करते हैं, तो हमारा आशय यह है कि प्रत्येक व्यक्ति महत्वपूर्ण है, प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का एक उद्देश्य है और हमारा कर्तव्य है कि हम उसे उस उद्देश्य की पूर्ति में सहायता दें। यह तभी संभव है, जब प्रत्येक व्यक्ति को जीवन की न्यूनतम आवश्यकताएं, वस्त्र, आवास और शिक्षा उपलब्ध हों।
बढ़ती हुई जनसंख्या के बीच हम इन आवश्यकताओं की पूर्ति तब तक नहीं कर सकते, जब तक विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से अपने देश के प्राकृतिक तथा मानवीय संसाधनों का पूरा उपयोग न करें। इसलिए हमारे सामने कुछ स्पष्ट लक्ष्य हैं, खाद्य उत्पादन में वृद्धि करना, उसके न्यायसंगत वितरण की व्यवस्था स्थापित करना और उन तत्वों से मुक्त होना, जिनका दृष्टिकोण समाज के प्रति असामाजिक और स्वार्थपूर्ण है।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी हमारे लिए केवल विकास के साधन नहीं हैं। वे प्रत्येक नागरिक को बेहतर, सम्मानजनक और सार्थक जीवन देने के राष्ट्रीय संकल्प को पूरा करने के महत्वपूर्ण माध्यम हैं।