कल्पना करें कि आपका अवचेतन मन उपजाऊ मिट्टी है, जो सभी तरह के बीजों की उगने में मदद करेगी, चाहे वे अच्छे हों या बुरे। अगर आप कांटे बोते हैं, तो क्या आपको अंगूर मिल सकते हैं? अगर आप कंटीली झाड़ियां बोते हैं, तो क्या आपको अंजीर की फसल मिल सकती है? हर विचार एक कारण है और हर परिस्थिति एक परिणाम है। इसलिए यह जरूरी है कि आप अपने विचारों पर नियंत्रण करें। ऐसा करने पर ही इच्छित परिणाम मिल सकते हैं।
इसी समय शांति, खुशी, सही कर्म, सद्भावना और समृद्धि के विचारों के बीज बोना शुरू कर दें। शांति और विश्वास से इन चीजों के बारे में सोचें। अपने चेतन तार्किक मन में इन्हें पूरी तरह स्वीकार करें। इन अद्भुत विचार-बीजों को अपने मस्तिष्क के बगीचे में बोते रहें; आपको बहुत बढ़िया फसल मिलेगी।
जब आपका मस्तिष्क सही तरीके से सोचता है, जब आप सच्चाई समझ लेते हैं, जब आपके अवचेतन मन तक पहुंचे विचार सृजनात्मक, सद्भावनापूर्ण और शांतिपूर्ण होते हैं, तो आपके अवचेतन की जादुई कार्यकारी शक्ति प्रतिक्रिया करेगी। यह उस विचार के लिए आवश्यक परिस्थितियों और उचित माहौल का निर्माण कर देगी। अपनी विचार प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने के बाद आप किसी भी समस्या या मुश्किल में अपने अवचेतन मन की शक्तियों का प्रयोग कर सकते हैं। वास्तव में आप जान-बूझकर हुए उस असीमित शक्ति और अटूट नियम के साथ सहयोग कर रहे हैं, जो सभी चीजों पर लागू होता है।
अपने चारों तरफ देखें। आप चाहे जहां रहते हों, आपकी सामाजिक स्थिति चाहे जैसी हो, आप देखेंगे कि अधिकांश लोग बाहर की दुनिया में जीते हैं। जबकि, ज्यादा ज्ञानी लोग अपने अंदर की दुनिया में जीते हैं। उन्हें यह एहसास है-जो आपको भी होगा कि अंदर की दुनिया से ही बाहर की दुनिया उत्पन्न होती है। आपके विचार, भावनाएं और सपने आपके अनुभव के जनक हैं।
आंतरिक मन ही एकमात्र रचनात्मक शक्ति है। बाह्य संसार में आपको जितनी भी चीजें मिलती हैं, वे सभी मन के अंदरूनी संसार की उपज हैं, चाहे आपने यह काम सचेतन रूप से किया हो या अचेतन रूप से। जब आप अपने चेतन और अवचेतन मन की आपसी कार्यविधि के बारे में सच्चाई जान लेंगे, तो अपने जीवन की कायापलट करने में कामयाब हो जाएंगे। अगर आप बाहरी स्थितियों को बदलना चाहते हैं, तो आपको उनके कारणों को बदलना होगा।
अधिकांश लोग परिस्थितियों और स्थितियों से संघर्ष करके उन्हें बदलने की कोशिश करते हैं। यह समय और मेहनत की भयंकर बर्बादी है। वे यह नहीं देख पाते हैं कि ये स्थितियां और परिस्थितियां किसी कारण से उत्पन्न हुई हैं। अपने जीवन से मनमुटाव, दुविधा, कमी और सीमा को दूर करने के लिए आपको उसके मूल कारण को दूर करना होगा। कारण है वह तरीका, जिससे आप अपने चेतन मन का प्रयोग करते हैं; वे विचार और तस्वीरें, जो आप इसमें भरते हैं। कारण को बदल दें, परिणाम अपने आप बदल जाएगा। यह इतना ही आसान है।
सूत्र: सकारात्मक बनें
हमारा अवचेतन मन चेतन विचारों के प्रति बहुत संवेदनशील होता है। ये चेतन विचार सांचे की तरह काम करते हैं, जिनमें अवचेतन का असीमित ज्ञान, बुद्धि, जीवन-शक्ति और ऊर्जा प्रवाहित होती है। अगर सांचे को सकारात्मक बना दें, तो इस असीमित ऊर्जा से अधिक लाभ हो सकता है।