जीवन में सब कुछ भुला दिया जाता है, यहां तक कि महान प्रेम भी। यही जीवन का सबसे दुखद और अद्भुत पहलू भी है। जीवन को देखने का केवल एक नजरिया नहीं होता, कभी-कभी एक नया दृष्टिकोण अचानक आपके सामने आ जाता है, वह प्रेम भी हो सकता है। जीवन में प्रेम का होना अच्छा है, और वह प्रेम जो बुरे ढंग से खत्म होकर भावनात्मक दर्द देता है, वह भी जीवन के लिए अच्छा है। यह उन अस्पष्ट निराशाओं का बहाना देता है, जिनसे हम सभी कभी न कभी गुजरते हैं। जीवन की तीव्र भावनाएं और अनुभव, भले ही उस समय बहुत गहरे प्रतीत हों, अंततः क्षणभंगुर हैं। हम मनुष्य असंगत प्राणी हैं। एक पल में हम जीवन शक्ति, अर्थ और उद्देश्य की ऊर्जा से भरे होते हैं। अगले ही पल हमें अचानक यह एहसास हो सकता है कि हम जो कुछ भी करते हैं, वह शायद उतना महान या महत्वपूर्ण नहीं है। इसलिए जरूरी है कि इन सब में असली अर्थ को खोजें, उदासी और निराशा में अंतर करना सीखें।
अर्थ की खोज के लिए कुछ पल खुद के लिए निकालने होंगे। इसके लिए बाहर टहलने जा सकते हैं। जरूरी नहीं कि आप किसी पार्क में सैर करें, जहां वसंत का सबसे शानदार पल, फूलों की खुशबू, और काव्यात्मक कल्पनाएं आपको दूसरी दुनिया में ले जाएं। जरूरी नहीं कि आप ऐसी सैर करें, जिसके दौरान आपको जीवन के रहस्यों का उद्घाटन हो या ऐसे अर्थ मिलें, जिन्हें कोई और मस्तिष्क कभी न समझ पाए। लेकिन फिर भी अपने साथ समय बिताने से न डरें। अर्थ मिले या न मिले, कुछ समय अपने लिए चुराएं और इसे स्वतंत्र रूप से, विशेष रूप से स्वयं को समर्पित करें। भले ही आपको जीवन का कोई व्यापक उद्देश्य न मिले, लेकिन अपने लिए समय निकालना कल्याण और आत्म-खोज के लिए आवश्यक है। एकांत और गोपनीयता का विकल्प चुनें। इसका मतलब यह नहीं है कि इससे आप असामाजिक बन जाएंगे, न ही दुनिया से कटने के लिए मजबूर हो जाएंगे।
दरअसल, दुनियादारी की भागम-भाग के बीच आपको अपने वास्तविक स्वरूप को जानने के लिए कुछ पल अपने साथ बिताने की अत्यंत आवश्यकता होती है, उस अकेलेपन में आप स्व का चिंतन कर सकते हैं। जीवन का शाब्दिक अर्थ वह है जो आप कर रहे हैं, जो आपको हर पल जीने के लिए प्रेरित करता है। कोई नहीं जानता कि कुछ लोग जीवन का अर्थ ढूंढने में इतनी अधिक ऊर्जा क्यों खर्च करते हैं। यदि आप खुशी की तलाश में डूबे रहेंगे, तो कभी खुश नहीं हो पाएंगे। यदि आप जीवन का अर्थ खोजने में लगे रहेंगे, तो कभी जी नहीं पाएंगे। लाओ त्जु का कथन है, ‘जीवन प्राकृतिक और सहज परिवर्तनों की एक शृंखला है। उनका विरोध न करें, इससे केवल दुख पैदा होता है। वास्तविकता को वास्तविक रूप में रहने दें और चीजों को स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ने दें।’
सूत्र- स्वयं पर भरोसा रखें
इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता लोग आपके कितने खिलाफ हैं या कितने समर्थन में हैं। चूंकि आपके भीतर कुछ ऐसा मजबूत विचार है, जो पतझड़ को वसंत में बदल देगा। इसलिए स्वयं पर भरोसा रखें तथा सफलता, खुशी और हंसी वह सब कुछ पाएं, जिनकी इस सांसारिक जीवन को जरूरत है, लेकिन हर पल अपने भीतर मौजूद ऊर्जा को निखारते रहें।