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जीवन धारा: प्रेम पाना है, तो खुद से प्रेम करें... आगे बढ़ते रहने का सूत्र अपनाएं

Tue, 03 Jun 2025 09:22 AM IST
ज्योति भास्कर फ्योदोर दोस्तोवस्की

सार

प्रेम एक शिक्षक है, परंतु इसे प्राप्त करना कठिन है। इसे श्रमपूर्वक  धीरे-धीरे जीता जाता है। बाहर के लोग आपको तभी सम्मान और प्रेम देंगे, जब आप स्वयं से प्रेम करेंगे।
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स्वयं से झूठ न बोलें (प्रतीकात्मक) - फोटो : अमर उजाला प्रिंट / एजेंसी
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विस्तार
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सबसे महत्वपूर्ण बात, स्वयं से झूठ न बोलें। जो व्यक्ति स्वयं से झूठ बोलता है और अपने झूठ को सुनता है, वह एक ऐसे बिंदु पर पहुंच जाता है, जहां वह सत्य और झूठ के बीच फर्क करने की क्षमता खो देता है। इससे वह स्वयं और दूसरों के प्रति अनादर की भावना रखने लगता है। प्रेम के अभाव में वह खोखला हो जाता है। 

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अपने खालीपन को भरने के लिए वह अनावश्यक गतिविधियों में लिप्त हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप वह जीवन के उद्देश्य से भटक जाता है। समय के साथ वह पशुवत व्यवहार और अनैतिकता पर उतर जाता है। जो व्यक्ति स्वयं से झूठ बोलता है, वह अक्सर सबसे पहले नाराज होता है। कभी-कभी उसे नाराज होना बहुत अच्छा लगता है। वह जानता है कि उसने स्वयं ही नाराजगी का आविष्कार किया है। उसने सिर्फ दिखावे के लिए झूठ बोला है, प्रभाव के लिए बढ़ा-चढ़ाकर बात की है, एक शब्द को उठाकर राई का पहाड़ बना दिया है। वह यह सब जानता है, फिर भी नाराज होता है। उसे नाराज होने से खुशी मिलती है और इससे वह आनंद प्राप्त करता है। यह झूठ उसके आसपास के वातावरण को प्रभावित करता है।

हर दिन, हर घंटे, हर मिनट, अपने चारों ओर देखें और स्वयं को परखें। क्या आपकी छवि सभ्य है? यदि आप एक छोटे बच्चे के पास से ऐसी छवि के साथ गुजरते हैं, जो द्वेषपूर्ण, कटु और क्रोधी हो, तो भले ही आपने बच्चे को न देखा हो, उसने आपको देखा है। आपकी अनुचित और नीच छवि उसके कोमल हृदय में अंकित हो सकती है। आप यह नहीं जानते, लेकिन आपने उसके मन में बुराई का बीज बो दिया है, जो बढ़ सकता है। यह सब इसलिए होता है, क्योंकि आप बच्चे के सामने सावधान नहीं थे, क्योंकि आपने अपने अंदर सावधान और परोपकारी प्रेम विकसित नहीं किया।
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प्रेम एक शिक्षक है, परंतु इसे प्राप्त करना कठिन है। इसे श्रमपूर्वक धीरे-धीरे जीता जाता है। हमें केवल क्षणिक रूप से नहीं, बल्कि हमेशा के लिए प्रेम करना चाहिए। हर कोई कभी-कभी प्रेम कर सकता है, यहां तक कि दुष्ट भी, परंतु सच्चा प्रेम निरंतरता मांगता है। बाहर के लोग आपको तभी सम्मान और प्रेम देंगे, जब आप स्वयं से प्रेम करेंगे। दूसरों से वास्तविक सम्मान आपके स्वयं के आत्म-मूल्य और व्यवहार से उपजा है। यदि आप स्वयं को महत्व नहीं देते, तो दूसरों से सम्मान प्राप्त करना असंभव है। यदि आप पूरी दुनिया पर विजय प्राप्त करना चाहते हैं, तो पहले स्वयं पर विजय प्राप्त करें। जीवन का अर्थ आप न भी ढूंढ सके हों, पर इसे अधिक से अधिक प्रेम करें। प्यार एक ऐसा अनमोल खजाना है, जिससे आप पूरी दुनिया को जीत सकते हैं।

सूत्र- आगे बढ़ते रहें
खुद के भीतर मौजूद बाधाओं को तोड़ना है, तो उन्हें एक बार में ही तोड़ दें, और दुख अपने ऊपर ले लें। रात जितनी अंधेरी होगी, तारे उतने ही चमकीले होंगे। जीवन की मझधार में कूद पड़ें; डरें मत-बाढ़ किनारे तक ले जाएगी और फिर से सुरक्षित अपने पैरों पर खड़ा कर देगी। जीवन में बगैर किसी चीज से डरे हमेशा आगे बढ़ते रहें।

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