राजा मान सिंह कच्छवाहा राजपूत राजा थे। वो भगवान श्रीकृष्ण के बड़े अनुयायी थे।
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उस पुरुष से दिव्य प्रकाश निकल रहा था। वह हाथ जोड़कर भगवान श्रीकृष्ण के सामने खड़ा हो गया और उसने बताया कि मैं इंद्र पुत्र विद्याधर हूं। मेरा नाम सुदर्शन है। एक दिन अपने विमान से आकाश विहार कर रहा था। तभी मैंने अंगिरा गोत्र के कुरूप ऋषियों को देखा। अपने सौंदर्य के घमंड में उनकी हंसी उड़ाई। मेरे इस कृत्य से क्रोधित होकर ऋषियों ने मुझे अजगर योनि में जाने का श्राप दे दिया।
राजा मान सिंह प्रथम ने भगवान श्रीकृष्ण के दाहिने पैर के चरण चिन्ह मिलने के बाद यहां भव्य मंदिर का निर्माण कराया। वो प्रतिदिन मंदिर में दर्शन के लिए आया करते थे। मंदिर में सेवा भोग भी राजा की ओर से लगाया जाता था। आज भी मंदिर में भक्तों का तांता लगता है। विशेष रूप से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर बड़ी संख्या में भक्त यहां आते हैं।
राजा मान सिंह और श्री कृष्ण
राजा मान सिंह कच्छवाहा राजपूत राजा थे। वो भगवान श्रीकृष्ण के बड़े अनुयायी थे। उन्होंने वृंदावन में सात मंजिला कृष्णजी (गोविंददेव जी) मंदिर भी बनवाया था। हिंदू राजा मान सिंह ने गंगा पर बनारस के घाट, पटना के घाट, हरिद्वार के घाटों का निर्माण कराया। उड़ीसा में जगन्नाथ पुरी का मंदिर तोड़कर पठान सुल्तान मस्जिद बनाना चाहते थे। इसकी सूचना जब राजा मान सिंह को मिली तो उन्होंने अपनी सेना का दल उड़ीसा भेजा था, लेकिन विशाल सेवा के कारण सभी वीरगति को प्राप्त हुए।
उसके बाद राजा मान सिंह स्वयं उड़ीसा गए और दो पठान भाइयों का सिर काट दिया। उनके सहयोगी हिंदू राजाओं को कुचल कर रख दिया और भगवान जगन्नाथ के मंदिर की रक्षा की। जितने मंदिर मध्यकाल से पूर्व मुस्लिम आक्रांताओं ने तोड़े थे, सभी का पुनर्निर्माण राजा मान सिंह ने कराया था।
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