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Jammu Kashmir Assembly Elections 2024: भारत के संविधान के तहत पहली बार जम्मू-कश्मीर के चुनाव

सार

5 अगस्त 2019 से पहले जम्मू और कश्मीर में चुनाव वहां अपने संविधान के ढांचे के तहत आयोजित किए गए थे, जिसमें अपने स्वयं के कानून, नियम और चुनावी प्रावधान थे। राज्य की विधायी संरचना अद्वितीय थी, जिसमें एक विधानसभा और एक विधान परिषद शामिल थी।
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जम्मू-कश्मीर में तीन चरण में होंगे चुनाव। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद-370 और उसकी धारा 35-ए के साथ ही राज्य के अलग संविधान को भारत की संसद द्वारा 5 अगस्त 2019 को समाप्त किए जाने के बाद अब पहली बार वहां भारत के संविधान के तहत विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। सन् 2014 के बाद जम्मू-कश्मीर में पहली बार लोकतंत्र की बहाली के तौर पर चुनाव प्रक्रिया शुरू तो हो गई है मगर इस बार न तो जम्मू-कश्मीर पूर्ण राज्य है और ना ही उसका पुराना संविधान अस्तित्व में हैं।

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इधर, नवीनतम् परिस्थितियों के बावजूद जम्मू-कश्मीर के संविधान की चर्चा अब भी जारी है और भविष्य में भी वह संविधान तब-तब याद आएगा जब-जब पाकिस्तान दुर्भावना से जम्मू-कश्मीर के लोगों के आत्म निर्णय का मुद्दा उठाएगा। वह संविधान उस राज्य के भारत संघ के अभिन्न अंग होने का एक दस्तावेजी प्रमाण भी था।


जम्मू-कश्मीर के संविधान के अनुसार होते थे चुनाव

5 अगस्त 2019 से पहले जम्मू और कश्मीर में चुनाव वहां अपने संविधान के ढांचे के तहत आयोजित किए गए थे, जिसमें अपने स्वयं के कानून, नियम और चुनावी प्रावधान थे। राज्य की विधायी संरचना अद्वितीय थी, जिसमें एक विधानसभा और एक विधान परिषद शामिल थी। राज्य का अपना सदर-ए- रियासत था, और विधानसभा के पास स्थानीय शासन और प्रशासन में महत्वपूर्ण शक्तियां थीं। लेकिन अब पहली बार राज्य में भारत संघ के संविधान के अनुसार चुनाव होने जा रहे हैं।

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जम्मू-कश्मीर के संविधान में भाग छह की धारा-46 से लेकर 92 तक विधानमंडल से संबंधित समस्त प्रावधानों का उल्लेख था। इसकी धारा 46 में ही विधानमंडल के दो सदनों का उल्लेेख है जिसमें 100 सदस्यीय विधानसभा और 36 सदस्यीय विधान परिषद शामिल थी। संविधान में विधानपरिषद का 6 साल का कार्यकाल प्रावधानित था।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा को जमीन और सम्पत्ति के साथ ही अन्य राज्यों की तुलना में अधिक शक्तियां प्राप्त थीं जो कि अब नहीं है। जम्मू और कश्मीर के संविधान में रक्षा, विदेशी मामले, वित्त और संचार को छोड़कर कई मामलों में राज्य को स्वायत्तता देने जैसे विशेष प्रावधान शामिल थे।  मतलब यह कि वहां के विधान मंडल को  राज्य सूची तथा समवर्ती सूची के अलावा भी कुछ केन्द्रीय विषयों पर कानून बनाने का अधिकार था। अनुच्छेद 35-ए को 1954 में संविधान में शामिल किया गया था। यह प्रावधान जम्मू-कश्मीर के स्थायी निवासियों को सरकारी रोजगार, राज्य में संपत्ति खरीदने और राज्य में रहने के लिए विशेष अधिकार देता था।


 

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constitution of india भारत का संविधान - फोटो : istock

पाक अधिकृत कश्मीर के लिए रखीं थीं 25 सीटें

जम्मू-कश्मीर का संविधान पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को भी अपना अभिन्न अंग मानता था। उस संविधान के अनुसार जम्मू एवं कश्मीर राज्य में वह क्षेत्र शामिल है जो 15 अगस्त, 1947 के शासन के अंतर्गत था। इसका सीधा सा अर्थ यह है कि इस राज्य के अधीन “पाक अधिकृत क्षेत्र” भी आता है। उस संविधान के भाग 6 की धारा 48 के तहत पाक अधिकृत कश्मीर के लिए विधानसभा की 25 सीटें रखी गईं थी इस धारा में कहा गया था कि उस क्षेत्र पर जब तक पाकिस्तान का कब्जा नहीं हट जाता और वहां के नागरिक अपना प्रतिनिधि नहीं चुन लेते तब तक उनके हिस्से की 25 सीटें खाली रहेंगी। और उन्हें विधानसभा की कुल सदस्यता की गणना में नहीं लिया जाएगा और उक्त क्षेत्र को धारा 47 के अधीन प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन में शामिल नहीं किया जाएगा। इसके अलावा चुनाव में महिलाओं का उचित प्रतिनिधित्व न हो पाने पर राज्य प्रमुख को दो सीटों पर महिलाओं को नामित करने का अधिकार भी था।

भारत के पक्ष में एक प्रमाणिक दस्तावेज था वह संविधान

जम्मू-कश्मीर का संविधान अब अतीत के गर्भ में चला गया लेकिन उसकी उपयोगिता पूरी तरह समाप्त नहीं हुई। जब भी पाकिस्तान इस प्रदेश के लोगों के आत्म निर्णय का मुद्दा उठाएगा तब इसी भूतपूर्व संविधान के हवाले से पाकिस्तान को जवाब दिया जाएगा। पाकिस्तान इस रियासत के मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में उठाता रहा है। इस मुद्दे को लेकर सुयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का 91 वां संकल्प भी आया। इसके जवाब में जम्मू और कश्मीर के संविधान ने अपने स्वयं के संवैधानिक ढांचे के माध्यम से भारत के साथ अपने संबंधों को परिभाषित करके, राज्य के भारत में अंतिम विलय और भारतीय संघ के भीतर इसके अभिन्न अंग होने पर जोर देकर ऐसे दावों का मुकाबला किया था। 
जम्मू-कश्मीर के संविधान की प्रस्तावना में कहा गया था कि- 

‘‘हम, जम्मू और कश्मीर राज्य के लोग, अक्टूबर के छब्बीसवें दिन हुए इस राज्य के भारत में विलय के अनुसरण में गंभीरता से संकल्प लेते हैं कि:-

’’अपने आप को-
न्याय, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक,
विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, विश्वास और पूजा की स्वतंत्रता,
स्थिति और अवसर की समानता, और हम सबके बीच प्रचार करना,
व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता को सुनिश्चित करने वाली बंधुता,
नवंबर, 1956 के इस सत्रहवें दिन हमारी संविधान सभा में एतद्द्वारा अपनाएं, अधिनियमित करें और दें। यह संविधान हमारे लिए है।’’
 

पाक अधिकृत कश्मीर को भारत का अभिन्न मानता था वह संविधान

संविधान सभा के 1954 के प्रस्ताव के बाद जम्मू और कश्मीर के संविधान में धारा 3 को शामिल किया गया, जिसमें लिखा है-
‘‘जम्मू और कश्मीर राज्य भारत संघ का अभिन्न अंग है और रहेगा।’’ चूंकि जम्मू कश्मीर के लोगों द्वारा विधिवत् निर्वाचित संविधान सभा 26 अक्ूबर 1947 को भारत संघ में विलय को कानूनी रूप से वैध, संवैधानिक रूप से बाध्यकारी और अपरिवर्तनीय मान चुकी थी इसलिए पािकिस्तान द्वारा बार-बार जनमत संग्रह और आत्म निर्णय की मांग की हवा वैसे ही खिसक चुकी थी। 
राज्य नेतृत्व और भारत सरकार के बीच 1950 के दिल्ली समझौते के बाद 1951 में संविधान सभा का गठन किया गया था। इस समझौते ने राज्य के भारत में विलय की शर्तों को रेखांकित किया और जम्मू और कश्मीर के लिए संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए एक संविधान सभा की स्थापना का प्रावधान किया। सितम्बर-अक्टूबर 1951 में जम्मू एवं कश्मीर कीे संविधान सभा का निर्वाचन राज्य के भविष्य के संविधान के निर्माण के लिए तथा भारत के साथ सम्बन्ध स्पष्ट करने के लिए किया गया था।

रियासत की संविधानसभा के अध्यक्ष जस्टिस मेहरचन्द महाजन थाम और इसके 75 सदस्य थे जो कि अपने-अपने क्षेत्रों से वुने गए थे। संविधान सभा की पहली बैठक 31 अक्टूबर 1951 को हुई थी। जम्मू एवं कश्मीर के संविधान को बनने में कुल 5 वर्ष का समय लगा। 17 नवम्बर, 1957 को जम्मू एवं कश्मीर का संविधान अंगीकार किया गया तथा 26 जनवरी, 1957  को प्रभाव में आया था। 2002 तक, संविधान में 29 संशोधन किए गए थे।
 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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