जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (जेएलएफ) 2026 में विकिपीडिया के को-फाउंडर जिमी वेल्स ने आज की राजनीति का एक ऐसा सच सामने रखा, जिसे अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि दुनियाभर में राजनीति अब बातचीत और सहमति से नहीं, अपितु टकराव और ध्रुवीकरण से चल रही है। नेता अपनी बात पर अड़े रहने को ताकत समझने लगे हैं, जबकि संवाद को कमजोरी माना जा रहा है। इसका असर यह हुआ है कि संस्थाएं ठीक से काम नहीं कर पा रही हैं। आम लोग खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं।
भारत के लिए क्या हैं इसके मायने
भारत जैसे बड़े लोकतंत्र के लिए यह चेतावनी बेहद अहम है। यहां विचारों में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन जब ये मतभेद दुश्मनी में बदलने लगते हैं तो समाज का संतुलन बिगड़ता है।
वेल्स ने बताया कि जब सरकारें आपसी सहयोग छोड़ देती हैं तो संसद से लेकर प्रशासन तक गतिरोध पैदा हो जाता है। इससे लोगों का भरोसा लोकतांत्रिक व्यवस्था से उठने लगता है। हालांकि, भारत की परंपरा इस मामले में अलग रही है। यहां संसद को हमेशा बहस और संवाद का मंच माना गया है।
संसदीय समितियां और सर्वदलीय बैठकें मतभेद सुलझाने का जरिया रही हैं। जरूरत इस सोच को मजबूत करने की है कि राजनीति कोई जीत-हार का खेल नहीं, बल्कि जनता के हित में साथ काम करने की प्रक्रिया है। इसी भावना से सहकारी संघवाद की बात की जाती है, जहां केंद्र और राज्य मिलकर काम करें, न कि एक-दूसरे से टकराएं।
सोशल मीडिया और एल्गोरिदम को लेकर चिंता
जिमी वेल्स ने सोशल मीडिया और एल्गोरिदम की भूमिका पर भी गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज की तकनीक गुस्से और उत्तेजना को ज्यादा फैलाती है, क्योंकि वही चीजें ज्यादा क्लिक और ध्यान खींचती हैं। असहमति अब सामान्य बहस नहीं रही, बल्कि उसे नैतिक खतरे की तरह देखा जाने लगा है।
भारत में इसका असर फेक न्यूज और अफवाहों के रूप में साफ दिखता है, जिसे लोग मजाक में ‘वाट्सएप यूनिवर्सिटी’ कहते हैं। लोग वही सुनते और मानते हैं, जो उनकी सोच से मेल खाता है, सच क्या है, इस पर ध्यान कम जाता है। हालांकि, इस चुनौती से निपटने के लिए भारत सरकार ने सोशल मीडिया के लिए नियम बनाए हैं और डिजिटल इंडिया के तहत लोगों को सूचना की समझ विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
मकसद यह है कि लोग यह जान सकें कि खबर और अफवाह में फर्क कैसे किया जाए और हर वायरल मैसेज को सच मानने से पहले सोचें।
विकीपीडिया और इसकी भूमिका
वेल्स ने विकिपीडिया को एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में रखा। उन्होंने कहा कि विकिपीडिया यह साबित करता है कि अलग-अलग विचार रखने वाले लोग भी अगर तथ्यों पर भरोसा करें तो मिलकर काम कर सकते हैं। भारत में यूपीआई जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म इसी सोच को दिखाते हैं। जब तकनीक पारदर्शी और निष्पक्ष होती है तो करोड़ों लोग एक ही सिस्टम पर भरोसा करते हैं। इंडिया स्टैक भी सहयोग और विश्वास पर टिका ऐसा ही सिस्टम है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर जिमी वेल्स ने साफ कहा कि एआई इंसान की जगह नहीं ले सकता। एआई अक्सर ऐसे जवाब देता है, जो सुनने में सही लगते हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि वे पूरी तरह सही या संवेदनशील हों। भारत का रुख भी यही है कि एआई को सहायक के रूप में इस्तेमाल किया जाए, न कि अंतिम फैसला लेने वाले के रूप में। स्वास्थ्य, कृषि या प्रशासन में एआई मदद कर सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय इंसान के विवेक पर ही होना चाहिए।
जिमी वेल्स का संदेश साफ है, अगर लोकतंत्र को मजबूत रखना है तो राजनीति और तकनीक, दोनों को तथ्य, पारदर्शिता और न्याय के आधार पर चलाना होगा। भारत की सोच ‘सत्यमेव जयते’ और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ पर आधारित है। लक्ष्य एक ऐसा माहौल बनाना है, जहां तकनीक सेवा करे, सोशल मीडिया जिम्मेदार हो और राजनीति संवाद का रास्ता चुने।
विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा, जब सहयोग और साझा सच को हमारी सार्वजनिक जिंदगी का आधार बनाया जाएगा।
---------------
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।