बिहार में इस समय सबसे बड़ा दल राजद है। ओवैसी की पार्टी के विधायकों को जोड़ने के बाद उसकी संख्या 79 है।
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महागठबंधन में भी भरोसे का संकट
बिहार में इस समय सबसे बड़ा दल राजद है। ओवैसी की पार्टी के विधायकों को जोड़ने के बाद उसकी संख्या 79 है। जदयू भी चिराग के विधायक और निर्दलीय को जोड़कर अब 45 है। बहुमत के लिए 122 की संख्या चाहिए। अकेले इन्हीं दो गठजोड़ से संख्या बहुमत के पार हो जाती है, जबकि कांग्रेस के 19 और वाम दलों के 15 विधायक गैरभाजपा वाले महागठबंधन के साथ को हमेशा से तैयार हैं।
जीतनराम मांझी की हम पार्टी के 4 विधायकों की नैय्या सदैव डगमग रहती है लेकिन मांझी खुद की वैतरणी पार करने के असली खेवनहार माने जाते हैं। दूसरी तरफ, भाजपा मुकेश सहनी वाली वीवीआईपी पार्टी के 3 विधायकों को मिलाकर भी राजद से कम यानी 77 पर सिमटी है। ऐसे में आंकड़ों का गणित भी हर हाल में नीतीश के पक्ष में है।
महागठबंधन का सबसे बड़ा बड़ा हिस्सा राजद के तेजस्वी यादव भले चाचा नीतीश के प्रति नरम रुख रख रहे हों लेकिन अपनी शर्तों और भरोसे को लेकर वह मझधार में हैं। उनका भरोसा भी डगमग है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या उपमुख्यमंत्री का पद पाकर तेजस्वी संतुष्ट हो जाएंगे।
क्या तेजस्वी नीतीश को केंद्र और खासकर पीएम मैटिरियल बता कर अपने लिए सीएम की कुर्सी पाना पसंद नहीं करेंगे। नीतीश के सामने यह भी चुनौती होगी कि तेजस्वी से हाथ मिलाकर दागदार दामन के बीच वह खुद को कितना बेदाग रख पाएंगे। केंद्रीय एजेंसियों द्वारा दागियों पर शिकंजा कस कर नीतीश पर नकेल का डर तो बना ही रहेगा।
मंगल को मंगल की आस
राजनीतिक गलियारे में यह तय माना जा रहा है कि गठबंधन अब टूट जाएगा। मंगलवार को नीतीश ने जदयू की तो राजद ने अपने विधायकों-सांसदों की बैठक बुला रखी है। इसके बाद नई खिचड़ी पकने के संकेत मिल रहे हैं। महागठबंधन सरकार के आसार हैं। हालांकि, सियासी पंडित यह भी मानते हैं कि जदयू की बैठक में नीतीश को एक बार फिर पार्टी का न केवल सर्वेसर्वा बल्कि मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम में बिहार हित में फैसला लेने को अधिकृत कर दिया जाएगा।
दरअसल, नीतीश यह भी टटोल लेना चाहते हैं कि आरसीपी या उनके पीछे उनकी पार्टी के कौन और कितने लोग हैं, जिनसे भविष्य में सेंधमारी का खतरा है। यह तय है कि आरसीपी के साथ जदयू का शायद ही कोई विधायक नजर आए और नीतीश की मंगलवार को बुलाई गई बैठक से कोई ओझल रहे।
आरसीपी खुद जमीन से जुड़े मामलों में घिर गए हैं, ऐसे में मंगलवार को आरसीपी पर भी नजरें टिकी रहेंगी कि सियासी घटनाक्रम के बीच आरसीपी क्या गुल खिलाते हैं।
बहरहाल, पाला बदल की पटकथा के बीच सियासी सस्पेंस और क्लाइमेक्स बाकी है। सभी की नजरें अब इस पर टिकी हैं।
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