अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 2022
- फोटो : Istock
भारत का दुर्भाग्य है कि हमारे यहां लोग मातृभाषा में बात करने से कतराते हैं। कोई अगर अपनी मातृभाषा में बात करता है तो उसे गंवारु मान लिया जाता है, उसके कौशल को कम करके आंका जाता है। अंग्रेजी मानसिकता ने भाषा को सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़ लिया है। अगर हम अपनी मातृभाषाओं को बढ़ावा नहीं देंगे तो भाषाई विविधता स्वयं ही समाप्त हो जाएगी।
शिक्षा के क्षेत्र की चुनौतियां
भारत जैसे देश में करोड़ों विद्यार्थियों की मातृभाषा और पढाई की भाषा समान नहीं होने के कारण शिक्षा अक्सर चुनौतीपूर्ण बन जाती है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति और सतत विकास लक्ष्य, दोनों का उद्देश्य सबके लिए उत्तम शिक्षा और आजीवन सीखने की सुविधा देना है। मातृभाषा आधारित बहुभाषी शिक्षा से ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं एसडीजी को प्राप्त प्राप्त किया जा सकता है। इसके लिए आवश्यक है कि बच्चे की प्रारंभिक शिक्षा मातृभाषा में दी जाए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में यह प्रावधान किया गया है। प्राथमिक शिक्षा के साथ, अदालत की कार्यवाही और उनसे जुड़े फैसलों में स्थानीय भाषाओं के उपयोग की भी आवश्यकता है। उच्च और तकनीकी शिक्षा में स्वदेशी भाषाओं के उपयोग में धीरे-धीरे बढ़ोतरी भी इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मध्य प्रदेश सरकार ने जनवरी 2022 में राज्य में मेडिकल, इंजीनियरिंग की पढ़ाई हिंदी माध्यम से करवाने का भी फैसला लिया है।
इसके साथ ही हर किसी को अपने घरों में मातृ भाषा के उपयोग पर गर्व करना चाहिए और प्राथमिकता देनी चाहिए। मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में मातृभाषाओं में पढ़ाई की शुरुआत हो रही है। बहुभाषी समाज के लिए सरकार ने भी राष्ट्रीय अनुवाद मिशन, भारतवाणी परियोजना जैसी योजनाएं बनाई हैं। एक भारतीय भाषा विश्वविद्यालय और भारतीय अनुवाद और व्याख्या संस्थान की स्थापना भी सराहनीय कदम है।
मातृभाषा गौरव का परिचायक है। इस गौरव का भान तभी हो सकता है जब मातृभाषा में शिक्षा, संचार, नौकरी सुगम हो। भाषा का महत्व न सिर्फ राष्ट्रीय एकता में बल्कि देश की संस्कृति की मजबूती में निहित होता है। मातृभाषाएं हमारी सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान एवं हमारे सामूहिक ज्ञान और बुद्धिमत्ता का भंडार हैं। निरंतर उपयोग से ही भाषाएं समृद्ध होती हैं और हर दिन एक मातृभाषा दिवस होना चाहिए। एक दिन मनाने से भाषाओं को संरक्षित एवं जीवंत नहीं बनाया जा सकता है। घरों में बातचीत में शामिल कर ही इसे प्रशासन, तकनीकी क्षेत्रों तक पहुंचाया जा सकता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।