पैसा बचाना अच्छी आदत है। लेकिन, अगर इस आदत को आप निवेश के रूप में बदल दें तो यह सोने पर सुहागा हो सकता है। निवेश करके आप और ज्यादा पैसा बना सकते हैं, जबकि बचत पैसे को बढ़ा नहीं सकता है। ऐसे में छोटी अवधि से लंबे समय तक के लिए निवेश की रणनीति तैयार करें।
हम सभी को छोटी उम्र से ही अच्छी आदतें अपनाने की शिक्षा दी जाती है। लेकिन, जीवन मूल्य सिखाने के अलावा हम बच्चों को पैसे बचाने के साथ उससे संबंधित जानकारियां देना भूल जाते हैं। हालांकि, बचत करना अब कोई अच्छा विचार नहीं है, खासकर जब हम सभी क्षेत्रों में बढ़ती महंगाई का सामना कर रहे हैं। यहीं पर बच्चों में पैसे से जुड़ी कुछ अच्छी आदतें डालना महत्वपूर्ण हो जाता है। लगातार बढ़ रही महंगाई के इस दौर में धन बनाने के लिए बचत से आगे बढ़ना होगा और निवेश की आदत डालनी होगी।
बचत नहीं करने के कई बहाने
हम सबके पास बचत नहीं करने के कई बहाने होते हैं। जैसे... शुरुआत करने के लिए बहुत पैसे की जरूरत होती है। इसे आप किसी और दिन के लिए टाल देते हैं। इस देरी से आपके वित्तीय लक्ष्यों की समय पर प्राप्ति और उसे पूरा करने के लिए संघर्ष करने के बीच ज्यादा अंतर हो सकता है। ऐसे में सबसे सुविधाजनक और आसान निवेश है...म्यूचुअल फंड। यह जोखिम और निवेश जैसे कारकों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न परिसंपत्ति वर्गों में निवेश करता है। मैं वेतनभोगी लोगों के लिए म्यूचुअल फंड में एसआईपी के जरिये निवेश का समर्थक रहा हूं। निवेश क्षमता के आधार पर हर माह 500 से इसकी शुरुआत कर सकते हैं। इसमें चुनने के लिए कई प्रकार के फंड हैं। फंड मैनेजर इन्हें प्रबंधित करते हैं।
35 साल में 5,000 बन गया 3.24 करोड़
एसआईपी में नियमित निवेश अजूबे की तरह काम करता है। आपको इसके लिए छोटी उम्र से ही नियमित निवेश की आदत डालनी होगी। इसे उदाहरण से समझें। मान लीजिए, एक निवेशक ने 25 साल की उम्र से एसआईपी की शुरुआत की। वह 5,000 रुपये मासिक निवेश कर रहा है। रिटर्न सालाना 12 फीसदी है। निवेशक जब 60 साल की उम्र का होगा तो उनके पास 3.24 करोड़ रुपये होंगे, जबकि 35 साल में निवेश सिर्फ 21 लाख ही है।
5 साल की देरी...1.48 करोड़ का चपत
अब एक दूसरे निवेशक की बात करते हैं, जिन्होंने 30 साल की उम्र से 5,000 रुपये मासिक निवेश किया। इस निवेश पर भी 12 फीसदी का रिटर्न मान लें तो 30 साल में उनके निवेश का कुल मूल्य 1.76 करोड़ होगा। हालांकि, इस निवेशक ने पहले वाले निवेशक से 5 साल में सिर्फ तीन लाख रुपये ही कम निवेश किया है। लेकिन, उनके निवेश मूल्य में 1.48 करोड़ रुपये की कमी आई है। यह चक्रवृद्धि ब्याज का असर है। इसलिए, जब आप देरी से निवेश की शुरुआत करेंगे तो इसका असर आप पर भी हो सकता है।
अच्छी आदत लंबे समय में देती है लाभ
इस उदाहरण से पता चलता है कि एक अच्छी आदत लंबे समय में कैसे लाभ देती है। मान लीजिए, निवेशक ए 25 साल की उम्र से एसआईपी में 5,000 का निवेश शुरू करता है, लेकिन 50 साल की उम्र में निवेश करना बंद कर देता है। निवेशक बी 35 साल की उम्र से एसआईपी में 10,000 का निवेश 60 साल की उम्र तक करता है। दोगुनी राशि व समान वर्षों के लिए निवेश के बावजूद 60 साल की उम्र में दोनों को अलग-अलग रकम मिलती है। वास्तव में निवेशक ए, निवेशक बी से एक करोड़ रुपये से अधिक कमाता है।
देरी से निवेश शुरू करने के नुकसान
निवेशक ए निवेशक बी
निवेश की शुरुआत 25 साल 30 साल
मासिक एसआईपी 5,000 रुपये 10,000 रुपये
वर्ष 35 साल 30 साल
रिटर्न 12 फीसदी 12 फीसदी
कुल निवेश 21 लाख 18 लाख
निवेश का मूल्य 3.24 करोड़ 1.76 करोड़
ऐसे समझें...चक्रवृद्धि ब्याज की ताकत
निवेशक ए निवेशक बी
निवेश की शुरुआत 25 साल 35 साल
मासिक एसआईपी 5,000 रुपये 10,000 रुपये
निवेश अवधि 25 साल 25 साल
रिटर्न 12 फीसदी 12 फीसदी
कुल निवेश 15 लाख 30 लाख
निवेश का मूल्य 2.95 करोड़ 1.89 करोड़