स्वीडन स्थित रेस्टोरेंट
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ऐसा हो भी क्यों नहीं, भारतीय शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह के व्यंजनों की यूरोपीय बाजार में अलग पहचान है। यहां के बाजारों में इंडियन मसालों और चाय के दीवाने बढ़ रहे हैं। वहीं भारतीय चपाती, पीली दाल, पालक पनीर, मटर पनीर, बटर चिकन, गाजर का हलवा, गुलाब जामुन, बेसन के लड्डू, डोसा सांबर जैसे कई व्यंजनों की पहचान गहरी हो रही है।
यहां भारतीय रेस्तरां के सफल कारोबार का एक दूसरा पहलू भी है। पाकिस्तान की छवि कट्टरता, आतंकवाद और हिंसा की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिगड़ी हुई है। जबकि हिंदुस्तानियों के सरल स्वभाव और दोस्ताना व्यवहार यूरोपियों को खूब लुभाता है। इसलिए भारत से जोड़ने वाली जगहों पर जाना उन्हें पसंद है।
इंडियन रेस्तरां के खान पान को यहां के लोग भारतीय संस्कृति व परंपरा से जोड़कर देखते हैं। एक पुराने पाकिस्तानी कारोबारी कहते हैं कि गलत राजनीति और नकारात्मक छवि की वजह से उनलोगों को नुकसान झेलना पड़ता है। पाकिस्तानी खाने की चर्चा कम और दूसरे मुद्दों पर चर्चा ज्यादा होती है।
हालांकि उनका यह भी मानना है कि एक बार देश से निकलने के बाद विदेशी धरती पर भारत-पाक भाई-भाई जैसे हैं। इन दोनों देशों के लोगों के बीच अपनापन और प्यार अटूट हैं। यहां इस बात से फर्क नहीं पड़ता की मुल्क में क्या बयानबाजी हो रही है। लेकिन कारोबार तो प्रभावित होता ही है।