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स्वीडन: स्वाद की जंग में भारत से हारा पाकिस्तान

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स्वीडन स्थित रेस्टोरेंट - फोटो : अमर उजाला
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स्वाद की जंग में भारत ने पाकिस्तान को हरा दिया है। विदेशी जमीं पर दोनों देशों के लजीज पकवानों की बात चलती है तो जीत हमेशा भारत की होती है। ऐसा सिर्फ कहने के लिए नहीं है बल्कि स्वीडन के बाजारों में इसका पूरा असर दिखता है। यहां के दर्जनों भारतीय रेस्तरां देशी-विदेशी ग्राहकों से खचाखच भरे हुए दिख जाएंगे। लेकिन पाकिस्तान समेत दूसरे दक्षिण एशियाई देशों के नाम पर चलने वाले रेस्तराओं का हाल ऐसा नहीं है।

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हालांकि हिंदुस्तानियों के साथ-साथ पाकिस्तानी और बांग्लादेशियों की संख्या भी यहां बढ़ रही है। लेकिन कोई भी नामी रेस्तरां इन देशों के नाम पर नहीं चलता। इन देशों के रेस्तरां कारोबारी भी अपने देश के नाम पर यहां कारोबार नहीं चलाना चाहते हैं। वे भारतीय रेस्तरां (Indian restaurant) के नाम पर कारोबार को आगे बढ़ा रहे हैं।

वे यह मानते हैं कि उनके रेस्तरां के नाम में इंडियन शब्द जोड़ना कारोबार को सफल बनाने की सीढ़ी है। क्योंकि बात जब दक्षिण एशियाई स्वाद की हो तो पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल , भूटान या अफगानी व्यंजनों के नाम पर खाने वालों की संख्या कभी भी उतनी नहीं हो सकती जितना अकेले हिंदुस्तान के नाम पर लोगों को खींचा जा सकता है। इनके रेस्तरांओं के नाम भी भारतीय हैं।
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मसलन शांति, मुंबई ड्रीम्स, महारानी, इंडियन कीचन। अब नाम तो है मुंबई ड्रीम्स इंडियन रेस्टोरेंट, लेकिन इसे सालों से चलाने वाले हैं बांग्लादेशी। इसी तरह महारानी और चिली मसाला जैसे भारतीय रेस्तरां के मालिक अफगानी और पाकिस्तानी हैं। एक भारतीय रेस्तरां के बांग्लादेशी मालिक कहते हैं कि हिंदुस्तान के हरेक राज्य के खाने का अपना एक स्वाद है। शहरों के नाम से जुड़े व्यंजनों की अपनी एक कहानी है। जिसका मुकाबला पड़ोसी देश नहीं कर सकते और उन्हें ऐसा कहने ये कोई गुरेज नहीं है।

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स्वीडन स्थित रेस्टोरेंट - फोटो : अमर उजाला
ऐसा हो भी क्यों नहीं, भारतीय शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह के व्यंजनों की यूरोपीय बाजार में अलग पहचान है। यहां के बाजारों में इंडियन मसालों और चाय के दीवाने बढ़ रहे हैं। वहीं भारतीय चपाती, पीली दाल, पालक पनीर, मटर पनीर, बटर चिकन, गाजर का हलवा, गुलाब जामुन, बेसन के लड्डू, डोसा सांबर जैसे कई व्यंजनों की पहचान गहरी हो रही है।  

यहां भारतीय रेस्तरां के सफल कारोबार का एक दूसरा पहलू भी है। पाकिस्तान की छवि कट्टरता, आतंकवाद और हिंसा की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिगड़ी हुई है। जबकि हिंदुस्तानियों के सरल स्वभाव और दोस्ताना व्यवहार यूरोपियों को खूब लुभाता है। इसलिए भारत से जोड़ने वाली जगहों पर जाना उन्हें पसंद है।

इंडियन रेस्तरां के खान पान को यहां के लोग भारतीय संस्कृति व परंपरा से जोड़कर देखते हैं। एक पुराने पाकिस्तानी कारोबारी कहते हैं कि गलत राजनीति और नकारात्मक छवि की वजह से उनलोगों को नुकसान झेलना पड़ता है। पाकिस्तानी खाने की चर्चा कम और दूसरे मुद्दों पर चर्चा ज्यादा होती है।

हालांकि उनका यह भी मानना है कि एक बार देश से निकलने के बाद विदेशी धरती पर भारत-पाक भाई-भाई जैसे हैं। इन दोनों देशों के लोगों के बीच अपनापन और प्यार अटूट हैं। यहां इस बात से फर्क नहीं पड़ता की मुल्क में क्या बयानबाजी हो रही है। लेकिन कारोबार तो प्रभावित होता ही है।
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