ईशान किशन को क्यों मौका नहीं मिल रहा है? इसका कोई भी स्पष्ट जवाब बीसीसीआई की तरफ से नहीं दिया जाता।
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फर्स्ट क्लास क्रिकेट में अब तक सूर्यकुमार ने 5549 और आईपीएल समेत घरेलू टी-20 मैचों में 5801 रन बनाए हैं, लेकिन बेहद आश्चर्य की बात है कि इस होनहार क्रिकेटर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आने में लंबा समय लग गया।
आज भी वह केवल टी-20 और वनडे क्रिकेट में मौका पा रहे हैं। अच्छी पारियां खेलने के बाद भी सूर्यकुमार यादव को टीम में उचित मौका नहीं मिल रहा और बीसीसीआई की इस बात को लेकर घोर आलोचना भी हो रही है।
सूर्यकुमार यादव ने एक इंटरव्यू में मजाकिया लहजे में कहा था कि मैं तो हर पोजीशन पर बैटिंग करने के लिए तैयार हूं, बस मुझे टीम में शामिल कर लिया जाए। वह मजाक में भले कह रहे थे, लेकिन उनका दर्द साफ झलक रहा था।
ऐसा ही एक और नाम ईशान किशन का है। ईशान किशन ने पिछले दिनों बांग्लादेश में वनडे मैच में डबल सेंचुरी लगाई और देश में हीरो बन गए, लेकिन बांग्लादेश से लौटे और प्लेइंग इलेवन में शामिल होने के लिए जूझ रहे हैं। ईशान किशन को क्यों मौका नहीं मिल रहा है? इसका कोई भी स्पष्ट जवाब बीसीसीआई की तरफ से नहीं दिया जाता।
प्लेइंग इलेवन की राह मुश्किलों भरी
पृथ्वी शॉ, ईशान किशन और सूर्यकुमार यादव के अलावा कई और खिलाड़ी हैं, जो बीसीसीआई की उपेक्षा का शिकार रहे हैं। टीम इंडिया की प्लेइंग इलेवन में आने लिए उन्हें लंबा संघर्ष करना पड़ा है। जैसे दिनेश कार्तिक, उन्हें वह मौके नहीं मिले, जिसके वो हकदार थे। कुलदीप यादव का टीम में आना-जाना लगा हुआ है, जबकि उनकी परफॉर्मेंस काफी अच्छी रही है। प्रतिभावान स्पिनर रवि विश्नोई को थोड़ा सा मौका मिला और फिर उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया।
संजू सैमसन एक ऐसा ही नाम हैं, जिन्हें प्रतिभा का पावरहाउस कहा जा सकता है, लेकिन वो टीम में आने के लिए छटपटाते रहते हैं। पिछले दिनों युवा तेज गेंदबाज शिवम मावी को खिलाया गया। उन्होंने अच्छा परफॉर्म किया और फिर वह टीम के बाहर बैठ गए। शिवम मावी ने मैच के बाद कहा था कि छह साल के लंबे इंतजार के बाद उन्हें टीम में मौका मिला। अब आगे उन्हें क्यों नहीं खिलाया गया, यह समझ से परे है।
किस आधार पर होता है सिलेक्शन?
सिलेक्शन का क्या प्रोसेस है? इस पर बीसीसीआई करीब-करीब मौन रहती है। कभी यह नहीं बताया जाता कि खिलाड़ियों के सिलेक्शन का आखिर पैमाना क्या है? लेकिन, कुछ खिलाड़ी ऐसे भी हैं, जिन्हें टीम में लगातार मौके मिल रहे हैं। इनमें के.एल. राहुल का नाम सर्वाधिक लिया जा रहा है। इसमें दो राय नहीं है कि के.एल. राहुल एक प्रतिभावान खिलाड़ी हैं, लेकिन उनका बल्ला खामोश ही चल रहा है। यदि उनकी पिछली 10 पारियों को देखा जाए तो वह कोई मैच विनिंग पारी नहीं खेल पाए हैं। अधिकांश मैचों में उनका प्रदर्शन साधारण रहा है। जब भी टीम को जरूरत होती है तो वह सस्ते में आउट होकर चले आते हैं।
क्रिकेट भारत का नंबर वन खेल है, इसमें सरकारी दखल भी नहीं है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड एक स्वतंत्र इकाई की भांति काम करता है। क्रिकेट प्रेमियों को यह हक है कि वो बीसीसीआई के निर्णयों पर सवाल उठाएं, आखिरकार वहीं तो हैं, जिनके चलते बीसीसीआई क्रिकेट की दुनिया पर राज कर रहा है।
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