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बीसीसीआई : प्रतिभावान खिलाड़ियों के साथ अन्याय क्यों?

सार

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के सिलेक्शन प्रोसेस पर एक बार फिर सवाल खड़े किए जाने लगे हैं। बीसीसीआई के सेलेक्टर्स पिछले कुछ समय से आलोचकों के निशाने पर रहे हैं, क्योंकि अच्छा प्रदर्शन कर रहे खिलाड़ियों को सेलेक्टर्स प्लेइंग इलेवन से बाहर बैठा रहे हैं, जबकि कुछ खिलाड़ी ऐसे हैं, जिन्हें बार-बार मौका मिल रहा है।
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बीसीसीआई के सेलेक्टर्स पिछले कुछ समय से आलोचकों के निशाने पर रहे हैं - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के सिलेक्शन प्रोसेस पर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं। बीसीसीआई के सेलेक्टर्स पिछले कुछ समय से आलोचकों के निशाने पर रहे हैं, क्योंकि अच्छा प्रदर्शन कर रहे खिलाड़ियों को सेलेक्टर्स प्लेइंग इलेवन से बाहर बैठा रहे हैं, जबकि कुछ खिलाड़ी ऐसे हैं, जिन्हें बार-बार मौका मिल रहा है।

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सोशल मीडिया पर भी सवाल उठाए जाने लगे हैं कि पृथ्वी शॉ, सूर्यकुमार यादव, ईशान किशन जैसे खिलाड़ियों को कब तक अपने आप को साबित करना पड़ेगा? उन्हें वह मौके क्यों नहीं मिल रहे हैं, जिसके वे हकदार हैं, जबकि के.एल. राहुल जैसे खिलाड़ियों को बार-बार टीम में खिलाया जा रहा है।

पृथ्वी शॉ का रणजी में जबरदस्त प्रदर्शन

सबसे पहले पृथ्वी शॉ की बात करते हैं। अंडर-19 में भारत को वर्ल्ड कप जिताने वाले पृथ्वी शॉ को एक समय सचिन तेंदुलकर का विकल्प बताया गया था। बेहद कम उम्र में उन्होंने कई कीर्तिमान स्थापित किए। यहां तक सचिन तेंदुलकर ने स्वयं उन्हें अपने घर पर आमंत्रित किया था।

पृथ्वी शॉ को कुछ समय टीम इंडिया में मौका भी मिला और उनका परफॉर्मेंस ठीक-ठाक रहा। 5 टेस्ट में पृथ्वी शॉ ने दो अर्द्धशतक और एक शतक लगाया। शॉ को केवल 6 वनडे और एक टी-20 मैच में मौका दिया गया। इस प्रतिभावान खिलाड़ी को बीसीसीआई ने तब से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से करीब-करीब दूर रखा है, जबकि उनका घरेलू मैदानों में रिकॉर्ड  बेहतरीन है।

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फर्स्ट क्लास क्रिकेट के 40 मैचों में पृथ्वी 3244 रन बना चुके हैं। आईपीएल समेत दूसरे घरेलू टी-20 के 92 मुकाबलों में उन्होंने 2401 रन बनाए हैं और वह बेहद आक्रमक खिलाड़ी के रूप में जाने जाते हैं। 
अभी पृथ्वी ने एक और कीर्तिमान रणजी ट्रॉफी में अपने नाम कर लिया है। असम के खिलाफ उन्होंने 383 रनों की पारी खेली, यह रणजी का अब तक का दूसरा सर्वाधिक स्कोर है। करीब 74 साल पहले 1948 में महाराष्ट्र की ओर से ही खेलते हुए भाऊसाहेब निंबलकर ने रणजी की एक पारी में 443 रन बनाए थे।

पृथ्वी रणजी की एक पारी में 350 रन बनाने वाले नौवें खिलाड़ी बन गए हैं। लेकिन, जब टीम में सिलेक्शन की बात आती है तो पृथ्वी न वनडे में दिखते हैं, न टेस्ट में और न ही टी-20 में। यह प्रतिभावान खिलाड़ी केवल घरेलू क्रिकेट खेलकर अपना काम चला रहा है।

रणजी में ऐतिहासिक पारी खेलने के बाद पृथ्वी का दर्द छलका। उन्होंने कहा कि दो साल से उन्हें टीम इंडिया में शामिल नहीं किया गया है। जो लोग आपको जानते भी नहीं हैं, वो आपको आंकते हैं।

अच्छे खेल के बाद भी सूर्यकुमार टीम से बाहर

सूर्यकुमार यादव से तो कौन परिचित नहीं है। उनकी धमाकेदार पारियों के केवल भारतीय क्रिकेट प्रेमी ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के क्रिकेट प्रेमी कायल हैं, पर जो स्थान सूर्यकुमार यादव को टीम में मिलना चाहिए, वह कहीं नदारद है। श्रीलंका के खिलाफ टी-20 मैच में उन्होंने शतक लगाया, लेकिन श्रीलंका के विरुद्ध पहले वनडे में बाहर बैठा दिया गया। यह पहला मौका नहीं है, जब उनके साथ ऐसा हुआ है।

सूर्यकुमार के रिकॉर्ड्स पर नजर डालें तो पाएंगे कि वह पहले ऐसे गैर ओपनर बल्लेबाज हैं, जिन्होंने टी-20 क्रिकेट में 3 शतक लगाए हैं। छक्के लगाने में तो उनका गजब का रिकॉर्ड है। उन्होंने टी-20 इंटरनेशनल में 860 गेंदों का सामना किया है और हर 9.5वीं गेंद पर एक छक्का लगाया है। वो घरेलू टी-20 में 235 और टी-20 इंटरनेशनल में 92 छक्के लगा चुके हैं। 


 

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ईशान किशन को क्यों मौका नहीं मिल रहा है? इसका कोई भी स्पष्ट जवाब बीसीसीआई की तरफ से नहीं दिया जाता। - फोटो : सोशल मीडिया
फर्स्ट क्लास क्रिकेट में अब तक सूर्यकुमार ने 5549 और आईपीएल समेत घरेलू टी-20 मैचों में 5801 रन बनाए हैं, लेकिन बेहद आश्चर्य की बात है कि इस होनहार क्रिकेटर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आने में लंबा समय लग गया।

आज भी वह केवल टी-20 और वनडे क्रिकेट में मौका पा रहे हैं। अच्छी पारियां खेलने के बाद भी सूर्यकुमार यादव को टीम में उचित मौका नहीं मिल रहा और बीसीसीआई की इस बात को लेकर घोर आलोचना भी हो रही है।
सूर्यकुमार यादव ने एक इंटरव्यू में मजाकिया लहजे में कहा था कि मैं तो हर पोजीशन पर बैटिंग करने के लिए तैयार हूं, बस मुझे टीम में शामिल कर लिया जाए। वह मजाक में भले कह रहे थे, लेकिन उनका दर्द साफ झलक रहा था।

ऐसा ही एक और नाम ईशान किशन का है। ईशान किशन ने पिछले दिनों बांग्लादेश में वनडे मैच में डबल सेंचुरी लगाई और देश में हीरो बन गए, लेकिन बांग्लादेश से लौटे और प्लेइंग इलेवन में शामिल होने के लिए जूझ रहे हैं। ईशान किशन को क्यों मौका नहीं मिल रहा है? इसका कोई भी स्पष्ट जवाब बीसीसीआई की तरफ से नहीं दिया जाता। 

प्लेइंग इलेवन की राह मुश्किलों भरी

पृथ्वी शॉ, ईशान किशन और सूर्यकुमार यादव के अलावा कई और खिलाड़ी हैं, जो बीसीसीआई की उपेक्षा का शिकार रहे हैं। टीम इंडिया की प्लेइंग इलेवन में आने लिए उन्हें लंबा संघर्ष करना पड़ा है। जैसे दिनेश कार्तिक, उन्हें वह मौके नहीं मिले, जिसके वो हकदार थे। कुलदीप यादव का टीम में आना-जाना लगा हुआ है, जबकि उनकी परफॉर्मेंस काफी अच्छी रही है। प्रतिभावान स्पिनर रवि विश्नोई को थोड़ा सा मौका मिला और फिर उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया।

संजू सैमसन एक ऐसा ही नाम हैं, जिन्हें प्रतिभा का पावरहाउस कहा जा सकता है, लेकिन वो टीम में आने के लिए छटपटाते रहते हैं। पिछले दिनों युवा तेज गेंदबाज शिवम मावी को खिलाया गया। उन्होंने अच्छा परफॉर्म किया और फिर वह टीम के बाहर बैठ गए। शिवम मावी ने मैच के बाद कहा था कि छह साल के लंबे इंतजार के बाद उन्हें टीम में मौका मिला। अब आगे उन्हें क्यों नहीं खिलाया गया, यह समझ से परे है।

किस आधार पर होता है सिलेक्शन?

सिलेक्शन का क्या प्रोसेस है? इस पर बीसीसीआई करीब-करीब मौन रहती है। कभी यह नहीं बताया जाता कि खिलाड़ियों के सिलेक्शन का आखिर पैमाना क्या है? लेकिन, कुछ खिलाड़ी ऐसे भी हैं, जिन्हें टीम में लगातार मौके मिल रहे हैं। इनमें के.एल. राहुल का नाम सर्वाधिक लिया जा रहा है। इसमें दो राय नहीं है कि के.एल. राहुल एक प्रतिभावान खिलाड़ी हैं, लेकिन उनका बल्ला खामोश ही चल रहा है। यदि उनकी पिछली 10 पारियों को देखा जाए तो वह कोई मैच विनिंग पारी नहीं खेल पाए हैं। अधिकांश मैचों में उनका प्रदर्शन साधारण रहा है। जब भी टीम को जरूरत होती है तो वह सस्ते में आउट होकर चले आते हैं।
क्रिकेट भारत का नंबर वन खेल है, इसमें सरकारी दखल भी नहीं है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड एक स्वतंत्र इकाई की भांति काम करता है। क्रिकेट प्रेमियों को यह हक है कि वो बीसीसीआई के निर्णयों पर सवाल उठाएं, आखिरकार वहीं तो हैं, जिनके चलते बीसीसीआई क्रिकेट की दुनिया पर राज कर रहा है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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