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एयरफोर्स स्थापना दिवस विशेष: संपूर्ण स्वदेशीकरण के बिना मजबूत इंडियन एयरफोर्स का सपना अधूरा

सार

पिछले कुछ वर्षों में इंडियन एयरफोर्स के आधुनिकीकरण के प्रयास तेज हुए हैं, लेकिन देश की सबसे नवीनतम फोर्स का संपूर्ण स्वदेशीकरण, समय की मांग है। उसके बिना मजबूत एयरफोर्स का सपना अधूरा है।
 
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भारतीय वायु सेना - फोटो : Pintrest
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विस्तार
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26 फरवरी 2019 को इंडियन एयरफोर्स के मिराज-2000 लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर बालाकोट में बमबारी की थी। वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद यह पहला अवसर था, जब हमारी एयरफोर्स इंटरनेशनल बॉर्डर पार कर पाकिस्तान में घुसी, लेकिन अगले ही दिन पाकिस्तानी एयरफोर्स ने जवाबी हमला बोला था, जिसमें मिग-21 फाइटर प्लेन उड़ा रहे भारतीय पायलट अभिनंदन को पाकिस्तानी एयरफोर्स ने मार गिराया था।

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अभिनंदन अपने मिग-21 समेत पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में जाकर गिरे थे। पाकिस्तान के एफ-16 फाइटर जेट्स से मुकाबला करने के लिए हमारा मिग-21 बेहद पुराना विमान था। उस समय इंडियन एयरफोर्स को 'बियॉन्ड द रें'ज मिसाइल और अत्याधुनिक फाइटर जेट्स की कमी महसूस हुई थी।

पिछले कुछ वर्षों में इंडियन एयरफोर्स के आधुनिकीकरण के प्रयास तेज हुए हैं, लेकिन देश की सबसे नवीनतम फोर्स का संपूर्ण स्वदेशीकरण समय की मांग है। उसके बिना मजबूत एयरफोर्स का सपना अधूरा है।
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ब्रिटिश इंडिया के समय अंग्रेजों ने एयरफोर्स का 8 अक्तूबर 1932 को गठन किया था। मार्च 1945 में इसे रॉयल इंडियन एयरफोर्स का नाम दिया गया। वर्ष 1950 में इसे इंडियन एयरफोर्स कर दिया गया। इंडियन एयरफोर्स ने आजादी के बाद वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध को छोड़कर सभी कॉम्बैक्ट ऑपरेशन्स में भाग लिया है।

वर्ष 1962 में इंडियन एयरफोर्स का इस्तेमाल केवल ट्रांसपोटेशन के लिए हुआ था। भारत-पाकिस्तान का 1947-48, 1965, 1971 या 1999 का कारगिल युद्ध हो, इंडियन एयरफोर्स ने सभी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 1971 में पाकिस्तान के दो टुकड़े कर बांग्लादेश बनाने में इंडियन एयरफोर्स की अहम भूमिका थी। 


विमानों के इंजन के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता

विडंबना यह है कि हम आज अंतरिक्ष में रॉकेट भेजने में सक्षम हो गए हैं, लेकिन फाइटर जेट्स का इंजन बनाना सपना है। फाइटर जेट्स हों, हेलीकॉप्टर या मालवाहक विमान, हम पूरी तरह रूस, फ्रांस, अमेरिका जैसे देशों पर निर्भर हैं। स्वदेशी तेजस फाइटर जेट का प्रोग्राम हमने 1984 में शुरू किया था, लेकिन 30 साल बाद ही हम तेजस को इंडियन एयरफोर्स में शामिल कर सके।

पिछले दिनों मिग-21 को रिप्लेस करने के लिए इंडियन एयरफोर्स ने 100 तेजस का ऑर्डर दिया है। हालांकि, तेजस भी इंजन से लेकर कई उपकरणों को लेकर दूसरे देशों पर निर्भर है। 

वर्तमान में जहां तक इंडियन एयरफोर्स के लड़ाकू बेड़े की बात है तो राफेल, जो 4.5 जनरेशन का लड़ाकू विमान है, के अलावा सुखोई-30 एमकेआई, मिराज 2000, मिग-29, तेजस और मिग-21 इसमें शामिल हैं। फ्लाइंग कॉफिन के नाम से मशहूर बूढ़े मिग-21 को इंडियन एयरफोर्स सेवा से हटा रही है। सुखोई-30 एमकेआई, मिराज-2000 और मिग-29 भी पुराने हो चुके हैं। तेजस को रणभूमि में आजमाया जाना है।

एयरफोर्स: आत्मनिर्भर बनने की जरूरत

जिस तरह से चीन और पाकिस्तान से चुनौती मिल रही है, हमें इंडियन एयरफोर्स के उपकरणों को लेकर 100 प्रतिशत आत्मनिर्भर बनने की जरूरत है। जैसे हमने अंतरिक्ष में अपनी ताकत को बढ़ाया और रॉकेट के इंजन बनाए, वैसे ही हमें फाइटर जेट्स का स्वदेशी इंजन बनाने में कामयाबी हासिल करनी होगी।

इंडियन एयरफोर्स के लिए मिसाइल सिस्टम तैयार करने की जरूरत है। पिछले दिनों अस्त्र मिसाइल को राफेल में लगाने की बात कही गई। ऐसे प्रयास और भी होने चाहिए।

मिग-29, सुखोई-30 एमकेआई जैसे फाइटर जेट्स को हम रूस के सहयोग से भारत में बना रहे हैं, लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण तकनीकी सहयोग की कमी महसूस की गई। जिस तरह आज इजराइल युद्ध में फंसा है, यदि आज भारत को इजराइल से सैन्य सहयोग की जरूरत पड़े तो हमें निराशा होना पड़ेगा।

पिछले कुछ सालों में हमने फ्रांस से राफेल खरीदे हैं, जिन्हें भारत में बनाया भी जाएगा, लेकिन जब तक आधुनिक मशीनों का संपूर्ण स्वदेशीकरण नहीं होगा, तब तक हम एक कामयाब एयरफोर्स नहीं बन पाएंगे।

इंडियन एयरफोर्स अपना 91वां स्थापना दिवस मना रही है। हमें संकल्प लेना चाहिए कि जब हम इंडियन एयरफोर्स का 100वां स्थापना दिवस मनाएं तो परेड में विदेश नहीं, स्वदेशी मशीनें उड़ान भर रही हों।


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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): 
यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकताु, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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