26 फरवरी 2019 को इंडियन एयरफोर्स के मिराज-2000 लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर बालाकोट में बमबारी की थी। वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद यह पहला अवसर था, जब हमारी एयरफोर्स इंटरनेशनल बॉर्डर पार कर पाकिस्तान में घुसी, लेकिन अगले ही दिन पाकिस्तानी एयरफोर्स ने जवाबी हमला बोला था, जिसमें मिग-21 फाइटर प्लेन उड़ा रहे भारतीय पायलट अभिनंदन को पाकिस्तानी एयरफोर्स ने मार गिराया था।
विडंबना यह है कि हम आज अंतरिक्ष में रॉकेट भेजने में सक्षम हो गए हैं, लेकिन फाइटर जेट्स का इंजन बनाना सपना है। फाइटर जेट्स हों, हेलीकॉप्टर या मालवाहक विमान, हम पूरी तरह रूस, फ्रांस, अमेरिका जैसे देशों पर निर्भर हैं। स्वदेशी तेजस फाइटर जेट का प्रोग्राम हमने 1984 में शुरू किया था, लेकिन 30 साल बाद ही हम तेजस को इंडियन एयरफोर्स में शामिल कर सके।
पिछले दिनों मिग-21 को रिप्लेस करने के लिए इंडियन एयरफोर्स ने 100 तेजस का ऑर्डर दिया है। हालांकि, तेजस भी इंजन से लेकर कई उपकरणों को लेकर दूसरे देशों पर निर्भर है।
वर्तमान में जहां तक इंडियन एयरफोर्स के लड़ाकू बेड़े की बात है तो राफेल, जो 4.5 जनरेशन का लड़ाकू विमान है, के अलावा सुखोई-30 एमकेआई, मिराज 2000, मिग-29, तेजस और मिग-21 इसमें शामिल हैं। फ्लाइंग कॉफिन के नाम से मशहूर बूढ़े मिग-21 को इंडियन एयरफोर्स सेवा से हटा रही है। सुखोई-30 एमकेआई, मिराज-2000 और मिग-29 भी पुराने हो चुके हैं। तेजस को रणभूमि में आजमाया जाना है।
जिस तरह से चीन और पाकिस्तान से चुनौती मिल रही है, हमें इंडियन एयरफोर्स के उपकरणों को लेकर 100 प्रतिशत आत्मनिर्भर बनने की जरूरत है। जैसे हमने अंतरिक्ष में अपनी ताकत को बढ़ाया और रॉकेट के इंजन बनाए, वैसे ही हमें फाइटर जेट्स का स्वदेशी इंजन बनाने में कामयाबी हासिल करनी होगी।
इंडियन एयरफोर्स के लिए मिसाइल सिस्टम तैयार करने की जरूरत है। पिछले दिनों अस्त्र मिसाइल को राफेल में लगाने की बात कही गई। ऐसे प्रयास और भी होने चाहिए।
मिग-29, सुखोई-30 एमकेआई जैसे फाइटर जेट्स को हम रूस के सहयोग से भारत में बना रहे हैं, लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण तकनीकी सहयोग की कमी महसूस की गई। जिस तरह आज इजराइल युद्ध में फंसा है, यदि आज भारत को इजराइल से सैन्य सहयोग की जरूरत पड़े तो हमें निराशा होना पड़ेगा।
पिछले कुछ सालों में हमने फ्रांस से राफेल खरीदे हैं, जिन्हें भारत में बनाया भी जाएगा, लेकिन जब तक आधुनिक मशीनों का संपूर्ण स्वदेशीकरण नहीं होगा, तब तक हम एक कामयाब एयरफोर्स नहीं बन पाएंगे।
इंडियन एयरफोर्स अपना 91वां स्थापना दिवस मना रही है। हमें संकल्प लेना चाहिए कि जब हम इंडियन एयरफोर्स का 100वां स्थापना दिवस मनाएं तो परेड में विदेश नहीं, स्वदेशी मशीनें उड़ान भर रही हों।
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