जेन जी का शोर आप खूब सुन रहे हैं, लेकिन भारत की नई स्टार ये जेन जी कुछ अलग है। साल 2017 से अजेय ऑस्ट्रेलिया टीम को वूमन वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में धूल चटाने में शतकीय योगदान देने वाले भारतीय क्रिकेटर जेमिमा रॉड्रिग्ज की बात कुछ और ही है।
जब जेमिमा रॉड्रिग्ज बल्ला उठाती हैं तो लगता है मानो वह गेंद को नहीं, अपने भीतर के संदेहों को मार रही हों। उनके हर शॉट, हर मुस्कान और हर पारी में एक कहानी छिपी है। कहानी एक ऐसी लड़की की, जिसने पिता के सपनों को अपने पंख बना लिया, जो गिरती रही, पर हर बार उठी और मुस्कुराती रही।
जेमिमा का जन्म 5 सितंबर 2000 को मुंबई के भांडुप क्षेत्र में मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। पिता इवान रॉड्रिग्ज एक क्रिकेट कोच हैं। पिता ने ही जेमिमा को खेल की दुनिया में कदम रखना सिखाया। स्कूल में लड़कियों की क्रिकेट टीम नहीं थी तो पिता ने खुद टीम बनाई। वह हर सुबह जेमिमा को अभ्यास के लिए ले जाते।
पिता का स्पष्ट कहना था, “खेल सिर्फ जीतने के लिए नहीं, खुद को जानने के लिए खेलो।” जेमिमा ने क्रिकेट खेलना शुरू किया, जब वह मात्र 10 साल की थीं। मुंबई के लिए घरेलू क्रिकेट खेलते हुए उन्होंने अंडर-19 में अपनी पहचान बनाई।
साल 2017 में उन्होंने महाराष्ट्र के खिलाफ खेलते हुए 202 नाबाद रन बनाए। इस पारी ने सबका ध्यान खींचा और भारतीय महिला क्रिकेट में एक नया नाम दर्ज हो गया।
17 साल की उम्र में किया पदार्पण
मात्र 17 साल की उम्र में जेमिमा ने भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया। जेमिमा ने 13 फरवरी 2018 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी-20, 12 मार्च 2018 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे और 16 जून 2021 को इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट में डेब्यू किया। अपने आत्मविश्वास और शॉट चयन से उन्होंने सबका दिल जीत लिया। वूमन वर्ल्डकप के सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 127 नाबाद रन की जेमिमा की पारी यादगार रहेगी।
हर खिलाड़ी के जीवन में ठहराव आता है, लेकिन जेमिमा के लिए यह ठहराव एक परीक्षा थी। साल 2019-20 के दौरान उन्हें लगातार खराब प्रदर्शन के कारण टीम से बाहर कर दिया गया था। वह अवसाद, आलोचना और आत्म-संदेह के बीच झूलती रहीं।
अपने एक इंटरव्यू में जेमिमा का दर्द कुछ यूं झलका था, ऐसे दिन थे, जब मैं हर सुबह रोती थी, लगता था, सब खत्म हो गया है, लेकिन फिर याद आता था कि पापा ने कहा था, बेटा, गिरना भी प्रशिक्षण का हिस्सा है। इस संघर्ष ने जेमिमा को तोड़ा नहीं, बल्कि और मजबूत बनाया। उन्होंने अपने मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना शुरू किया, योग, संगीत और लेखन में सुकून ढूंढा।
आज जेमिमा खुलेआम कहती हैं कि मानसिक स्वास्थ्य पर बात करना कमजोरी नहीं, बल्कि जेन जेड की सबसे बड़ी ताकत है।
जेमिमा जेन जी पीढ़ी की सच्ची प्रतिनिधि हैं। वह मैदान पर जितनी गंभीर हैं, मैदान के बाहर उतनी ही खुशमिजाज और आधुनिक भी। मैदान पर उन्हें अक्सर डांस स्टेप्स करते देखा जाता है। इंस्टाग्राम पर उनके लाखों फॉलोअर्स हैं, जहां वह गिटार बजाती हैं, गाती हैं और प्रेरणादायक बातें साझा करती हैं। वह आधुनिकता और संस्कृति का ऐसा मेल हैं, जो यह दिखाता है कि नारीत्व, श्रद्धा और आत्मविश्वास एक साथ जीए जा सकते हैं।
जेमिमा रॉड्रिग्ज की कहानी केवल क्रिकेट की कहानी नहीं है। यह एक बेटी, एक खिलाड़ी, एक इंसान और एक पीढ़ी की कहानी है, जो असफलताओं से डरती नहीं, उनसे सीखती है।
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