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India General Election: पहले आम चुनाव के 25 में से 12 राज्य जो अब नहीं हैं

सार

1949 में, भोपाल राज्य का भारत संघ में विलय कर दिया गया और 1956 में भोपाल नवगठित राज्य मध्य प्रदेश का हिस्सा बन गया। इस राज्य में भी देश के पहले आम चुनाव हुये थे। 1951 तक, भोपाल राज्य में भोपाल शहर, बैरसिया, सीहोर, रायसेन, होशंगाबाद, इटारसी, नरसिंहगढ़, राजगढ़, विदिशा एवं सिरोंज आदि क्षेत्र थे।
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स्वतंत्रता से पूर्व भोपाल राज्य भारत में एक रियासत थी जो 1723 से 1949 तक अस्तित्व में थी। - फोटो : istock
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विस्तार
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गणतांत्रिक भारत का अट्ठारहवां आम चुनाव देश के 36 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में हो रहा है। जिनमें 29 पूर्ण राज्य और शेष केन्द्र शासित प्रदेश है। लेकिन कभी भारत का प्रशासनिक ढांचा थोड़ा सा भिन्न था। इसमें 10 पार्ट-ए, 8 पार्ट-बी, 9 पार्ट-सी और एक पार्ट-डी राज्य थे। इनमें से 12 राज्य अब वजूद में नहीं हैं।

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अजमेर जिसका राजस्थान में हुआ विलय

अजमेर राज्य कभी भारत का एक राज्य था जिसकी राजधानी अजमेर शहर थी। इसकी स्थापना 7वीं शताब्दी में हुई थी और इस पर चैहान वंश का शासन था। बाद में यह मुगल साम्राज्य और फिर मराठों के नियंत्रण में आ गया। 1947 में भारत को स्वतंत्रता मिलने के बाद, अजमेर राज्य भारत के संघ में शामिल हो गया। 1950 में यह राजस्थान राज्य का हिस्सा बन गया। यह राज्य 1951-52 के आम चुनाव में शामिल रहा।

भोपाल जो मध्य प्रदेश बना

स्वतंत्रता से पूर्व भोपाल राज्य भारत में एक रियासत थी जो 1723 से 1949 तक अस्तित्व में थी, जिसकी राजधानी भोपाल शहर थी। इसकी स्थापना एक अफगान कमांडर दोस्त मोहम्मद खान ने की थी और इस पर उनके वंश के वंशजों, भोपाल के नवाबों का शासन था। 1947 में, भारत के विभाजन के दौरान, रियासतों को भारत या पाकिस्तान में शामिल होने का विकल्प दिया गया था। उस समय भोपाल के नवाब हमीदुल्ला खान ने भारत में शामिल होने का फैसला किया
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1949 में, भोपाल राज्य का भारत संघ में विलय कर दिया गया और 1956 में भोपाल नवगठित राज्य मध्य प्रदेश का हिस्सा बन गया। इस राज्य में भी देश के पहले आम चुनाव हुये थे। 1951 तक, भोपाल राज्य में भोपाल शहर, बैरसिया, सीहोर, रायसेन, होशंगाबाद, इटारसी, नरसिंहगढ़, राजगढ़, विदिशा एवं सिरोंज आदि क्षेत्र थे।

बाम्बे के हिस्से विभिन्न राज्यों में मिले

बॉम्बे राज्य भारत का एक राज्य था, जो 1950 से 1960 तक अस्तित्व में रहा। इसका निर्माण बॉम्बे प्रेसीडेंसी के क्षेत्रों को पश्चिमी क्षेत्र की रियासतों के साथ विलय करके किया गया था। सन् 1957 तक बंबई राज्य कई परिवर्तनों से गुजरा। बॉम्बे राज्य का गठन 1 मई 1950 को राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 के तहत किया गया था, जिसने राज्यों को भाषाई आधार पर पुनर्गठित किया था। इस राज्य में पूर्व बॉम्बे प्रेसीडेंसी के क्षेत्र शामिल थे, जिसमें वर्तमान महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक के कुछ हिस्से शामिल थे।

कुर्ग भी राज्य था जो अब कर्नाटक का जिला है

इतिहासकारों के अलावा कुर्ग राज्य शायद ही भारतवासियों के मस्तिष्क में सलामत होगा। यह राज्य हिमाचल प्रदेश जैसे कुछ राज्यों की तरह भारत का एक पार्ट-सी राज्य था जो 1950 से 1956 तक अस्तित्व में था। जब 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ, तो अधिकांश मौजूदा प्रांतों को राज्यों में पुनर्गठित किया गया तो कूर्ग प्रांत कूर्ग राज्य बन गया।

कूर्ग राज्य पर एक मुख्य आयुक्त का शासन था और मरकारा इसकी राजधानी थी। राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के अनुसार 1 नवंबर 1956 को कूर्ग राज्य को समाप्त कर दिया गया और इसके क्षेत्र को मैसूर राज्य (बाद में 1973 में इसका नाम बदलकर कर्नाटक कर दिया गया) में मिला दिया गया। वर्तमान में, कूर्ग कर्नाटक राज्य का एक जिला है।

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मध्य भारत नाम से भी 1956 तक एक राज्य था। - फोटो : istock
हैदराबाद जो कभी पार्ट-बी राज्य था

हैदराबाद राज्य भी भारत में एक रियासत थी जो 1724 से 1948 तक अस्तित्व में थी। इस पर निजामों का शासन था। यह भारत की सबसे बड़ी रियासत थी और अपनी सांस्कृतिक और भाषाई विविधता के लिए जानी जाती थी। क्षेत्रफल के मामले में भारत की सबसे बड़ी रियासत थी। इसमें लगभग 214,190 वर्ग किलोमीटर (82,865 वर्ग मील) के क्षेत्र था।

यह भारतीय उपमहाद्वीप के दक्षिण-मध्य भाग में स्थित था। सन् 1956 के राज्य पुनर्गठन अधिनियम में भाषाई आधार पर राज्यों का पुनर्गठन हुआ तो हैदराबाद राज्य के तेलुगु भाषी हिस्सों को आंध्र प्रदेश बनाने के लिए आंध्र राज्य में मिला दिया गया, जबकि मराठी भाषी क्षेत्रों को बॉम्बे राज्य में मिला दिया गया, और कन्नड़ भाषी क्षेत्र मैसूर राज्य (अब कर्नाटक) का हिस्सा बन गए। राज्य के तौर पर यहां 1951 में अंतिम आम चुनाव हुआ था।

मध्य भारत जिसका मध्य प्रदेश में हुआ विलय

मध्य भारत नाम से भी 1956 तक एक राज्य था। जिसे मालवा संघ के नाम से भी जाना जाता था। यह पच्चीस रियासतों के विलय से 28 मई 1948 को बनाया गया था। संघ का क्षेत्रफल 120,380 वर्ग किमी था। ग्वालियर इसकी शीतकालीन और इंदौर ग्रीष्मकालीन राजधानी थी। इसकी सीमा दक्षिण -पश्चिम में बॉम्बे, उत्तर-पश्चिम में राजस्थान , उत्तर में उत्तर प्रदेश और पूर्व में विंध्य प्रदेश और दक्षिण-पूर्व में भोपाल राज्य और मध्य प्रदेश राज्यों से लगती थी। 1 नवंबर 1956 को, मध्य भारत, विंध्य प्रदेश और भोपाल राज्य के साथ मध्य प्रदेश में विलय कर दिया गया ।

मैसूर जो पुनर्गठन के बाद कर्नाटक बना

मैसूर रियासत ब्रिटिश भारत की तीन सबसे बड़ी रियासतों में से एक थी। 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद इसका विलय भारत संघ में 15 अगस्त 1947 को हुआ था। तत्कालीन मैसूर रियासत के क्षेत्रों को तब संघ के भीतर एक राज्य में पुनर्गठित किया गया था। 1956 में राज्यों के पुनर्गठन के बाद, मैसूर राज्य का विस्तार करके इसमें बॉम्बे प्रेसीडेंसी, मद्रास प्रेसीडेंसी और कूर्ग की रियासतों और हैदराबाद के कुछ हिस्सों को शामिल किया गया और 1973 में इसका नाम बदलकर कर्नाटक कर दिया गया। इस राज्य में 1967 तक आम चुनाव हुये।

मद्रास राज्य में हुये चार आम चुनाव

पूर्ववर्ती मद्रास राज्य, जिसे मद्रास प्रेसीडेंसी के नाम से भी जाना जाता है, इसकी स्थापना 1653 में हुई थी और यह भारत में सबसे लंबे समय तक रहने वाली ब्रिटिश औपनिवेशिक इकाइयों में से एक थी, जो 1947 तक चली। भारत को स्वतंत्रता मिलने के बाद, मद्रास राज्य 1956 तक अस्तित्व में रहा जब इसे भाषाई आधार पर पुनर्गठित किया गया।

यह भाषाई पहचान के आधार पर गठित होने वाले पहले राज्यों में से एक था, जिसकी प्राथमिक भाषा तमिल थी। 1956 में, राज्य पुनर्गठन अधिनियम के हिस्से के रूप में, मद्रास राज्य को आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल राज्यों के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के गठन के लिए पुनर्गठित किया गया, जिससे वर्तमान तमिलनाडु का निर्माण हुआ। मद्रास राज्य के नाम से इस क्षेत्र में 1951 से लेकर 1967 तक चार आम चुनाव हुये।

पंजाब से अलग प्रदेश था पेप्सू

पटियाला एवं पूर्वी पंजाब राज्य संघ (पेप्सू) अंग्रेजों के अधीन पंजाब का एक हिस्सा था, जो 1948 से 1956 तक भारत का एक प्रांत रहा। यह आठ जिलों पटियाला, जींद, नाभा, फरीदकोट, कलसिया, मलेरकोटला, कपूरथला और नालागढ़ से मिलकर बना था। पेप्सू राज्य के नाम से यहां 1951 के आम चुनाव के बाद 1954 में इसकी विधानसभा के चुनाव भी हुये।

सौराष्ट्र का बाम्बे राज्य में हुआ था विलय

सौराष्ट्र राज्य पश्चिमी भारत का एक राज्य था जो 1948 से 1956 तक अस्तित्व में रहा। इसका गठन सौराष्ट्र की पूर्व रियासतों से हुआ था, जो वर्तमान गुजरात राज्य में काठियावाड़ प्रायद्वीप पर स्थित थे। राजकोट सौराष्ट्र राज्य की राजधानी थी। 1956 के राज्य पुनर्गठन अधिनियम के बाद 1956 में राज्य का बॉम्बे राज्य में विलय कर दिया गया था। यह क्षेत्र 1960 में गुजरात के गठन के बाद इसका हिस्सा बन गया। सौराष्ट्र में आजादी के बाद 1951.52 में पहले और अंतिम आम चुनाव हुये थे।

1956 के पुनर्गठन में सौराष्ट्र भी केरल का हिस्सा बना

त्रावणकोर दक्षिणी भारत की एक प्रमुख रियासत थी जो 1729 से 1949 तक अस्तित्व में थी। यह वर्तमान केरल के दक्षिणी भाग और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में स्थित थी। त्रावणकोर की राजधानी तिरुवनंतपुरम (त्रिवेंद्रम) थी। राज्य पर त्रावणकोर शाही परिवार का शासन था जिसने 1947 में, त्रावणकोर का भारत संघ में किया। भारत की आजादी के बाद कोचीन और मालाबार के कुछ हिस्सों के साथ मिलकर त्रावणकोर-कोचीन राज्य बना। बाद में 1956 में इसे केरल राज्य बनाने के लिए मद्रास राज्य के मालाबार जिले में मिला दिया गया।

मध्य प्रदेश में विन्ध्य का भी हुआ था विलय

विंध्य प्रदेश मध्य भारत के एक राज्य के रूप में 1948 से 1956 तक अस्तित्व में रहा। इसका गठन विंध्य क्षेत्र में कई रियासतों के विलय से हुआ था। विंध्य प्रदेश की राजधानी रीवा थी। 1956 में, राज्य पुनर्गठन अधिनियम के के अनुरूप विंध्य प्रदेश को मध्य प्रदेश राज्य में मिला दिया गया था। यहां भी एक राज्य के रूप में 1951-52 में पहला और अंतिम आम चुनाव हुआ।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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