म्यांमार और बांग्लादेश भारत के गहरे मित्र देशों में शुमार हैं।
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ग़ौरतलब है कि इससे पूर्व चीन ने म्यांमार और बांग्लादेश के बीच रोहिंग्या मसले का समाधान निकालने के लिए न्यूयॉर्क में एक समझौता करा कर भारतीय विदेश नीति को बड़ा संकेत दिया था।
म्यांमार और बांग्लादेश भारत के गहरे मित्र देशों में शुमार हैं। लंबे समय तक इन देशों की अपेक्षा थी कि भारत एशिया की एक बड़ी ताक़त होने के नाते इसी तरह का कोई समझौता कराए। लेकिन भारतीय नीति विकलांगता के कारण यह न हो सका। भारत को इससे बड़ा कूटनीतिक झटका लगा था।
इससे पहले हिन्दुस्तान के गहरे मित्र और पड़ोसी नेपाल को चीन पहले ही अपने प्रभाव में ले चुका है। मालदीव और श्रीलंका भी चीन के चक्कर में उलझे हुए हैं। वे एक तरह से उसकी पकड़ में आ चुके थे, लेकिन इन देशों में सत्ता परिवर्तन ने भारत को राहत दी थी। मगर अब फिर चीन ने इन देशों की सरकारों के साथ रिश्ते सुधारने शुरू कर दिए हैं।
भारत के लिए यह बेहद सावधान रहने का समय है। भारतीय कूटनीति और विदेश नीति लंबे समय तक चीन की इन चालों के प्रति आंख मूंदें नहीं रह सकती।
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