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दूसरा पहलू: देश का पहला सौर ऊर्जा गांव, जो चलता है सूरज के साथ; गुजरात के मोढेरा की कहानी

Wed, 07 Jan 2026 07:29 AM IST
शुभम कुमार डॉ. दीपक कोहली

सार

लगभग छह हजार से अधिक आबादी वाले इस गांव में अब पारंपरिक बिजली ग्रिड पर निर्भरता लगभग समाप्त हो चुकी है। गुजरात का मोढेरा गांव देश का पहला ऐसा गांव बन चुका है, जो अपनी समस्त बिजली जरूरतों को सौर तकनीक से पूरा करता है।
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सौर उर्जा - फोटो : FreePik
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विस्तार
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दशकों तक गांवों में बिजली की अनियमित आपूर्ति, कटौती और कम वोल्टेज ने शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और छोटे व्यवसायों को सीमित रखा, पर अब तस्वीर बदल रही है। गुजरात का मोढेरा गांव इस बदलाव का सबसे ठोस उदाहरण बनकर सामने आया है, जहां बिजली व्यवस्था सौर ऊर्जा पर आधारित है और गांव चौबीसों घंटे उजाले में है। इस गांव की पहचान लंबे समय तक उसके ऐतिहासिक सूर्य मंदिर तक सीमित थी, लेकिन आज वह देश का पहला ऐसा गांव बन चुका है, जो अपनी बिजली जरूरत सौर तकनीक से पूरा करता है।

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करीब छह हजार से अधिक आबादी वाले इस गांव में अब बिजली ग्रिड पर निर्भरता लगभग समाप्त हो चुकी है। यहां कुल छह मेगावाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया गया है। पंद्रह मेगावाट-घंटा क्षमता की बैटरी स्टोरेज व्यवस्था की गई है, जिससे सूर्यास्त के बाद भी निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होती है।

मोढेरा में प्रतिदिन होता है हजारों यूनिट बिजली उत्पादन
मोढेरा में प्रतिदिन औसतन करीब छह हजार से साढ़े छह हजार यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है, जबकि गांव की कुल दैनिक खपत लगभग छह हजार यूनिट के आसपास है। गांव अपनी जरूरत पूरी करने के बाद अतिरिक्त बिजली राज्य ग्रिड को भी उपलब्ध करा रहा है। इससे यह गांव ऊर्जा आत्मनिर्भर होने के साथ ऊर्जा उत्पादक भी बन गया है। इस पूरी परियोजना पर लगभग अस्सी से नब्बे करोड़ रुपये का निवेश हुआ है।
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नियमित बिजली उपलब्ध होने से स्मार्ट उपकरणों का उपयोग शुरू हुआ, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार देखा जा रहा है। सौर ऊर्जा से चलने वाले पंपों की मदद से किसानों की सिंचाई लागत में भारी कमी आई है। लोग अब बिना बिजली कटौती की चिंता के अपना काम कर पा रहे हैं। इस व्यवस्था से कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आ रही है, जिससे वायु प्रदूषण भी कम हुआ है।

क्या है सरकार का लक्ष्य?
सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में सैकड़ों गांवों को इसी तरह सोलर-स्मार्ट बनाया जाए। 2030 तक भारत पांच सौ गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने की दिशा में काम कर रहा है, जिसमें सौर ऊर्जा की भूमिका सबसे अहम होगी। अगर मोढेरा जैसा मॉडल बिजली की कमी झेल रहे इलाकों में लागू होता है, तो इससे ऊर्जा संकट तो कम होगा ही, ग्रामीण पलायन पर भी रोक लगेगी। हालांकि, निवेश, बैटरी की लागत, रखरखाव व तकनीकी प्रशिक्षण जैसे मुद्दों पर काम करने की जरूरत है।

स्थानीय युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देकर परियोजना से जोड़े जाना भी जरूरी है, ताकि व्यवस्था लंबे समय तक टिकाऊ बनी रहे। सौर ऊर्जा से रोशन होता यह गांव भारत के भविष्य की उस तस्वीर को सामने लाता है, जिसमें विकास की रोशनी शहरों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि हर गांव की गली तक पहुंचती है।

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