फिलहाल फ़्रांस अमेरिका और जर्मनी के बाद ब्रिटेन को सर्वाधिक निर्यात करता है। उसका ब्रिटेन के साथ कारोबार क़रीब 22 बिलियन पौंड के आसपास है। उसके लाखों लोग ब्रिटेन में रहते हैं। आने वाले दिनों में यदि ब्रिटेन से कारोबारी झटका लगा तो उसे एक बड़े बाज़ार की ज़रूरत है। इन दिनों फ़्रांस के लिए भारत से बेहतर बाज़ार कोई दूसरा नहीं है। इसी कारण पिछले साल भारत और फ्रांस के बीच चौदह बड़े समझौते हुए थे। इनमें राफेल लड़ाकू विमानों से लेकर अनेक रक्षा उपकरणों तथा उत्पादन के क्षेत्र में दोनों देश गहरे साझीदार बन कर उभरे हैं।
फ्रांस का भारत में निवेश
महाराष्ट्र के जैतपुर में छह परमाणु रिएक्टर लगाना भी इसमें शामिल है। चीन की नौ सेना और हिन्द महासागर में उसकी आक्रामक हाज़िरी भारत और फ्रांस - दोनों के लिए चिंता का सबब है। दोनों देशों की नौ सेनाएं अलग-अलग हैं और कमज़ोर हैं। कहा जा सकता है कि भारत को रूस तो नहीं, लेकिन रूस जैसा सामरिक साझीदार मिल गया है।
सन् दो हज़ार से सत्रह साल तक फ़्रांस का भारत में पूंजी निवेश केवल 6 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। बीते तीन साल के दौरान बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। यह अब क़रीब क़रीब 12 बिलियन डॉलर हो गया है। इसमें फ़्रांस अपेक्षाकृत लाभ की स्थिति में है। अब भारत पर निर्भर है कि वह फ़्रांस के साथ इन रिश्तों को कितनी ऊंचाई तक ले जाता है। फ़्रांस तो तैयार बैठा है।
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