किताबों से झांकता विभाजन का दर्द
1967-1960 के बीच प्रकाशित महागाथात्मक ‘झूठा-सच’ उपन्यास के पहले भाग ‘वतन और देश’ तथा दूसरे भाग ‘देश का भविष्य’ 1942 से 1957 तक चलता है। इसमें 15 अगस्त और उसके पहले एवं बाद की घटनाओं का विस्तार से चित्रण है। यह मोहभंग का आख्यान है। पुरी का वैचारिक विचलन एक राष्ट्रीय रूपक का निर्माण करता है। दूसरा भाग 15 अगस्त को प्रारंभ होता है और देश के दूसरे लोकसभा चुनाव परिणाम आने तक चलता है। और यह नेताओं के भ्रष्ट चरित्र को उजागर करता है।
आजादी के समय हुए भयंकर दंगों की पृष्ठभूमि में रचा, यशपाल का उपन्यास राजनीतिक आकांक्षाओं के कारण देश को धर्मों के देश में बदलने की त्रासदी को उजागर करता है।
देश की स्वतंत्रता का सच, ‘झूठा-सच’ साबित होता है। पुरी से कुछ लोगों के मोहभंग, पुरी का क्रांतिकारी विचारों से मोहभंग, कनक, तारा के मोहभंग, शादी से मोहभंग से होते हुए, यह कथानक राजनीति से मोहभंग, नेताओं से मोहभंग, प्रेम से मोहभंग, आजादी से मोहभंग यानी पूरा उपन्यास तरह-तरह के मोहभंग से लैस है।
उपन्यास विभाजन के समय बलाकार की शिकार स्त्रियों की त्रासद दशा दर्शाता है, उन्हें उनका परिवार स्वीकारने से इंकार कर देता है, यदि बलत्कृता शादीशुदा है तो मायके और ससुराल दोनों स्थानों के लोग उससे किनारा कर लेते हैं। यदि मुसलमान संरक्षण देता है, तो पहली शर्त इस्लाम स्वीकारने की होती है। अमृता प्रीतम अपनी रचना ‘पिंजर’ में यही दिखाती हैं। विभाजन के समय एक हिन्दु औरत एक मुस्लिम द्वारा अपहृत कर ली जाती है। शादी के बाद वह खुद को एक नए देश में पाती है, क्योंकि तब तक बटवारा हो चुका था।
भारत की आजादी की गाथा ‘फ़्रीडम एट मिडनाइट’ का कथानक है। किताब में 15 अगस्त शब्द कई बार आता है। पहली बार यह भारत विभाजन 15 अगस्त 1947 के दिन का मानचित्र दिखाता है। इसी किताब से पता चलता है, यह शुक्रवार का दिन था।
डोमिनिक लैपियर तथा लैरी कॉलिंस की किताब ऐतिहासिक-ऐतिहासिक चित्रों, खासकर ब्रिटिश-इंडियन नेताओं, उनकी मीटिंग के फ़ोटोग्राफ़ से उसे आधिकारिकता प्रदान करती है। माउंटबैटन-पटेल, नेहरू-गांधी-जिन्ना के संवाद यहां उद्धृत हैं।
यहां देसी रियासतों के रुख को प्रदर्शित किया गया है। यह कथेतर गद्य की इतिहास किताब है। और आजादी तथा देश विभाजन के आगे-पीछे के राजनीतिक परिदृश्य को विस्तार से दिखाती है। भारत पर लिखी गई किताबों में यह एक सर्वाधिक लोकप्रिय किताब रही है।
इस विषय की किसी भी फिक्शन किताब से अधिक सूक्ष्म ब्योरे इसमें प्राप्त होते हैं। ऐसी बातें जो बहुत कम लोगों को ज्ञात होती हैं। इसमें राजनीति-इतिहास के साथ-साथ भारत की विविधता, धर्म-धर्म, भूगोल, संस्कृति, भाषा, पहनावा, वर्ग-रंग सब आता है। इस लेखक द्वै ने भारत की यात्रा, दस्तावेजों की खोजबीन कर इसके लिए साक्ष्य जुटाए हैं। हमें स्मरण रखना है, यह आजादी हमें किस कीमत पर मिली है। कितना गंवा कर हमने इसे पाया है। इसे संभालना हमारा कर्तव्य है। आजादी रहेगी तो हम गर्व-उल्लास के साथ 15 अगस्त मना सकेंगे।
देशवासियों को 15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!
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