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अमरता की खोज और मनुष्यता: क्या भविष्य में अमर हो जाएगा इंसान? क्या बदल जाएगी दुनिया?

सार

मृत्यु एक ऐसी सच्चाई है, जो हमें डराती भी है और नए रहस्यों कि खोज में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देती है। हालांकि, आज का आधुनिक विज्ञान एक ऐसी दिशा में आगे बढ़ रहा है, जो हमें शायद भविष्य में अमर बना दे।

ऐसे में कई सवाल उठते हैं आखिर अमरता है क्या? उस समाज की संरचना कैसी होगी जहां पर कोई व्यक्ति प्राकृतिक तौर पर मरता नहीं है? उस समाज की अर्थव्यवस्था का रूप कैसा होगा? वहां रिश्ते और सम्बन्ध किन आधारों पर टिके होंगे? 
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आखिर भविष्य के लिए अमरता के क्या मायने होंगे? - फोटो : Pixabay
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विस्तार
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मृत्यु एक ऐसी सच्चाई है, जो हमें डराती भी है और नए रहस्यों कि खोज में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देती है। हालांकि, आज का आधुनिक विज्ञान एक ऐसी दिशा में आगे बढ़ रहा है, जो हमें शायद भविष्य में अमर बना दे। ऐसे में कई सवाल उठते हैं आखिर अमरता है क्या? उस समाज की संरचना कैसी होगी जहां पर कोई व्यक्ति प्राकृतिक तौर पर मरता नहीं है? उस समाज की अर्थव्यवस्था का रूप कैसा होगा? वहां रिश्ते और सम्बन्ध किन आधारों पर टिके होंगे?

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पिछले कुछ सालों में विज्ञान के विकास ने हमारी औसत उम्र में कई गुना इजाफा किया है। आज जिस तेजी से बायोलॉजी और फिजिक्स में खोजें हो रही हैं, हो सकता है कि आने वाले समय में वैज्ञानिक कुछ ऐसा ढूंढ निकालें, जो हमारी उम्र को आज के मुकाबले कई गुना ज्यादा बढ़ा दे।

मॉर्गन फ्रीमैन के लोकप्रिय शो थ्रू द वर्महोल में मशहूर वैज्ञानिक मिचिओ काकू बताते हैं कि इस सृष्टि की सभी चीजों पर थर्मोडायनामिक्स का दूसरा नियम लागू होता है। इस नियम के अंतर्गत चीजें धीरे-धीरे आर्डर से डिसऑर्डर की तरफ बढ़ती हैं। अर्थात एक समय वो नई होती हैं, धीरे धीरे उनमे जंग लगता है और अंत में वो समाप्त हो जाती हैं। हमारी मृत्यु भी इसी प्रक्रिया के तहत घटित होती है। एक समय हम जन्म लेते हैं, धीरे-धीरे जवान होते हैं और अंत में मर जाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया को एंट्रोपी के प्रिंसिपल के नाम से जाना जाता है।


आज वैज्ञानिकों ने इस एंट्रोपी के भीतर एक बहुत बड़ा लूपहोल ढूंढ निकाला है। उनके मुताबिक अगर हम किसी चीज की बढ़ती एंट्रोपी पर बाहर से कुछ ऐसा प्रभाव डालें, जिसकी मदद से उसकी अव्यवस्था को रोका जा सके या कहें उसे डिसऑर्डर से दोबारा आर्डर में लाया जा सके। तब शायद हम किसी चीज को खत्म होने से रोक सकते हैं? अगर यही प्रक्रिया हम इंसानों पर करें, तो शायद हम मृत्यु के साथ भी धोखा कर सकते हैं। आइए जानते हैं कैसे?

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आखिर भविष्य के लिए अमरता के क्या मायने होंगे? - फोटो : Pixabay
हमारे सेल के पावर हाउस कहे जाने वाले माइटोकॉन्ड्रिया दो मेम्ब्रेन के स्ट्रक्टर होते हैं। ये शरीर को ऊर्जा देने का काम करते हैं। हालांकि, जैसे जैसे ये माइटोकॉन्ड्रिया कमजोर होते हैं, वैसे वैसे शरीर बूढ़ा होता चला जाता है। एक वक्त ऐसा आता है, जब शरीर का ये पावर इंजन पूरी तरह ठप पड़ जाता है। उस स्थिति में इंसान की मृत्यु होती है। हमारे शरीर के हर एक सेल में कई माइटोकॉन्ड्रिया होते हैं।

अमर होने के लिए सबसे पहले हमें माइटोकॉन्ड्रिया की एंट्रोपी को रोकना होगा। अर्थात सेल के धीमे होते इस पावरहाउस में हमेशा के लिए जान फूंकनी होगी। ये काफी जटिल काम है। वहीं दूसरी तरफ भविष्य ऐसी कई सम्भावनाएं लेकर खड़ा है, जो हमें ये करने की उम्मीद देता है।

बायोलॉजिकल न होकर टेक्निकल होगा हमारा इवोल्यूशन 

मशहूर लेखक मैक्स टैगमार्क अपनी पुस्तक लाइफ 3.0 में जीवन को 3 चरण में बांटते हैं। पहले में वो बैक्टीरियल लाइफ और इवॉल्व होते प्राणियों को रखते हैं। दूसरे चरण में वे आज के विकसित इंसानों को रखते हैं। टैगमार्क के मुताबिक हमारे जीवन का जो तीसरा चरण आने वाला है, वो बायोलॉजिकल न होकर टेक्निकल होगा। उनके अनुसार हमारे जीवन का जो अगला विकास होगा, उसमें हम मशीनों को अपने अंगों के रूप में इस्तेमाल करेंगे।


जीवन के विकास का ये चरण अब शुरू भी हो चुका है। विश्व भर में कई लोग आर्टिफिशियल दिल या कहें पेसमेकर जैसे डिवाइस के सहारे जिंदा हैं। ब्रेन चिप जैसी अवधारणा अब वास्तविक जीवन में नया रूप ले रही है। ऐसे में उनके मुताबिक हमारी क्रमागत उन्नति आने वाले समय में बायोलोजिकल न होकर टेक्निकल होने वाली है। हम आने वाले वक्त में इंसान से साईबोर्ग बन जाएंगे।

ऐसे में हो सकता है कि हमारे शरीर के भीतर कई नैनो बोट्स को इंस्टॉल किया जाए, जो शरीर की बढ़ती एंट्रोपी को रोक दें और हम अपनी उम्र की सीमा को पहले के मुकाबले कई गुना ज्यादा बढ़ा लें। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर वो भविष्य कैसा होगा? जो इस तरह की संभावनाओं को लेकर खड़ा है।

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आखिर भविष्य के लिए अमरता के क्या मायने होंगे? - फोटो : Social media

प्रोविडेंट फंड जैसी स्कीमें  हो जाएंगी अप्रासंगिक

आखिर जब इंसान अमर हो जाएंगे उस वक्त रिटायरमेंट का क्या होगा? लंबी उम्र होने के कारण इंसान लम्बे समय तक बिना रिटायर हुए काम कर सकेंगे। ऐसे में युवाओं के लिए नए रोजगार को पाना काफी चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। इस कारण सरकार को रिटायरमेंट और रोजगार को लेकर नए नियम बनाने पड़ेंगे। एक संभावना ये भी हो सकती है कि जिस तरह आज 60 वर्ष के बाद इंसान को उसकी जॉब से रिटायर कर दिया जाता है। हो सकता है बढ़ती जनसंख्या और अर्थव्यवस्था की समस्या को देखते हुए ऐसे नियम भी बनाने पड़ें, जहां इंसानों को एक तय उम्र के बाद जिंदगी से ही रिटायर करना पड़े।

इस दौर में प्रोविडेंट फण्ड जैसी स्कीमें, जिन्हें खासतौर पर इंसान के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए बनाया गया है। वो अप्रासंगिक हो जाएंगी। बड़ी मात्रा में जनसंख्या होने के कारण हमारे पास कई आइंस्टीन, मोजार्ट, टैगोर, बुद्ध और शेक्सपियर होंगे, जिनके दर्शन और खोजों से दुनिया लाभान्वित होगी।
 

स्पेस से जुड़ी नई खोजों को देना होगा अंजाम

अधिक मात्रा में लोगों के होने का मतलब है हमें अत्यधिक संसाधनों का दोहन करना होगा। ऐसे में इसके लिए हमको सेलेस्टियल बॉडी बनना पड़ेगा। क्योंकि अधिक मात्रा में जनसंख्या को पृथ्वी पर नहीं रखा जा सकता है। हमें अपने सौर मंडल में उन ग्रहों की खोज करनी होगी, जो सेल्फ सस्टेनिंग हों।

आज बढ़ती जनसंख्या के अपने फायदे और नुकसान हैं। एक तरफ जहां इसने बड़ी मात्रा में उत्पादन के लिए लेबर फोर्स दी है। वहीं दूसरी तरफ अधिक जनसंख्या के कारण हमारे संसाधन तेजी से खत्म हो रहे हैं। ऐसे में अपनी जरूरतों को पूरा और अर्थव्यवस्था को विस्तार देने के लिए हमें स्पेस रिसर्च और दूसरे ग्रहों पर अपने उपनिवेश को स्थापित करना होगा।

नई व्यवस्थाएं समाज में लेंगी जन्म

अमरता के रहस्य के उजागर होने के बाद हमें हमारी सामाजिक बुनियाद को फिर से परिभाषित करने के जरूरत होगी। लम्बी उम्र होने की वजह से एक इंसान का किसी दूसरे इंसान के साथ पूरी जिंदगी बिताना काफी कठिन हो जाएगा। ऐसे में ये समय पारम्परिक पारिवारिक व्यवस्था को बदलने का वक्त होगा। परिवार से जुड़ी नई व्यवस्थाएं समाज में जन्म लेंगी।

उम्र के बढ़ने का दुष्प्रभाव राजनीति के क्षेत्र पर भी पड़ेगा। नेता लोग कई कई साल तक एक पद पर विराजमान रहेंगे। नए बदलाव समाज में काफी धीमी गति से लागू होंगे। युवाओं और नए लोगों का राजनीति के क्षेत्र में आना थोड़ा मुश्किल हो जाएगा। हम एक ऐसे समाज में जीएंगे जहां एक साथ 10 से 20 जनरेशन होंगी। इस कारण इतिहास और वर्तमान के बीच संघर्ष भी देखने को मिलेगा।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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