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जीवन धारा: कल्पना असंभव को भी संभव बनाती है... सकारात्मक सोचने का सूत्र अपनाएं

Wed, 01 Oct 2025 06:26 AM IST
ज्योति भास्कर फ्लोरेंस स्कोवेल शिन

सार

जिंदगी के खेल को सफलतापूर्वक खेलने के लिए हमें अपनी कल्पना शक्ति को सही दिशा में प्रशिक्षित करना होगा। जो अपनी कल्पना को सही ढंग से प्रशिक्षित करता है, वह अपनी हर इच्छा को पूरा कर लेता है।
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कल्पना असंभव को भी संभव बनाती है - फोटो : अमर उजाला प्रिंट / एजेंसी
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विस्तार
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ज्यादातर लोग जिंदगी को एक जंग समझते हैं, लेकिन यह जंग नहीं, बल्कि एक खेल है। यह ऐसा खेल है, जिसमें बिना आध्यात्मिक नियमों की समझ के सफलता नहीं मिल सकती। यह खेल देने और लेने का है। मनुष्य जो कुछ बोएगा, वही काटेगा। इसका मतलब है कि इन्सान जो भी शब्दों या कर्मों में देता है, वही उसे वापस मिलता है।

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अगर वह नफरत देता है, तो उसे नफरत मिलेगी, अगर वह प्रेम देता है, तो उसे प्रेम मिलेगा, अगर वह आलोचना करता है, तो उसे आलोचना मिलेगी, अगर वह झूठ बोलता है, तो उसके साथ झूठ बोला जाएगा और अगर वह धोखा देता है, तो उसे धोखा मिलेगा। हमें यह भी सिखाया गया है कि इस जिंदगी के खेल में हमारी कल्पना शक्ति बहुत बड़ी भूमिका निभाती है।

अपने दिल या कल्पना को पूरी सावधानी से संभालो, क्योंकि उसी से जिंदगी के परिणाम निकलते हैं। इन्सान जो कुछ भी अपनी कल्पना में देखता है, वह देर-सबेर उसकी जिंदगी में हकीकत बन जाता है। मैं ऐसे व्यक्ति के बारे में जानती हूं, जो एक खास बीमारी से डरता था। वह बीमारी बहुत दुर्लभ थी, लेकिन वह बार-बार उसके बारे में सोचता और पढ़ता रहता, जब तक कि वह बीमारी उसके शरीर में नहीं आ गई, और वह अपनी गलत कल्पना का शिकार होकर मर गया।
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जिंदगी के खेल को सफलतापूर्वक खेलने के लिए हमें अपनी कल्पना शक्ति को सही दिशा में प्रशिक्षित करना होगा। जो व्यक्ति अपनी कल्पना को सिर्फ अच्छा सोचने के लिए प्रशिक्षित करता है, वह अपनी हर अच्छी इच्छा को पूरा कर लेता है, चाहे वह स्वास्थ्य, धन, प्रेम, दोस्त और आत्म-अभिव्यक्ति से संबंधित हो या फिर अपने सर्वोच्च आदर्श से। कल्पना को ‘मन की कैंची’ कहा गया है, और यह दिन-प्रतिदिन उन चित्रों को काटती रहती है, जो मनुष्य वहां देखता है।

कल्पना को सफलतापूर्वक प्रशिक्षित करने के लिए, मनुष्य को अपने मन की कार्यप्रणाली को समझना होगा। यूनानियों ने कहा था, स्वयं को जानो। बहुत से लोग अपनी वास्तविक किस्मत से अनभिज्ञ होते हैं और वे उन चीजों और परिस्थितियों के लिए प्रयास कर रहे होते हैं, जो उनकी हैं ही नहीं। यदि वे प्राप्त भी हो जाएं, तो कोई गारंटी नहीं कि उनसे संतोष मिलेगा ही।

उदाहरण के लिए, मेरे पास एक महिला आई और उसने कहा कि वह अमुक व्यक्ति से प्यार करती है और शादी करना चाहती है। उसे कहने के लिए कोई ‘अच्छा शब्द’ बताइए। शादी के बाद दोनों में अनबन हो गई और अलग हो गए। महिला ने दूसरी शादी की, लेकिन इस बार भी रिश्ता आगे नहीं निभ सका। दरअसल, जिस तरह की कल्पनाएं वह अपने पति के लिए करती थी,  वैसी खूबियां दोनों ही शादियों में नहीं मिलीं और वह असंतुष्ट ही रही। कहने का मतलब है, कल्पना शक्ति को सही दिशा में लगाकर सबसे पहले खुद को जानना जरूरी है।

सूत्र- सकारात्मक सोचें
धरती पर प्रत्येक जीव का समय तय है। इस बीच हमें स्वास्थ्य, धन, प्रेम, दोस्त, आत्म-अभिव्यक्ति, और अपने सबसे ऊंचे आदर्श को प्राप्त करना होता है। लेकिन कुछ लोग नासमझी के कारण दूसरों से घृणा करते हैं, और जीवन चक्र उनके कर्मों के फल देता ही है, भले कुछ समय बाद दे। इसलिए अपने समेत सबके लिए सकारात्मक सोचें।

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