स्पेन पूरी दुनिया में सांडों की लड़ाई के लिए मशहूर है। इसी देश में राफेल नडाल का जन्म हुआ। 1986 में जब वो पैदा हुए थे तब कोई नहीं जानता था कि अगले कुछ साल में वे अपने देश को एक अलग पहचान दिलाने वाले हैं। लोग ऐसा इसलिए भी नहीं मानते थे क्योंकि राफेल नडाल के माता-पिता का खेल से कोई लेना देना नहीं था। सवाल ये है कि फिर नडाल में खिलाड़ी बनने की चाहत आई कहां से?
इस सवाल का जवाब बताने के लिए आपको एक किस्सा सुनाते हैं। दरअसल राफेल नडाल के एक चाचा टेनिस खिलाड़ी थे और दूसरे फुटबॉल चाचा फुटबॉल खेलते थे। नडाल जब सिर्फ 3 साल के थे तो उन्होंने टेनिस रैकेट पकड़ लिया। अभी 12 साल के करीब रहे होंगे जब उन्होंने एक रीजनल टूर्नामेंट जीत लिया था।
कहानी में ट्विस्ट ये है कि उस वक्त तक राफेल नडाल फुटबॉल भी खेला करते थे। नडाल की काबिलियत दोनों खेलों में दिखाई दे रही थी। बावजूद इसके अगर उन्हें खेल की दुनिया में आगे बढ़ना था और बड़े स्तर पर खेलने का एक ‘सीरियस एफर्ट’ करना था तो ये जरूरी था कि वो टेनिस और फुटबॉल में से किसी एक खेल को चुनें।
लिहाजा वो दिन आ ही गया जब उनके सामने शर्त रखी गई कि वो फुटबॉल या टेनिस में से किसी एक खेल को चुनें। नडाल ने टेनिस चुना। 16 साल की उम्र में उन्होंने अपने फैसले को सही साबित कर दिया। उन्होंने विबंलडन के ब्वायज सिंगल्स टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में जगह बनाई। 17 का होते होते नडाल का सामना रोजर फेडरर से हुआ। उन्होंने फेडरर को हराकर विंबलडन के तीसरे दौर में जगह बनाई। ये 2003 की बात है। उसके बाद तो नडाल को टेनिस की दुनिया में एक धमाकेदार खिलाड़ी की पहचान मिल गई और यूरोप का एक छोटा सा देश स्पेन टेनिस के खेल में आसमान की बुलंदियों को छूने लगा।
डेढ़ दशक पहले 2005 में जब पहली बार राफेल नडाल ने फ्रेंच ओपन जीता था तभी टेनिस फैंस को ये समझ आ गया था कि इस खेल में एक बड़ा खिलाड़ी आ गया हैस लेकिन टेनिस के खेल में बड़े खिलाड़ी की परिभाषा होती है जिसके खाते में चारों ग्रैंड स्लैम हों। चारों ग्रैंड स्लैम यानी ऑस्ट्रेलियन ओपन, फ्रेंच ओपन, विबंलडन और यूएस ओपन। नडाल को ये मुकाम हासिल करने में करीब 5 साल लगे। 2010 में जब उन्होंने पहली बार यूएस ओपन का खिताब जीता तो वो चारों ग्रैंडस्लैम जीतने वाले खिलाड़ी बन गए। नडाल का पहला यूएस ओपन खिताब उनका नौंवा ग्रैंडस्लैम टाइटल था। अब वो चार बार यूएस ओपन जीत चुके हैं।
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