अच्छी नींद इस पर निर्भर नहीं करती कि आप रात में कितने घंटे सोए। अच्छी नींद का मतलब है कि आप सुबह उठकर तरोताजा महसूस करें और दैनिक काम के लिए तैयार हो जाएं। अच्छी नींद स्वस्थ दिमाग के लिए महत्वपूर्ण है। जिन लोगों की नींद बाधित होती है, उनमें डिमेंशिया (मनोभ्रंश) का उच्च जोखिम रहता है, बजाय उन लोगों के, जिन्हें नींद संबंधी कोई शिकायत नहीं है।
तीस-चालीस की उम्र में लोगों की नींद काफी बाधित होती है
खराब नींद कई तरह से दिमाग को नुकसान पहुंचाती है। एक अध्ययन में पता चला है कि तीस-चालीस की उम्र में लोगों की नींद काफी बाधित होती है, इससे स्मृति व काम करने की क्षमता प्रभावित होती है, जिसका असर एकाध दशक बाद दिखता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि गहरी नींद व रैपिड आई मूवमेंट (आरईएम) दिमागी स्वास्थ्य के लिए बेहतर हैं। बीते महीने प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, वैज्ञानिकों ने एमआरआई जांच से पता किया कि गहरी नींद और आरईएम में कमी से तेरह से सत्रह साल बाद अल्जाइमर रोग जैसे लक्षण देखने को मिले।
गहरी नींद के कई फायदे
जब आप सोते हैं, तो आपका दिमाग लगातार अलग-अलग चरण पूरे करता है : हल्की नींद के दो चरण, जब शरीर आराम करता है और हृदय गति व तापमान कम होता है या जब नींद धीमी होती है और दिमागी गतिविधि मंद पड़ जाती है। आरईएम चरण, जब आप सपने देख रहे होते हैं। सामान्यत: दिमाग सभी चारों चरणों को पूरा करने के लिए करीब 90 मिनट का वक्त लेता है और फिर से प्रक्रिया शुरू करता है। ऑस्ट्रेलियाई मनोवैज्ञानिक पेज मैथ्यू कहते हैं, ‘गहरी नींद और आरईएम आपके दिमाग को थकान और तनाव से ‘ठीक करने’ तथा स्मृति को मजबूत करने में मदद करती हैं।’
अल्जाइमर समेत कई दिमागी समस्याएं होने का जोखिम
गहरी नींद में आपका दिमाग चयापचय और हार्मोन को दुरुस्त करता है, और दिमाग में से कचरे को निकालता है। आरईएम वह समय होता है, जब आपका मस्तिष्क भावनाओं और नई जानकारी को संसाधित करता है, जो आपने जागृत अवस्था में प्राप्त की थी। विशेषज्ञों के अनुसार, गहरी नींद और आरईएम में विघ्न पड़ने से अल्जाइमर समेत कई दिमागी समस्याएं होने का जोखिम रहता है।
ऐसे स्वस्थ रहेगा हमारा दिमाग
दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए करीब सात घंटे की नींद लें, जिससे गहरी नींद और आरईएम के चार से सात चरण पूरे हो सकें। जो लोग लगातार छह घंटे से कम सोते हैं, उनको 50, 60 और 70 की उम्र में मनोभ्रंश का जोखिम अधिक रहता है। डॉ. पेज कहते हैं, ‘दिमाग को अपना काम करने दें, वह बाकी सभी जरूरतें खुद पूरी कर लेगा।’
©The New York Times 2025