कॉर्मोरेंट के पंख अन्य जलीय पक्षियों की तुलना में कम जलरोधक होते हैं, जो गोता लगाने में सहायता करते हैं। हालांकि, इस विशेषता के कारण उन्हें सर्दियों में भी अपने पंखों को बार-बार सुखाना पड़ता है। गुनगुनी धूप वाले दिनों में, कॉर्मोरेंट को अपने पंख फैलाकर बैठे हुए, ठंडी हवा में अपने पंख सुखाते हुए देखना आम बात है।
सर्दियों में कॉर्मोरेंट को कम भोजन पर संतुष्ट रहना पड़ता है क्योंकि शिकार में पर्याप्त मछलियां उपलब्ध नहीं होती हैं। कड़ाके की ठण्ड में कॉर्मोरेंट अपनी अनावश्यक गतिविधियों को सीमित कर लेते हैं और अपनी उर्जा का संरक्षण करते हैं। वे अपना अधिकतर समय आराम करने में बिताते हैं और बसेरे में रहते हैं। उनकी चयापचय दर (metabolic rate) उन्हें कठोर परिस्थितियों में जीवित रहने में मदद करती है।
सर्दियों में ग्रेटर कॉर्मोरेंट्स प्रजनन की भी तैयारी में लग जाते हैं। नर अपने चमकदार काले पंख दिखाकर और पंखों को लम्बा फैलाकर प्रणय प्रदर्शन करते हैं और मादाओं को आकर्षित करते हैं। इन दिनों में वे जल निकायों के इर्द-गिर्द घोंसला बनाने में भी मशगूल हो जाते हैं। घोसला बनाने के काम आने वाली सामग्रियों जैसे टहनियों और पानी के शैवाल को एकत्रित करने में नर और मादा कॉर्मोरेंट्स व्यस्त हो जाते हैं।
कॉर्मोरेंट्स मानव बस्तियों के आस-पास ही रहते हैं और सुरक्षित जल निकायों के करीब अपना घर बनाते हैं। लेकिन इस कारण उनका मछुआरों से भी संघर्ष होता रहता है, जिन्हें यह लगता है कि कॉर्मोरेंट्स मछलियों को खा जायेंगे या तितर-बितर कर देंगे। कॉर्मोरेंट्स को आकाश में उड़ते देखना पक्षी और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक रम्य अनुभव होता है।
बढती आबादी और अंधाधुंध शहरीकरण के कारण जलाशयों की संख्या कम होती जा रही है। संसाधनों की कमी मानव-वन्यजीव संघर्ष का कारण बनती है। ग्रेटर कॉर्मोरेंट की आबादी को संरक्षित करने के लिए जल निकायों को सुरक्षित करना आवश्यक है। इस दिशा में शासन और प्रकृति प्रेमियों को मिलकर प्रयास करना चाहिए।
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