फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पक्षी और इनका जीवन: पक्षी ठण्ड के मौसम से कैसे बचते हैं?

सार

सर्दियों में प्रकृति में बहुत बड़े बदलाव होते हैं और पक्षी भी मौसम के अनुरूप अपने को ढाल लेते हैं। इन पक्षियों में ग्रेटर कॉर्मोरेंट (फैलाक्रोकोरैक्स कार्बो) अथवा जल काग अद्भुत रूप से सर्दियों में अपने व्यवहार और जीवनशैली को परिवर्तित करते हैं।
विज्ञापन
कॉर्मोरेंट - फोटो : महेश जोशी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इन दिनों कड़ाके की ठण्ड पड़ रही है। घर से बाहर निकलते ही दांत किटकिटाने लगते हैं। ठण्ड से बचाव के लिए हम सर पर टोपी, हाथों में दस्ताने, स्वेटर अथवा जैकेट और पैरों में मोज़े पहने होते हैं। सुबह का समय तो रजाई में दुबके हुए ही निकल जाता है। लेकिन आपने कभी सोचा है कि हमारे पक्षी मित्र ठण्ड के मौसम का मुकाबला किस तरह करते हैं? उन्हें किसी ने कभी ठण्ड में कांपते हुए देखा है? नहीं ना! तो हम जानने की कोशिश करते हैं कि प्रकृति ने इन नन्हे प्राणियों को क्या दिया है जिससे वे स्वयं को कड़ाके की ठण्ड में भी सुरक्षित रखते हैं।

विज्ञापन


सर्दियों में प्रकृति में बहुत बड़े बदलाव होते हैं और पक्षी भी मौसम के अनुरूप अपने को ढाल लेते हैं। इन पक्षियों में ग्रेटर कॉर्मोरेंट (फैलाक्रोकोरैक्स कार्बो) अथवा जल काग अद्भुत रूप से सर्दियों में अपने व्यवहार और जीवनशैली को परिवर्तित करते हैं। उल्लेखनीय है कि कॉर्मोरेंट विशेष रूप से अपने मछली पकड़ने के कौशल के लिए जाने जाते हैं। कॉर्मोरेंट सर्दियों के दौरान प्रायः प्रवास नहीं करते हैं और किसी मछलियों से भरपूर जल निकाय के आस पास अपना अड्डा बना लेते हैं।

कॉर्मोरेंट को सर्दियों में मछलियों को पकड़ने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ठण्ड में मछलियां गहरे पानी में चली जाती हैं, इस कारण कॉर्मोरेंट को अपने शिकार को पकड़ने के लिए काफी गहराई तक और अधिक समय तक गोता लगाना पड़ता है। कॉर्मोरेंट बेहतरीन गोताखोर होते हैं और पानी में 10 मीटर गहरे तक गोता लगाकर मछलियों को पकड़ लेते हैं। कॉर्मोरेंट मौसम के अनुरूप अपने आहार को भी संतुलित कर सकते हैं और ठण्ड के दिनों में छोटी मछलियाँ और अन्य जलीय जीवों का सेवन कर जीवित रहते हैं।
विज्ञापन


ठण्ड के दौरान कॉर्मोरेंट अक्सर एक बड़े समूह में रहते हैं जिससे वे सुरक्षित महसूस करते हैं। जल निकायों के पास स्थित उनके बसेरों को वे पक्षियों की अन्य प्रजातियों के साथ भी साझा करते हैं। सर्दियों में कॉर्मोरेंट जब एक झुण्ड में आकाश में उड़ते हैं तो एक अद्भुत दृश्य पैदा हो जाता है। ठंडी रातों में समूह में रहने के कारण वे गर्म बने रहते हैं और अपनी उर्जा को बचाए रखते हैं।

विज्ञापन

कॉर्मोरेंट - फोटो : महेश जोशी
कॉर्मोरेंट के पंख अन्य जलीय पक्षियों की तुलना में कम जलरोधक होते हैं, जो गोता लगाने में सहायता करते हैं। हालांकि, इस विशेषता के कारण उन्हें सर्दियों में भी अपने पंखों को बार-बार सुखाना पड़ता है। गुनगुनी धूप वाले दिनों में, कॉर्मोरेंट को अपने पंख फैलाकर बैठे हुए, ठंडी हवा में अपने पंख सुखाते हुए देखना आम बात है।

सर्दियों में कॉर्मोरेंट को कम भोजन पर संतुष्ट रहना पड़ता है क्योंकि शिकार में पर्याप्त मछलियां उपलब्ध नहीं होती हैं। कड़ाके की ठण्ड में कॉर्मोरेंट अपनी अनावश्यक गतिविधियों को सीमित कर लेते हैं और अपनी उर्जा का संरक्षण करते हैं। वे अपना अधिकतर समय आराम करने में बिताते हैं और बसेरे में रहते हैं। उनकी चयापचय दर (metabolic rate) उन्हें कठोर परिस्थितियों में जीवित रहने में मदद करती है।

सर्दियों में ग्रेटर कॉर्मोरेंट्स प्रजनन की भी तैयारी में लग जाते हैं। नर अपने चमकदार काले पंख दिखाकर और पंखों को लम्बा फैलाकर प्रणय प्रदर्शन करते हैं और मादाओं को आकर्षित करते हैं। इन दिनों में वे जल निकायों के इर्द-गिर्द घोंसला बनाने में भी मशगूल हो जाते हैं। घोसला बनाने के काम आने वाली सामग्रियों जैसे टहनियों और पानी के शैवाल को एकत्रित करने में नर और मादा कॉर्मोरेंट्स व्यस्त हो जाते हैं।

कॉर्मोरेंट्स मानव बस्तियों के आस-पास ही रहते हैं और सुरक्षित जल निकायों के करीब अपना घर बनाते हैं। लेकिन इस कारण उनका मछुआरों से भी संघर्ष होता रहता है, जिन्हें यह लगता है कि कॉर्मोरेंट्स मछलियों को खा जायेंगे या तितर-बितर कर देंगे। कॉर्मोरेंट्स को आकाश में उड़ते देखना पक्षी और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक रम्य अनुभव होता है।

बढती आबादी और अंधाधुंध शहरीकरण के कारण जलाशयों की संख्या कम होती जा रही है। संसाधनों की कमी मानव-वन्यजीव संघर्ष का कारण बनती है। ग्रेटर कॉर्मोरेंट की आबादी को संरक्षित करने के लिए जल निकायों को सुरक्षित करना आवश्यक है। इस दिशा में शासन और प्रकृति प्रेमियों को मिलकर प्रयास करना चाहिए।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें