किसी वस्तु की मस्तिष्क में छवि जितनी अधिक स्पष्ट और बार-बार बनती है, उसकी लत लगने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है। मोटापा घटाने वाली जीएलपी-1 आधारित दवाएं किसी लत, खासकर नशे की, को खत्म करने में कारगर साबित हो सकती हैं। मस्तिष्क के लेटरल सेप्टम में मौजूद जीएलपी-1 रिसेप्टर के सक्रिय होने पर तंत्रिका गतिविधि घट जाती है। इससे किसी पदार्थ को पाने या खाने की तीव्र लालसा कम होने लगती है।
कल्पना कीजिए, अचानक किसी स्वादिष्ट बर्गर की तस्वीर आपके दिमाग में कुछ इस कदर उभरती है कि उसे खाने से आप खुद को रोक नहीं पाते। यही प्रक्रिया अन्य चीजों तथा नशीले पदार्थों के साथ भी होती है। शुरुआत एक साधारण इच्छा से होती है, पर जब वही इच्छा बार-बार मन में आने लगे और उसे पूरा करने की बेचैनी बढ़ने लगे, तो यही लालसा धीरे-धीरे लत का रूप ले लेती है।
विज्ञापन
वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि किसी वस्तु की मस्तिष्क में छवि जितनी अधिक स्पष्ट और बार-बार बनती है, उसकी लत लगने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है। दशकों से वैज्ञानिक खोज कर रहे हैं कि आखिर मस्तिष्क किसी साधारण इच्छा को इतनी प्रबल लालसा में कैसे बदल देता है। अब जाकर मोटापा घटाने वाली जीएलपी-1 आधारित दवाएं इस रहस्य से पर्दा उठाने में कारगर साबित हो रही हैं।
जीएलपी-1 एक प्राकृतिक हार्मोन है, जो भोजन करने के बाद आंतों से निकलता है। यह रक्त शर्करा नियंत्रित करने के साथ मस्तिष्क को तृप्ति का संदेश भेजता है, जिससे भूख कम लगती है और मोटापे के उपचार में मदद मिलती है। हालांकि, शोधों के अनुसार, जीएलपी-1 दवाएं नशीले पदार्थों की लत को कम करने में मददगार हो सकती हैं। लंबे समय से मस्तिष्क के रिवॉर्ड सिस्टम, विशेषकर वेंट्रल टेगमेंटल एरिया और न्यूक्लियस अक्यूम्बेंस, को लत का मुख्य केंद्र माना जाता रहा है, क्योंकि यही डोपामिन के स्राव को नियंत्रित करते हैं। पर, शोधकर्ताओं ने देखा कि इन क्षेत्रों में जीएलपी-1 रिसेप्टर बहुत कम मात्रा में मौजूद हैं। फिर, उनका ध्यान लेटरल सेप्टम की ओर गया। यह मस्तिष्क का वह महत्वपूर्ण केंद्र है, जहां यादें, भावनाएं और सुखद अनुभव एक-दूसरे से जुड़ते हैं।
विज्ञापन
जब हम अपने पसंदीदा भोजन या किसी नशीले पदार्थ की कल्पना करते हैं, तो उसकी मानसिक छवि यहीं बनती है। यही क्षेत्र उस छवि को रिवॉर्ड सिस्टम तक पहुंचाकर लालसा को और तीव्र बना देता है। लेटरल सेप्टम में जीएलपी-1 रिसेप्टर बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। जब ये रिसेप्टर सक्रिय होते हैं, तो इस क्षेत्र की तंत्रिका गतिविधि कमजोर पड़ जाती है। नतीजतन, स्वादिष्ट भोजन या नशीले पदार्थों की मानसिक छवि धुंधली होने लगती है और उन्हें पाने की तीव्र इच्छा भी कम हो जाती है। यदि भविष्य के शोध इन निष्कर्षों की पुष्टि करते हैं, तो जीएलपी-1 आधारित दवाएं चिकित्सा विज्ञान में एक बड़ी क्रांति ला सकती हैं। - द कन्वर्सेशन