पर्यावरण संरक्षण की चिंता हर धर्म में की गई है।
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प्रथम वेद ऋग्वेद का प्रथम मन्त्र ही अग्नि को समर्पित है–
ऊं अग्निमिले पुरोहितं यज्ञस्य देवमृत्विजम्। (ऋग्वेद १.१.१) ऋतं ब्रह्मांड का सार्वभौमिक नियम है। इसे ही प्रकृति का नियम कहा जाता है। ऋग्वेद के अनुसार-सत्येनोत्तभिता भूमिः सूर्येणोत्तभिता द्यौः त्रृतेनादित्यास्तिठन्ति दिवि सोमो अधिश्रितः ऋग्वेद (१०:८५:१)
भावार्थ–देवता भी ऋतं की ही उत्पति हैं एवं ऋतं के नियम से बंधे हुए हैं। यह सूर्य को आकाश में स्थित रखता है। वेदों में वरुण को ऋतं का देवता कहा गया है। वैसे तो वरुण जल एवं समुद्र के वेता (वरुणस्य गोपः) के रूप में जाना जाता है परन्तु मुख्यतया इसका प्रमुख कार्य इस ब्रह्मांड को सुचारू पूर्वक चलाना है।
ऋग्वेद में वनस्पतियों से पूर्ण वनदेवी की पूजा की गई है–
आजनगन्धिं सुरभि बहवन्नामड्डषीवलाम् प्राहं मृगाणां मातररमण्याभिशंसिषम्(ऋग्वेद १०:१४६:६) भावार्थ-अब मैं वनदेवी (आरण्ययी) की पूजा करता हूं जो कि मधुर सुगन्ध से परिपूर्ण है और सभी वनस्पतियों की मां है और बिना परिश्रम किए हुए भोजन का भण्डार है।
बाइबिल में भी पर्यावरण संरक्षण की महिमा का बखान मिलता है-
धरती की रचना इतनी लाजवाब थी कि स्वर्गदूत उसे देखकर परमेश्वर का “जयजयकार”करने लगे । (अय्यूब३८:७) बाइबल बताती है कि परमेश्वर ने इंसान को धरती की देखभाल करने की ज़िम्मेदारी सौंपी थी। (उत्पत्ति १:२८;२ :१५) इसलिए यह बेहद ज़रूरी था कि इंसान अपने इस पृथ्वी रूपी घर को स्वर्ग बना कर रखे।
बाइबल में भविष्यवाणी की गई है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर यहोवा, जिसने धरती पर जीवन कायम रखनेवाले पर्यावरण को बनाया है,उसने फैसला किया है कि वह धरती से बुरे लोगों को निकाल देगा। (सपन्याह १:१४ ;प्रकाशितवाक्य १९:११-१५) इससे पहले कि इंसान धरती का सत्यानाश कर डाले, परमेश्वर धरती को बचाने के लिए जल्द ही कदम उठाएगा, इतनी जल्द कि हमने उम्मीद भी न की हो।(मत्ती २४:४४) वाकई, सिर्फ परमेश्वर ही पृथ्वी को मिटने से बचा सकता है।
गुरु ग्रन्थ साहिब में हवा को गुरु ,पानी को पिता तथा धरती को मां का दर्जा दिया गया है -
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इस्लाम और कुदरत
कुरान में ६,००० से भी अधिक आयतें हैं जिनमें ५०० से अधिक प्राकृतिक घटनाओं से संबंधित हैं। इस्लाम का मानना है कि समस्त मानव आत्माएं एक बगीचे से आती हैं; और समय के अंत में प्रत्येक आत्मा या तो बगीचे में प्रवेश कर जाएगी या फिर आग में। हम दुनिया को किसी ऐसी चीज में बदल सकते हैं जो अधिक गरम, अधिक लालची और अधिक विनाशकारी हो जाती है या फिर हम इसको किसी ऐसी चीज में बदल सकते हैं जो शांत है जो दैव्य प्रयोजन को प्रतिलिक्षित करती है।
पैगंबर मुहम्मद ने कहा है जो काफी मशहूर है,‘चाहे क़यामत का दिन ही क्यों न आ जाए, आप अपने हाथ में कोई पौधे को पकड़े हों, तो उसे रोप दें।' इससे पता चलता है कि किसी को आशा नहीं छोड़नी चाहिए और धरती के साथ बिल्कुल अंत तक शांत रहने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए।
गुरु ग्रन्थ साहिब में हवा को गुरु ,पानी को पिता तथा धरती को मां का दर्जा दिया गया है -
"पवन गुरु,पानी पिता, माता धात महत।"
मुंबई का फेफड़ा कहे जाने वाले आरे कॉलोनी के 2141 पेड़ काटे जा चुके हैं। यहां पर मेट्रो का डिपो बनेगा। बृहनमुंबई नगर निगम के वृक्ष प्राधिकरण ट्री अथॉरिटी ने प्रस्ताव पास किया था। मुंबई में इन पेड़ों को काटने से रोकने के लिए काफी प्रदर्शन हुए। एक लाख लोगों ने ऑनलाइन याचिका दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने फ़िलहाल पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है।
हालांकि इस रोक का कोई फायदा नजर नहीं आ रहा क्योंकि 2600 पेड़ काटे जाने थे,जिसमे की कोर्ट के आदेश से पहले ही 2141 पेड़ काटे जा चुके हैं। शीर्ष अदालत के आदेश से 459 पेड़ बचे और हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को रिहा किया गया। शीर्ष अदालत का फैसला काबिले तारीफ है। अतएव हम कह सकते हैं कि जल, जंगल और जमीन के बिना विकास संभव नहीं है।
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