‘द टिन ड्रम’ किसी वर्जना को नहीं मानता है... बारम्बार कथानक वर्जित क्षेत्र में प्रवेश करता है, जहां घृणा और कामुकता, मृत्यु और ईशनिंदा का मिश्रण है। मगर यह अमेरिकन स्कूल की पोर्नोग्राफी के विभिन्न तथा तथाकथित ‘स्टार्क रियलिज्म’ से भिन्न है। इसका श्रेय ग्रास की चित्रण वस्तुनिष्ठता है। विकृत रति ‘द टिन ड्रम’ का एक प्रमुख तत्व है। यौनिकता से लबालब ‘द टिन ड्रम’ विभिन्न यौन संबंध दर्शाता है। अधिकतर ऐसे संबंध विवाहेतर हैं।
बाल शोषण, समलैंगिक संबंध, हत्या, लूटपाट, चोरी, बेवफाई यहां चित्रित है। सब कुछ जुगुप्सा से भरा और अस्पष्ट है। नायक ऑस्कर कई लोगों की यौन क्रियाओं को देखता है, खुद विकृत संबंध रखता है। वह ‘अमोरल’ है।
तामसिक काल के ‘द टिन ड्रम’ का नायक ऑस्कर बहुत क्रूर है। कूबड़ उसकी विकृति, समाज की विकृति का प्रतीक है। अपराधबोध से घिरा ऑस्कर हत्या न करके भी हत्या अपने सिर ले लेता है। हिटलर की जघन्यता को सामने लाता है। अंत में नायक ऑस्कर मानसिक अस्पताल में एक गीत गाता है, जो दुष्ट ब्लैक कुक से संबंधित है।
रूसी लोग ऑस्कर के पिता को मार डालते हैं, औरतों का बलात्कार करते हैं। मनहूस-असहनीय दुनिया में ऑस्कर रहना नहीं चाहता है। वह जानबूझ कर मानसिक अस्पताल में भर्ती है।
जटिल कथानक का नायक ऑस्कर तीन साल की उम्र में तीन फुट से अधिक बढ़ने से जिदपूर्वक इंकार कर देता है। उसे ‘तीन गुणा अधिक स्मार्ट, बड़े मजबूत लोगों से बहुत नीचे रहते हुए उनसे कई गुणा बेहतर, अव्वल, उनकी छायाओं से अपनी छाया नापने की आवश्यकता अनुभव नहीं हुई, बाहर और भीतर से भी पूरी तरह परिपक्व था।’ 600 पन्नों का ‘टिन ड्रम’ पढ़ना एक चुनौती है। वाक्य लंबे, जटिल और शैली अनोखी, अतार्किक क्रम, स्वप्न-सी विचित्र बातें हैं।
इस पर बनी एबसर्ड, भयंकर और ब्लैक कॉमेडी फिल्म में वॉइज-ओवर का प्रयोग करते हुए जर्मनी के इतिहास, हिटलर के उदय और नाजी पार्टी की शक्ति और प्रभाव को चित्रित किया है। फिल्म गुंटर ग्रास के सहयोग, विशेष रूप से संवाद लेखन में सहायता से बनाई है।
सर्वोत्तम विदेशी फिल्म का अकादमी पुरस्कार
फिल्म में सेविड बेनेट, मारिया एडोर्फ, एंजेला विंकलर तथा डैनियल ऑल्ब्रा ने प्रमुख भूमिकाएं की हैं। फिल्म को सर्वोत्तम विदेशी फिल्म का अकादमी पुरस्कार मिला। बेचैन करने वाली, दु:स्वप्न जैसी जर्मन भाषा की यह फिल्म इंग्लिश सबटाइटिल के साथ उपलब्ध है।
फिल्म में कांच चटकाने के दृश्य बहुत प्रभावशाली बन पड़े हैं। इफेल टॉवर के नीचे खड़े हिटलर को न्यूजरील फुटेज द्वारा सीपिया टोन में दिखाया गया है, फिल्म हिटलर को कहीं स्पष्ट रूप से नहीं दिखाती है। फिल्म में नाज़ी रैली दिखाने के लिए भी सीपिया टोन का उपयोग किया गया है। कैसे नाज़ी मार्च ऑस्कर के ड्रम बीट पर वाल्ट्ज़ में परिवर्तित हो जाता है, यह दृश्य सिनेमाई कुशलता का प्रतीक है।
इन सब कारणों से गुंटर ग्रास, उनके उपन्यास ‘टिन ड्रम’ और उस पर बनी फिल्म का नगाड़ा बार-बार बजता रहा है। जब तक दुनिया में तमस है, गुंटर ग्रास का कार्य प्रासंगिक बना रहेगा।
कुशाग्र और कुटिल ऑस्कर मैट्जेराथ के शब्दों में ‘द टिन ड्रम’ की पूरी कहानी का निचोड़ है, ‘लाइट बल्ब के नीचे पैदा हुआ, तीन साल की उम्र में अपनी बाढ़ रोक दी, ड्रम मिला, शीशे चटकाए-तोड़े, वनीला सूंघा, चर्च में खखारा... बढ़ना तय किया।
ड्रम कब्र में डाला, पश्चिम गया, पूर्व में जो था उसे खो दिया, पत्थर पर नक्काशी सीखी, मॉडल के लिए मुद्राएं दीं, अपने ड्रम के पास वापिस आया, कॉन्क्रीट का निरीक्षण किया, धन कमाया और अंगुली की देखभाल की, अंगुली छोड़ी, हंसते हुए पलायन किया, गिरफ्तार हुआ, अपराधी ठहराया गया, सजा मिली, कैद में और अब जल्दी आजाद होने वाला है, और आज मेरा जन्मदिन है, मैं तीस साल का हूं और अभी भी सदा की तरह ब्लैक कुक से डरता हूं – आमीन।’
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