‘द कलर पर्पल’ की कहानी
‘द कलर पर्पल’ की कहानी बहुत सरल और छोटी-सी है। सीली और नेटी दो बहने हैं, सीली अपने पति मि. (वह इस व्यक्ति के डर से उसका नाम नहीं ले पाती है) और मि. के बच्चों के साथ अमेरिका में रहती है जबकि नेटी एक मिशनरी परिवार के साथ अफ्रीका में। सीली अपने पति की प्रेमिका शुग एवरी की सहायता से खुद का महत्व पहचानती है, अपने क्रूर पति से निकट संबंध स्थापित करती है।
विवाह पूर्व पिता द्वारा बलात्कार के फलस्वरूप उत्पन्न सीली के दो बच्चे अफ्रीका में मिशनरी दम्पत्ति के पास हैं, नेटी उनकी देखभाल कर रही है। जब दोनों बहनें संग थीं, नेटी ने सीली को लिखना-पढ़ना सिखाया था। काफी समय तक सीली को नेटी के विषय में कुछ नहीं पता था क्योंकि उसका पति मि. नेटी के पत्र छिपा देता था। शुग उसे नेटी के पत्र देती है।
पहले सीली अपनी सारी बातें ईश्वर को पत्र लिख कर बताया करती थी, अब वह नेटी को पत्र लिखने लगी। सीली अपनी मेहनत और लगन से बीमार शुग को चंगा करती है। सीली का व्यवहार शुग को सीली के निकट ला देता है। नेटी से सीली को पता चलता है, जिसे वे अपना पा समझती थीं, वह उनका सौतेला पिता था। उनका अपना पिता उनके लिए काफी सम्पत्ति छोड़ गया था। उपन्यास के अंत में नेटी बच्चों सहित अमेरिका आ जाती है। सीली अपना व्यापार स्थापित करती है। शुग, सोफिया और मिस्टर अल्बर्ट तथा सीली में मधुर संबंध विकसित होता है।
उपन्यास की कहानी बीसवीं सदी के प्रारंभ में घटित होती है। बीस साल के लम्बे समय में ज्यों-ज्यों सीली समझदार और शिक्षित होती जाती है, त्यों-त्यों उसके पत्रों की भाषा बदलती जाती है, प्रौढ़ होती जाती है। उपन्यास पाठकों को सीली, नेटी, शुग एवरी, सोफिया और उनके अनुभवों से समृद्ध करता है। उनका दु:ख-दर्द, उनका संघर्ष, उनका बहनापा, उनका विकास, उनका साहस, उनके उठ खड़े होने की अदम्य इच्छा, जिजीविषा पाठक को एफ्रो-अमेरिकन स्त्री जीवन के एक नए आयाम से परिचित कराता है।
एलिस वॉकर की प्रसिद्ध किताब ‘द कलर पर्पल’ पर हॉलीवुड के प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक स्टीवन स्पियलबर्ग ने इसी नाम से फिल्म बनाई। हालांकि इसके लिए द्टीवान स्पियलबर्ग की काफी आलोचना की। फिल्म में शुग की भूमिका में सुंदरी तारिका काफी साफ रंग की मार्ग्रेट एवरी ने की है। नायिका सीली के रूप में वूफी गोल्डबर्ग हैं।
डैनी ग्लोवर मिस्टर अलबर्ट की भूमिका में बड़ी सहजता से उतरते हैं। ओफ्रा विंफ्रे सोफिया के रूप में दर्शकों की सहानुभूति बटोरने में कामयाब हैं। उनकी चाल और व्यवहार सोफिया के व्यक्तित्व से मेल खाता है। अकोसुआ बूसिया ने नेटी की भूमिका की है, पर फिल्म में वह बहुत सीमित है। स्पियलबर्ग पार आरोप है कि उन्होंने फिल्म केलिए उचित अभिनेताओं का चुनाव नहीं किया वे अश्वेत समुदाय का सही प्रतिनिधित्व प्रस्तुत न कर सके।
मेरे विचार से इसके बावजूद स्पियलबर्ग द्वारा निर्मित फिल्म देखी जानी चाहिए। इस उपन्यास ‘द कलर पर्पल’ को न केवल पढ़ा जाना चाहिए बल्कि इसे पढ़ाया भी जाना चाहिए।
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