आत्मकथाओं में दहशत, दु:ख, चिंता का मिश्रण
यह एक स्त्री की संघर्ष गाथा है, सच्ची दास्तान। बीसवीं सदी के पूर्वार्द्ध में अमेरिका में अश्वेत होना बहुत बड़ा अभिशाप था, कानूनन गुलामी समाप्त हो चुकी थी, पर समाज लोगों की मान्यताओं से चलता है। इस समय अमेरिका में श्वेत समुदाय के लोग अश्वेत नागरिकों को मनुष्य मानने को राजी न थे। अमेरिका के दक्षिण हिस्से में नस्ल भेदभाव व्याप्त था। आज भी दावे के साथ नहीं कहा जा सकता है, नस्लवाद, रंग भेदभाव, लिंग भेदभाव पूरी तरह से समाप्त हो गया है।
उनकी आत्मकथा दहशत, दु:ख, चिंता और इसके विरोध में उठ खड़े होने का चित्रण है। उन्होंने एक बार अपनी मित्र लेखिका रोजा गे को लिखा, बचपन में वे सोचती थीं, बेहद कुरूप हैं और किसी ने उनकी इस सोच का खंडन नहीं किया। उनकी मोमा (दादी) ने भी कभी इस गलती को नहीं सुधारा, जबकि वे उन्हें बहुत प्यार करती थीं। उनकी दादी एक बहुत ही साहसी स्त्री थीं। उन्होंने आत्मकथा कैसे लिखी, अपने साक्षात्कारों, अपने लेखन में इसे वे विस्तार से बताती हैं।
एक दिन वे अपने मित्र प्रसिद्ध अफ्रो-अमेरिकन लेखक जेम्स बॉल्डविन, जूल्स एवं जूडी फेफर के साथ खाना खाने गईं। वहां उन्होंने जीवन के कुछ अनुभव सुनाए। जूडी फेफर ने रैंडम हाउस के एक एडीटर बॉब लूमिस को फोन किया, कहा, क्यों नहीं वे लोग माया से आत्मकथा लिखवाते हैं। बॉब लूमिस ने माया एंजेलो को फोन लगा कर आत्मकथा लिखने के लिए कहा। माया ने मना कर दिया। उस समय वे व्यस्त थीं, अफ्रीका और अश्वेत अमेरिकन संस्कृति पर काम कर रहीं थीं। इंकार के बाद वे कैलीफोर्निया चली गईं। बॉब ने बार-बार फोन किया, माया ने मना किया।
जेम्स बॉल्डविन को मालूम था, माया को चुनौती दी जाए, तो वे पीछे नहीं हटेंगी। बॉब ने फोन पर कहा, मैं अब तुम्हें और अधिक तंग नहीं करूंगा। मुझे लगता है, तुमसे नहीं होगा। माया को यह चुनौती लगा। वे बोलीं, क्या कह रहे हो? मैं क्यों नहीं लिख सकती हूं? मैं जरूर लिखूंगी।
शुरू में माया एंजेलो का विचार था कि वे छोटा-सा कुछ लिख देंगी। काम खतम हो जाएगा, वे फिर से अपने नाटक, स्क्रिप्ट और काव्य की दुनिया में लौट जाएंगी। शुरु किया तो छ: भाग में आत्मकथा लिखी।
माया की आत्मकथा का पहला भाग ‘आई नो व्हाई कैज्ड बर्ड सिंग्स’ अश्वेत होने की दहशत, अपमान और दर्द को बड़ी मार्मिकता से चित्रित करता है। विस्थापन के दर्द को दर्शाता है। माया और भाई का विस्थापन किसी प्राकृतिक आपदा के कारण नहीं हुआ है। उनके माता-पिता जीवित थे। कैलीफोर्निया से अराकांसा के स्टैम्प कस्बे तक की लम्बी यात्रा बच्चे अकेले करते हैं, जिस आदमी के साथ उन्हें भेजा गया था, अरिजोना में उतर कर कब का जा चुका था।
बच्चों के पास उनका पता टैग था। वे नहीं जानते थे, उन्हें क्यों और कहां भेजा जा रहा है। इनका कई बार विस्थापन होता है। बाद में उनका पिता एक बार फिर उन्हें उनकी जड़ों अराकांसा से उखाड़ कर उनकी मां के पास सेंट लुई में छोड़ आता है। फिर वहां दुर्घटना के बाद उनकी मां को लगता है, वह उन्हें ठीक से नहीं रख सकती है। एक बार फिर उन्हें मोमा के पास अराकांसा भेज दिया जाता है। इस तरह बचपन में उनकी कई बार शंटिंग होती है।
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